
Ramayan EP 10 - श्री सीता-राम विवाह
Description
Ramayan (1987) का दसवां एपिसोड भारतीय महाकाव्य और संस्कृति के सबसे अलौकिक, पवित्र और आनंदमय प्रसंग—'श्री सीता-राम विवाह' को अत्यंत भव्यता और भक्ति-भाव के साथ प्रस्तुत करता है। अयोध्या नरेश महाराजा दशरथ अपने चारों पुत्रों की बारात लेकर मिथिला (जनकपुर) पहुँच चुके हैं। जनकपुर में चारों ओर उत्सव, गीत-संगीत और अपार हर्ष का वातावरण है। राजा जनक और उनके भाई कुशध्वज अत्यंत श्रद्धा और सत्कार के साथ राजा दशरथ, महर्षि वशिष्ठ और अन्य अतिथियों का स्वागत करते हैं। विवाह मंडप को स्वर्ग के समान सजाया गया है। शुभ मुहूर्त में चारों राजकुमार—राम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न—दूल्हे के वेश में मंडप में पधारते हैं। उनकी अलौकिक छवि देखकर सभी नगरवासी और देवता मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। इसके पश्चात्, राजा जनक अपनी चारों पुत्रियों—सीता, उर्मिला, मांडवी और श्रुतकीर्ति—को मंडप में लाते हैं। राजा जनक अत्यंत भावुक होकर अपनी प्राणों से भी प्रिय पुत्री सीता का हाथ श्री राम के हाथों में सौंपते हुए 'कन्यादान' का पवित्र संकल्प करते हैं। वे कहते हैं, "हे राम! यह मेरी पुत्री सीता है, जो आज से आपकी जीवनसंगिनी बनेगी। इसे स्वीकार करें और इसका पाणिग्रहण करें।" श्री राम अत्यंत आदर के साथ माता सीता का हाथ थामते हैं। अग्निदेव को साक्षी मानकर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच चारों भाइयों का विवाह संपन्न होता है। राम के साथ सीता, भरत के साथ मांडवी, लक्ष्मण के साथ उर्मिला और शत्रुघ्न के साथ श्रुतकीर्ति का विवाह एक ही मंडप में होता है। आकाश से देवता पुष्प वर्षा करते हैं और गंधर्व मंगल गीत गाते हैं। यह एपिसोड न केवल एक विवाह का चित्रण है, बल्कि यह दो महान राजकुलों के मिलन, भारतीय विवाह संस्कारों की पवित्रता, माता-पिता के वात्सल्य और जीवनसाथी के प्रति समर्पण का परम आदर्श प्रस्तुत करता है। दर्शकों के लिए यह एपिसोड एक अत्यंत आध्यात्मिक और भावुक अनुभव है।
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Movie Details
Language
Hindi
Category
ramayan
Duration
Episode 10 (Full Episode)
Release Year
1987











