Ramayan EP 24 - राम-लक्ष्मण द्वारा दशरथ की अन्त्येष्टि
Description
रामानंद सागर की 'रामायण' (1987) का चौबीसवां (24वां) एपिसोड अत्यंत पीड़ादायक, करुणा से भरा हुआ और मानवीय भावनाओं के चरम को छूने वाला अध्याय है। यह वह हृदयविदारक क्षण है जब श्री राम, माता सीता और लक्ष्मण को वन में अपने पूज्य पिता राजा दशरथ के स्वर्गवास का अत्यंत दुखद और अप्रत्याशित समाचार प्राप्त होता है। भरत, शत्रुघ्न, माताएं और पूरी अयोध्या की प्रजा श्री राम को वापस अयोध्या ले जाने के दृढ़ संकल्प के साथ वन की ओर आ रहे हैं। महर्षि भारद्वाज के आश्रम से होते हुए जब भरत की यह विशाल मंडली चित्रकूट पहुंचती है, तो वन के शांत और सुरम्य वातावरण में एक अजीब सी खामोशी और शोक की लहर दौड़ जाती है。 चित्रकूट के घने वन में जब भरत और श्री राम का मिलन होता है, तो वह दृश्य न केवल रामायण का, बल्कि भारतीय टेलीविजन इतिहास का सबसे मार्मिक और आत्मा को झकझोर देने वाला पल बन जाता है। भरत दौड़कर दूर से ही श्री राम के चरणों में गिर जाते हैं और फूट-फूट कर विलाप करने लगते हैं। श्री राम उन्हें उठाकर अपने सीने से लगा लेते हैं। दोनों भाइयों का यह मिलन देखकर देवता भी आसमान से आंसू बहाने लगते हैं। कुछ देर बाद, जब भावनाओं का ज्वार थोड़ा शांत होता है, तब श्री राम भरत से पिता राजा दशरथ और माताओं की कुशल-क्षेम पूछते हैं। तब भरत अत्यंत भारी मन, कांपते होंठों और बहते आंसुओं के साथ श्री राम को बताते हैं कि उनके वियोग में तड़पते हुए पिताजी ने "राम... राम..." पुकारते हुए अपने प्राण हमेशा के लिए त्याग दिए हैं। यह भयंकर समाचार सुनकर श्री राम, लक्ष्मण और माता सीता पर मानों वज्र गिर पड़ता है। जो राम कभी किसी भी विपरीत परिस्थिति में विचलित नहीं होते, जो हमेशा शांत और स्थिर रहते हैं, वे अपने पिता की मृत्यु का समाचार सुनकर अचेत होकर जमीन पर गिर पड़ते हैं। वन का पूरा वातावरण चीत्कारों और विलाप से गूंज उठता है। लक्ष्मण और सीता भी गहरे सदमे में डूब जाते हैं। इसके पश्चात्, श्री राम अपने भाइयों, माताओं और महर्षि वशिष्ठ के मार्गदर्शन में मंदाकिनी नदी के पवित्र तट पर जाते हैं। यद्यपि भरत और शत्रुघ्न ने अयोध्या में राजा दशरथ का वैदिक रीति से अंतिम संस्कार कर दिया था, परंतु एक पुत्र होने के नाते श्री राम और लक्ष्मण का भी यह परम कर्तव्य था कि वे अपने पिता की आत्मा की शांति के लिए जलांजलि और तर्पण दें। श्री राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न नदी के जल में प्रवेश करते हैं और अपने पिता के निमित्त तिल और जल अर्पित करते हैं। श्री राम वन के कंद-मूल और फलों से अपने पिता का पिंड दान करते हैं। वे रोते हुए अपने पिता को याद करते हैं कि कैसे उनके पिता ने उन्हें जीवन भर अपार स्नेह और दुलार दिया, और अंत में उनके वन गमन के कारण ही उन्हें अपने प्राण गंवाने पड़े। यह तर्पण और श्राद्ध कर्म हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण संस्कारों में से एक है, जो यह सिखाता है कि माता-पिता के प्रति संतान का कर्तव्य उनके जीवन के बाद भी समाप्त नहीं होता। यह एपिसोड पितृभक्ति, वियोग की असहनीय पीड़ा और वैदिक संस्कारों के पूर्ण पालन का अत्यंत ही उत्कृष्ट और भावुक चित्रण है। यह सिद्ध करता है कि साक्षात भगवान का अवतार होकर भी श्री राम ने एक साधारण मनुष्य की भांति सभी मर्यादाओं, पारिवारिक भावनाओं और सामाजिक कर्तव्यों का पूर्ण निष्ठा के साथ पालन किया।
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Movie Details
Language
Hindi
Category
ramayan
Duration
Episode 24 (Full Episode)
Release Year
1987












