Ramayan EP 27 - सीता-अनसूया मिलन
Description
रामानंद सागर की 'रामायण' (1987) का सत्ताईसवां (27वां) एपिसोड वनवास के कठिन जीवन में एक आध्यात्मिक, ज्ञानवर्धक और शांति से भरा ठहराव है। यह एपिसोड मुख्य रूप से नारी धर्म, पातिव्रत्य और स्त्री के जीवन के उच्च आदर्शों पर केंद्रित है। चित्रकूट से आगे की वन यात्रा करते हुए श्री राम, माता सीता और लक्ष्मण महर्षि अत्रि के पवित्र आश्रम में पहुँचते हैं। महर्षि अत्रि और उनकी अर्धांगिनी, महान पतिव्रता सती अनसूया, इन तीनों तपस्वियों का अत्यंत प्रेम और वात्सल्य के साथ स्वागत करते हैं। सती अनसूया वह महान देवी हैं जिनके पातिव्रत्य और तपोबल के सामने स्वयं त्रिमूर्ति (ब्रह्मा, विष्णु और महेश) को भी झुकना पड़ा था और बाल रूप धारण कर उनके घर में खेलना पड़ा था। जब माता सीता सती अनसूया के चरण स्पर्श करती हैं, तो माता अनसूया उन्हें अत्यंत स्नेह से अपने गले लगा लेती हैं। वे सीता जी के त्याग की सराहना करती हैं कि उन्होंने राजमहल के ऐश्वर्य को ठुकराकर अपने पति के साथ वन की धूल छानने का निर्णय लिया। इसके पश्चात माता अनसूया सीता जी को 'पातिव्रत्य धर्म' (पति के प्रति सच्ची निष्ठा और समर्पण) का अत्यंत विस्तृत और ज्ञानवर्धक उपदेश देती हैं। वे सीता जी को बताती हैं कि एक स्त्री का सबसे बड़ा धर्म, उसका सबसे बड़ा आभूषण और उसकी सबसे बड़ी तपस्या उसका पति ही होता है। चाहे परिस्थितियां कितनी भी विपरीत क्यों न हों, पति निर्धन हो, बीमार हो या संकट में हो, एक सच्ची पत्नी हमेशा अपने पति के सुख-दुख में परछाई की तरह उसके साथ खड़ी रहती है। माता अनसूया के मुख से निकले ये शब्द भारतीय संस्कृति में एक आदर्श पत्नी की परिभाषा को बहुत ही गहराई से स्थापित करते हैं। माता सीता अत्यंत विनम्रता और हाथ जोड़कर उनके इन अमूल्य उपदेशों को सुनती हैं। वे कहती हैं कि वे अपना पूरा जीवन इन्हीं आदर्शों पर व्यतीत करेंगी और श्री राम की सेवा को ही अपना परम धर्म मानेंगी। सीता जी की विनम्रता से प्रसन्न होकर, सती अनसूया उन्हें कुछ ऐसे दिव्य और जादुई वस्त्र तथा आभूषण भेंट करती हैं, जो कभी भी मैले नहीं होते, पुराने नहीं पड़ते और हमेशा अपनी चमक बनाए रखते हैं। साथ ही वे सीता जी को एक ऐसा दिव्य अंगराग (उबटन/लेप) भी देती हैं जिससे उनका शारीरिक सौंदर्य वन की चिलचिलाती धूप और आंधी-तूफान में भी कभी मलिन नहीं होगा। वन के कठिन जीवन में माता सीता के लिए यह एक अत्यंत अमूल्य और आशीर्वाद स्वरूप भेंट थी। यह एपिसोड भारतीय संस्कृति में नारी के सम्मान, उसके अधिकारों और उसके पारिवारिक दायित्वों का एक बहुत ही सुंदर और प्रेरणादायक चित्रण है। गुरु और संतों का सानिध्य किस प्रकार जीवन के कष्टों को दूर कर देता है और मन को अपार शांति प्रदान करता है, यह भी इस प्रसंग में बड़ी ही कुशलता से दर्शाया गया है। माता अनसूया और सीता जी का यह मिलन दो युगों की महानतम पतिव्रता स्त्रियों का एक अद्भुत और ऐतिहासिक संगम है।
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Movie Details
Language
Hindi
Category
ramayan
Duration
Episode 27 (Full Episode)
Release Year
1987












