Ramayan EP 30 - शूर्पणखा का खर-दूषण के पास जाना
Description
रामानंद सागर की 'रामायण' का तीसवां (30वां) एपिसोड वह महत्वपूर्ण और विस्फोटक मोड़ है जहाँ से रामायण के महासंग्राम (राम-रावण युद्ध) की असली नींव पड़ती है। अगस्त्य मुनि के सुझाव पर श्री राम, लक्ष्मण और माता सीता गोदावरी नदी के पावन तट पर स्थित 'पंचवटी' में अपनी सुंदर पर्णकुटी बनाकर अत्यंत सुखपूर्वक वनवास का समय व्यतीत कर रहे हैं। वन की शांति, खिले हुए फूल और प्राकृतिक सुंदरता उनके जीवन को आनंद से भर देती है। लक्ष्मण दिन-रात अपने बड़े भाई और भाभी की सेवा में एक पहरेदार की तरह लगे रहते हैं। लेकिन पंचवटी की यह शांति ज्यादा दिन नहीं टिकती। एक दिन लंकापति रावण की विधवा और अत्यंत क्रूर, मायावी बहन 'शूर्पणखा' वन में घूमते हुए पंचवटी के उसी क्षेत्र में पहुँचती है। उसकी दृष्टि जैसे ही श्री राम के अलौकिक, सुंदर और आकर्षक मुखमंडल पर पड़ती है, वह उनके प्रेम (कामवासना) में अंधी हो जाती है। शूर्पणखा तुरंत अपने डरावने राक्षसी रूप को छिपाकर एक अत्यंत सुंदर, कोमल और आकर्षक स्त्री का रूप धारण करती है और श्री राम के पास जाकर उनके सामने विवाह का प्रस्ताव रखती है। श्री राम, जो अपनी पत्नी सीता के प्रति पूर्णतः निष्ठावान (एकपत्नीव्रत) हैं और मर्यादा पुरुषोत्तम हैं, मुस्कुराते हुए बड़ी ही विनम्रता से उसके इस अनुचित प्रस्ताव को ठुकरा देते हैं। वे मजाक में उसे लक्ष्मण के पास भेज देते हैं यह कहकर कि वे तो विवाहित हैं, शायद लक्ष्मण उसकी बात मान लें। लक्ष्मण, जो स्वभाव से उग्र हैं और शूर्पणखा के कुटिल छल को पल भर में समझ जाते हैं, उसका व्यंग्यात्मक रूप से मजाक उड़ाते हैं। वे कहते हैं कि वे तो राम के दास हैं, यदि वह उनसे विवाह करेगी तो उसे भी दासी बनना पड़ेगा। इस तरह दोनों भाई उसे एक-दूसरे के पास भेजकर उसका उपहास करते हैं। जब शूर्पणखा को यह अहसास होता है कि दोनों भाई उसका अपमान कर रहे हैं और माता सीता के कारण राम उसे स्वीकार नहीं कर रहे हैं, तो उसका सारा सुंदरी का नाटक खत्म हो जाता है। वह अपने असली भयंकर, खूंखार राक्षसी रूप में आ जाती है और अपने बड़े-बड़े नाखून निकालकर माता सीता को खाने के लिए उन पर झपटती है। अपनी माता समान भाभी पर यह जानलेवा हमला देखकर लक्ष्मण का क्रोध ज्वालामुखी की तरह भड़क उठता है। श्री राम का इशारा पाते ही लक्ष्मण अपनी चमकती हुई तलवार निकालते हैं और पलक झपकते ही शूर्पणखा के नाक और कान काट कर उसे विद्रूप कर देते हैं। नाक-कान कटने से खून से लथपथ और दर्द से चीखती-चिल्लाती शूर्पणखा वन में हाहाकार मचा देती है। वह अपमान की आग में जलते हुए जनस्थान में राज करने वाले अपने सगे भाइयों—खर, दूषण और त्रिशिरा—के पास पहुँचती है। जब खर और दूषण अपनी बहन की यह वीभत्स दुर्दशा देखते हैं, तो उनका खून खौल उठता है। वे 14 हजार खूंखार और मायावी राक्षसों की विशाल सेना लेकर श्री राम और लक्ष्मण से अपनी बहन के अपमान का बदला लेने के लिए पंचवटी की ओर कूच करते हैं। यह एपिसोड सीता हरण और लंका दहन की खौफनाक घटनाओं का सबसे बड़ा कारण (Trigger Point) बनता है।
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Movie Details
Language
Hindi
Category
ramayan
Duration
Episode 30 (Full Episode)
Release Year
1987












