Ramayan EP 29 - अगस्त्य मिलन | जटायु मिलन
Description
रामायण (1987) का उनतीसवां (29वां) एपिसोड दिव्य शक्तियों की प्राप्ति, महान संतों के दर्शन और एक बहुत ही अनोखी तथा मार्मिक मित्रता का प्रतीक है। राक्षसों के वध की कठोर प्रतिज्ञा लेने के बाद, सुतीक्ष्ण मुनि की सलाह पर श्री राम, सीता और लक्ष्मण महान तपस्वी 'महर्षि अगस्त्य' के आश्रम में पहुँचते हैं। महर्षि अगस्त्य कोई साधारण ऋषि नहीं हैं; ये वही महान संत हैं जिन्होंने एक बार अपने तपोबल से पूरे समुद्र का जल पी लिया था और आकाश चूमने वाले विंध्याचल पर्वत के घमंड को चूर-चूर कर दिया था। जब श्री राम अगस्त्य मुनि के आश्रम में प्रवेश करते हैं, तो ऋषि अगस्त्य साक्षात परब्रह्म (भगवान विष्णु) के दर्शन पाकर भावविभोर हो जाते हैं। वे जानते हैं कि श्री राम का अवतार किस महान उद्देश्य (रावण और राक्षसों के वध) के लिए हुआ है और इसके लिए उन्हें किन चीजों की आवश्यकता पड़ेगी। इसलिए, भविष्य के महायुद्ध की तैयारी के रूप में, महर्षि अगस्त्य श्री राम को भगवान विष्णु का अत्यंत चमत्कारी और दिव्य धनुष, कभी खाली न होने वाला तरकश (Quiver) और एक अजेय खड्ग (तलवार) भेंट करते हैं। ये अस्त्र-शस्त्र साधारण नहीं हैं; इनका निर्माण देवताओं ने किया है और इन्हीं का प्रयोग कर श्री राम आगे चलकर बड़े से बड़े मायावी राक्षसों का संहार करने वाले हैं। महर्षि अगस्त्य श्री राम को दंडकारण्य के 'पंचवटी' नामक एक अत्यंत रमणीय और पवित्र स्थान पर अपनी कुटिया बनाकर निवास करने का सुझाव देते हैं। महर्षि का आशीर्वाद और दिव्य अस्त्र प्राप्त कर तीनों वनवासी पंचवटी की ओर प्रस्थान करते हैं। रास्ते में एक बहुत ही अद्भुत घटना घटती है—उनकी भेंट एक अत्यंत विशालकाय और वृद्ध गिद्ध से होती है, जो एक पेड़ पर बैठा होता है। लक्ष्मण को संदेह होता है कि यह कोई मायावी राक्षस है जो उन्हें नुकसान पहुंचाना चाहता है। वे अपना धनुष उठाते हैं, लेकिन श्री राम उन्हें रोकते हैं। वह विशाल पक्षी अपना परिचय 'जटायु' के रूप में देता है। जटायु बताते हैं कि वे पक्षिराज गरुड़ के वंशज हैं और अयोध्या नरेश राजा दशरथ के अत्यंत घनिष्ठ और पुराने मित्र रहे हैं। राजा दशरथ का नाम और अपने पिता के प्रति जटायु का प्रेम देखकर श्री राम और लक्ष्मण भावुक हो उठते हैं। वे जटायु को अपने पिता के समान ही आदर और सम्मान देते हैं और उनके चरणों में प्रणाम करते हैं। जटायु श्री राम को वचन देते हैं कि वन के इस कठिन जीवन में जब भी राम और लक्ष्मण कुटिया से बाहर शिकार या किसी अन्य कार्य के लिए जाएंगे, तो वे (जटायु) एक रक्षक के रूप में माता सीता की सुरक्षा करेंगे। यह एक अत्यंत सुंदर और मार्मिक दृश्य है जहाँ मनुष्य और पक्षी (प्रकृति) के बीच इतना आत्मीय, निस्वार्थ और पवित्र संबंध स्थापित होता है। जटायु का यह मिलन आगे चलकर रामायण की कहानी में एक बहुत बड़ा और निर्णायक मोड़ साबित होता है। यह एपिसोड प्रकृति और मनुष्य के बीच के प्रेम को बहुत ही गहराई से प्रस्तुत करता है।
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Movie Details
Language
Hindi
Category
ramayan
Duration
Episode 29 (Full Episode)
Release Year
1987












