Bhool Bhulaiyaa (2007) - Horror Comedy Movie | Akshay Kumar | Full Movie HD
Description
Bhool Bhulaiyaa (2007) भारतीय सिनेमा की एक कल्ट-क्लासिक और मास्टरपीस साइकोलॉजिकल हॉरर-कॉमेडी फिल्म है, जिसने बॉलीवुड में सस्पेंस और हॉरर के साथ कॉमेडी के परफेक्ट मिश्रण की एक नई मिसाल कायम की। कहानी की शुरुआत अमेरिका से लौटे सिद्धार्थ चतुर्वेदी (शाइनी आहूजा) और उनकी नवविवाहिता पत्नी अवनी (विद्या बालन) से होती है, जो अपने पैतृक गाँव वापस आते हैं। सिद्धार्थ का परिवार शाही घराने से ताल्लुक रखता है, और वे अपने पुश्तैनी महल में रहने का फैसला करते हैं। लेकिन गाँव के लोगों और सिद्धार्थ के चाचा (परेश रावल) का मानना है कि उस महल के तीसरे माले पर एक खौफनाक आत्मा 'मंजुलिका' का वास है। मंजुलिका एक नर्तकी (Dancer) थी, जिसे सालों पहले उस घराने के एक क्रूर राजा ने जबरन बंदी बना लिया था और उसके प्रेमी की हत्या कर दी थी। कहा जाता है कि मंजुलिका की अतृप्त आत्मा आज भी उस महल में भटकती है और राजा के वंशजों से बदला लेना चाहती है। सिद्धार्थ, जो कि एक आधुनिक और विज्ञान में विश्वास रखने वाला व्यक्ति है, इन सब बातों को अंधविश्वास मानकर सिरे से खारिज कर देता है और उस तीसरे माले का ताला खोल देता है। ताला खुलते ही महल में डरावनी और अजीबोगरीब घटनाओं का सिलसिला शुरू हो जाता है। रात के अंधेरे में घुंघरुओं की आवाजें आना, अजीब परछाइयों का दिखना और परिवार के सदस्यों पर जानलेवा हमले होना—यह सब परिवार को दहशत में डाल देता है। शुरुआत में सभी को लगता है कि महल में राधा (अमीषा पटेल) पर भूत का साया है, जो सिद्धार्थ के बचपन की दोस्त है और उसकी शादी टूटने के कारण डिप्रेशन में है। जब हालात बेकाबू हो जाते हैं, तब सिद्धार्थ अपने दोस्त और अमेरिका के एक मशहूर मनोचिकित्सक (Psychiatrist) डॉ. आदित्य श्रीवास्तव (अक्षय कुमार) को मदद के लिए बुलाता है। आदित्य का फिल्म में आना एक ताजी हवा के झोंके जैसा है। उसका अजीबोगरीब, हास्यपूर्ण और बातूनी स्वभाव इस गंभीर फिल्म में कॉमेडी का बेहतरीन तड़का लगाता है। आदित्य आते ही महल का माहौल बदल देता है। वह भूत-प्रेत और तांत्रिक विद्या पर विश्वास नहीं करता, बल्कि वह चीजों को एक मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखता है। वह चुपचाप परिवार के हर सदस्य की मानसिक स्थिति, उनके अतीत और महल की घटनाओं का विश्लेषण करता है। अपनी जांच में आदित्य को एक बेहद ही चौंकाने वाली सच्चाई का पता चलता है—महल में कोई भूत नहीं है, बल्कि समस्या एक मानसिक बीमारी है जिसे 'डिसोसिएटिव आइडेंटिटी डिसऑर्डर' (Dissociative Identity Disorder) या 'मल्टीपल पर्सनैलिटी डिसऑर्डर' कहा जाता है। और सबसे खौफनाक बात यह होती है कि यह बीमारी राधा को नहीं, बल्कि सिद्धार्थ की प्यारी पत्नी 'अवनी' को है। अवनी, जो बचपन से ही लोक कथाओं और मंजुलिका की कहानियों से प्रभावित थी, महल के उस माहौल में आकर खुद को 'मंजुलिका' समझने लगती है। रात होते ही उसके अंदर मंजुलिका की हिंसक, बंगाली बोलने वाली और नृत्य करने वाली एक अलग पर्सनैलिटी जाग उठती है, जो सिद्धार्थ (जिसे वह क्रूर राजा का वंशज मानती है) को मारना चाहती है। विद्या बालन ने इस जटिल और डरावने किरदार में जो जान फूंकी है, वह भारतीय सिनेमा के इतिहास में मील का पत्थर माना जाता है। उनके चेहरे के भाव, उनका बंगाली लहजा और 'आमी जे तोमार' गाने पर उनका रौद्र रूप दर्शकों की रूह कंपा देता है। फिल्म का क्लाइमैक्स बेहद ही साइकोलॉजिकल, सस्पेंसफुल और नाटकीय है। आदित्य समझ जाता है कि अगर वह अवनी को दवाइयों से ठीक करने की कोशिश करेगा, तो मंजुलिका की पर्सनैलिटी अवनी को ही मार डालेगी। इसलिए वह एक तांत्रिक (राजपाल यादव) के साथ मिलकर एक बहुत बड़ा मनोवैज्ञानिक ड्रामा (Psychological Drama) रचता है। वह अवनी को यह यकीन दिलाता है कि वह सच में मंजुलिका है और आज उसे राजा (सिद्धार्थ) से बदला लेने का मौका मिलेगा। एक पुतले के जरिए आदित्य मंजुलिका के गुस्से को शांत करवाता है और अवनी के दिमाग से हमेशा के लिए उस दूसरी पर्सनैलिटी को मिटा देता है। 'Bhool Bhulaiyaa' सिर्फ डराती नहीं है, बल्कि यह एक बहुत गहरा मनोवैज्ञानिक संदेश भी देती है कि सबसे बड़ा भूत हमारे अपने ही दिमाग की उपज होता है।
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Movie Details
Language
Hindi
Category
bollywood
Duration
2h 39m
Release Year
2007











