Ramayan EP 32 - स्वर्णमृग रूप मारीच का मारा जाना |लक्ष्मण रेखा
Description
रामायण (1987) का बत्तीसवां (32वां) एपिसोड रामायण की कहानी का सबसे बड़ा और निर्णायक मोड़ है। यह एपिसोड धोखे, मायाजाल और एक ऐसी गलती की कहानी है जो पूरे विश्व का इतिहास बदल देती है। शूर्पणखा के कटे हुए नाक-कान और खर-दूषण की मृत्यु का बदला लेने के लिए, लंकापति रावण एक अत्यंत ही कुटिल और खौफनाक षड्यंत्र रचता है। वह अपने मामा मारीच के पास जाता है, जो अपनी मायावी शक्तियों के लिए प्रसिद्ध है। रावण मारीच को आदेश देता है कि वह एक अत्यंत सुंदर, आकर्षक और चमत्कारी 'स्वर्ण मृग' (सोने का हिरण) का रूप धारण करे और पंचवटी जाकर सीता को लुभाए। शुरुआत में मारीच रावण को समझाता है कि श्री राम कोई साधारण मनुष्य नहीं बल्कि साक्षात ईश्वर हैं, और उनसे बैर लेना लंका के विनाश का कारण बनेगा। परंतु रावण के क्रोध और मृत्यु के भय से मारीच अंततः यह कार्य करने के लिए विवश हो जाता है। मारीच एक अत्यंत लुभावने सोने के हिरण का रूप धारण कर पंचवटी के आश्रम के पास चरने लगता है। उसकी चमक और सुंदरता इतनी अद्भुत है कि माता सीता उसे देखकर मुग्ध हो जाती हैं। वे श्री राम से हठ करती हैं कि उन्हें वह स्वर्ण मृग जीवित चाहिए ताकि वे उसे अपने साथ अयोध्या ले जा सकें, और यदि जीवित न मिले तो उसकी सुनहरी छाल चाहिए। श्री राम, जो यह जानते हैं कि सोने का हिरण प्रकृति के नियमों के विरुद्ध है, फिर भी अपनी प्रिय पत्नी की इच्छा पूरी करने के लिए अपना धनुष-बाण लेकर उस मायावी मृग के पीछे घने जंगल में निकल पड़ते हैं। जाने से पहले वे लक्ष्मण को आदेश देते हैं कि वे कुटिया में रहकर माता सीता की रक्षा करें। मारीच श्री राम को बहुत दूर घने जंगल में ले जाता है। अंततः जब राम समझ जाते हैं कि यह कोई मायावी राक्षस है, तो वे उस पर अपना अचूक बाण चलाते हैं। बाण लगते ही मारीच अपने असली राक्षसी रूप में आ जाता है, लेकिन मरते-मरते वह रावण की योजना के अनुसार श्री राम की आवाज में "हा सीते! हा लक्ष्मण!" पुकारते हुए जोर से चीखता है। यह चीख जब कुटिया तक पहुँचती है, तो माता सीता घबरा जाती हैं। उन्हें लगता है कि उनके प्राणनाथ श्री राम किसी बड़े संकट में हैं और उन्होंने लक्ष्मण को सहायता के लिए पुकारा है। वे लक्ष्मण से तुरंत राम की मदद के लिए जाने को कहती हैं। लक्ष्मण, जो जानते हैं कि त्रिलोकीनाथ श्री राम को कोई संकट नहीं आ सकता, सीता माता को समझाते हैं कि यह राक्षसों की कोई चाल है। परंतु सीता जी चिंता और घबराहट में लक्ष्मण पर अत्यंत कठोर और तीखे आरोप लगा देती हैं। इन वाग्बाणों से आहत होकर लक्ष्मण जाने के लिए विवश हो जाते हैं। जाने से पूर्व, लक्ष्मण माता सीता की सुरक्षा के लिए अपनी अभिमंत्रित बाण से कुटिया के चारों ओर एक जादुई और पवित्र रेखा खींचते हैं, जिसे 'लक्ष्मण रेखा' कहा जाता है। वे माता सीता से प्रार्थना करते हैं कि चाहे जो हो जाए, वे इस रेखा को पार न करें, क्योंकि ब्रह्मांड की कोई भी शक्ति इस रेखा को पार करके अंदर नहीं आ सकती। यह एपिसोड उस भयंकर भूल की शुरुआत है, जहाँ एक छोटी सी जिद और लक्ष्मण रेखा पार करने का परिणाम पूरे रावण-कुल के विनाश का कारण बनता है।
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Movie Details
Language
Hindi
Category
ramayan
Duration
Episode 32 (Full Episode)
Release Year
1987












