Ramayan EP 31 - शूर्पणखा का रावण के पास जाना
Description
रामायण का इकतीसवां (31वां) एपिसोड श्री राम के अकल्पनीय पराक्रम और बुराई की सबसे बड़ी जड़ (रावण) तक प्रतिशोध की आग पहुँचने की एक बहुत ही तीव्र और रोमांचक कहानी है। शूर्पणखा के कटे हुए नाक-कान का बदला लेने के लिए खर, दूषण और त्रिशिरा अपने 14 हजार खूंखार और मायावी राक्षसों की विशाल सेना लेकर पंचवटी पर चारों ओर से आक्रमण कर देते हैं। इस भयंकर संकट और राक्षसों की विशाल संख्या को देखकर श्री राम लक्ष्मण को आदेश देते हैं कि वे माता सीता को लेकर किसी सुरक्षित गुफा में चले जाएं, ताकि युद्ध के दौरान उन पर कोई आंच न आए। इसके पश्चात, श्री राम अकेले ही उन 14 हजार राक्षसों का सामना करने के लिए युद्धभूमि में उतरते हैं। यह रामायण के सबसे अद्भुत और रोंगटे खड़े कर देने वाले युद्धों में से एक है। श्री राम अपने कोदंड धनुष से ऐसे अचूक, तेज और प्रलयंकारी बाणों की वर्षा करते हैं कि पूरा आकाश बाणों से ढक जाता है। राक्षसों को ऐसा प्रतीत होता है मानो हजारों राम उनके सामने खड़े हों। कुछ ही प्रहर (घंटों) के भीतर श्री राम अकेले ही खर, दूषण, त्रिशिरा और उनकी पूरी 14 हजार की विशाल सेना का बुरी तरह संहार कर देते हैं। पूरी भूमि राक्षसों के रक्त और शवों से पट जाती है। यह चमत्कार देखकर देवता भी आश्चर्यचकित रह जाते हैं और आकाश से पुष्प वर्षा करते हैं। अपने भाइयों और पूरी अपराजेय सेना को इस तरह गाजर-मूली की तरह कटते देखकर दूर खड़ी शूर्पणखा के पैरों तले जमीन खिसक जाती है। डर, शोक और बदले की भयंकर आग में जलती हुई वह वहां से सीधे समुद्र पार कर लंका की ओर भागती है। जब शूर्पणखा लंकापति दशानन रावण के भव्य और सोने से जड़े दरबार में पहुँचती है, तो भरी सभा में चीत्कार और विलाप करते हुए वह रावण के अहंकार और उसकी सत्ता को खुलेआम ललकारती है। वह अपने कटे हुए नाक-कान दिखाती है और रावण को धिक्कारती है कि उसके होते हुए उसकी बहन की यह दुर्दशा एक साधारण वनवासी (राम) ने कर दी और जनस्थान के सभी शक्तिशाली रक्षकों को मार डाला। रावण, जिसे अपने बल, तपस्या और सत्ता पर बहुत घमंड था, यह सुनकर आगबबूला हो जाता है। लेकिन शूर्पणखा केवल यहीं नहीं रुकती; वह जानती है कि रावण की सबसे बड़ी कमजोरी क्या है। रावण को उकसाने के लिए शूर्पणखा माता सीता के अलौकिक और अद्वितीय सौंदर्य का ऐसा बढ़ा-चढ़ाकर कामुक वर्णन करती है कि रावण के मन में प्रतिशोध के साथ-साथ सीता को पाने की भयंकर कामवासना जाग उठती है। शूर्पणखा कहती है कि ऐसी सुंदर स्त्री वन में तपस्वियों के साथ नहीं, बल्कि लंका के राजमहल में तुम्हारी पटरानी बनकर रहनी चाहिए। यह सुनते ही रावण का बचा-खुचा विवेक भी पूरी तरह नष्ट हो जाता है और वह सीता हरण की खौफनाक और विनाशकारी साजिश रचना शुरू कर देता है। यह एपिसोड लंका के संपूर्ण विनाश का सबसे पहला बीज बोता है।
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Movie Details
Language
Hindi
Category
ramayan
Duration
Episode 31 (Full Episode)
Release Year
1987












