
Ramayan EP 11 - बारात का अयोध्या लौटना और अयोध्या में आनंद
Description
Ramayan (1987) का ग्यारहवां एपिसोड 'सीता-राम विवाह' के पश्चात् जनकपुर से विदाई और नवदंपतियों के अयोध्या आगमन के अत्यंत भावुक और उल्लासपूर्ण प्रसंगों पर केंद्रित है। विवाह के सारे संस्कार संपन्न होने के बाद, अब वह कठिन समय आता है जब राजा जनक और माता सुनयना को अपनी पुत्रियों को विदा करना है। विदाई का दृश्य अत्यंत मर्मस्पर्शी है; राजा जनक, जिन्हें 'विदेह' (मोह-माया से मुक्त) कहा जाता है, अपनी पुत्रियों के वियोग में फूट-फूट कर रो पड़ते हैं। माताएं सीता को पातिव्रत्य धर्म, सास-ससुर की सेवा और कुल की मर्यादा बनाए रखने की शिक्षा देती हैं। भारी मन और अश्रुपूर्ण नेत्रों के साथ जनकपुरवासी अपनी राजकुमारियों को विदा करते हैं। इसके बाद बारात अयोध्या की ओर प्रस्थान करती है। जब यह सूचना अयोध्या पहुँचती है कि चारों राजकुमार अपनी वधुओं के साथ लौट रहे हैं, तो पूरी अयोध्या नगरी में दिवाली जैसा उत्सव शुरू हो जाता है। नगर को तोरण, वंदनवारों और दीपों से सजाया जाता है। माता कौशल्या, कैकेयी और सुमित्रा के हृदय में अपार आनंद है कि उनके पुत्र अपनी कुलवधुओं को लेकर आ रहे हैं। जैसे ही बारात अयोध्या की सीमा में प्रवेश करती है, जनता पुष्प वर्षा कर उनका भव्य स्वागत करती है। राजमहल के द्वार पर तीनों माताएं आरती की थाल लिए खड़ी हैं। वे श्री राम-सीता और अन्य नवदंपतियों की नजर उतारती हैं और गृह-प्रवेश की रस्में पूरी करती हैं। राजमहल में बहुओं का मुँह दिखाई और अन्य पारंपरिक रस्में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ संपन्न होती हैं। चारों बहुएं अपनी सास और बड़ों का आशीर्वाद प्राप्त करती हैं। यह एपिसोड पारिवारिक प्रेम, सास-बहू के मधुर संबंध और एक आदर्श गृहस्थ जीवन की नींव को अत्यंत सुंदरता और मर्यादा के साथ प्रदर्शित करता है। अयोध्या में चारों ओर आनंद ही आनंद है, मानों यह सुख कभी समाप्त नहीं होगा।
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Movie Details
Language
Hindi
Category
ramayan
Duration
Episode 11 (Full Episode)
Release Year
1987











