
Ramayan EP 6 - राम-लक्ष्मण सहित विश्वामित्र जनकपुर प्रवेश
Description
Ramayan (1987) का छठा एपिसोड श्री राम और लक्ष्मण के जीवन की उस अलौकिक और पवित्र यात्रा का वर्णन करता है, जो उन्हें अयोध्या से मिथिला (जनकपुर) तक ले जाती है। यह एपिसोड केवल एक यात्रा वृत्तांत नहीं है, बल्कि यह महान तपस्वियों के उद्धार, सांस्कृतिक मिलन और श्री राम के उस दिव्य उद्देश्य की ओर बढ़ने की कहानी है, जिसके लिए उन्होंने अवतार लिया था—अर्थात् माता सीता से उनका पवित्र मिलन। महर्षि विश्वामित्र के सिद्धाश्रम में यज्ञ के सफलतापूर्वक पूर्ण होने और राक्षसों के आतंक से वन को मुक्त कराने के पश्चात, मुनि विश्वामित्र श्री राम और लक्ष्मण को बताते हैं कि मिथिला नरेश राजा जनक ने एक महान 'धनुष यज्ञ' (सीता स्वयंवर) का आयोजन किया है। वे दोनों राजकुमारों को अपने साथ उस शिव धनुष के दर्शन और स्वयंवर देखने के लिए मिथिला चलने का प्रस्ताव देते हैं। गुरु की आज्ञा शिरोधार्य कर राम और लक्ष्मण मुनि के साथ जनकपुर की ओर प्रस्थान करते हैं。 इस यात्रा के दौरान एक अत्यंत भावुक और चमत्कारिक घटना घटित होती है—अहिल्या उद्धार। मार्ग में एक सुनसान और निर्जन आश्रम दिखाई देता है। विश्वामित्र राम को बताते हैं कि यह कभी महर्षि गौतम का पवित्र आश्रम था, लेकिन देवराज इंद्र के छल और मुनि गौतम के शाप के कारण उनकी पत्नी अहिल्या पत्थर (शिला) की बन गई हैं। वह वर्षों से इसी अवस्था में प्रायश्चित कर रही हैं और केवल भगवान विष्णु के अवतार श्री राम के चरणों की धूल से ही उनका उद्धार संभव है। श्री राम जब उस शिला को अपने चरण से स्पर्श करते हैं, तो अहिल्या तुरंत अपने वास्तविक रूप में प्रकट हो जाती हैं और भाव-विभोर होकर श्री राम की स्तुति करती हैं। यह दृश्य भगवान के अपार दयालु स्वभाव और पतितपावन रूप को दर्शाता है कि भगवान के लिए कोई भी पापी अछूत नहीं है, यदि वह सच्चे मन से प्रायश्चित करे。 अहिल्या के उद्धार के बाद विश्वामित्र, राम और लक्ष्मण जनकपुर की सीमा में प्रवेश करते हैं। जनकपुर, जिसे मिथिला भी कहा जाता है, अपनी ज्ञान-चर्चा, दर्शन और राजा जनक की 'विदेह' (देह के अभिमान से मुक्त) अवस्था के लिए प्रसिद्ध है। नगर की भव्य सजावट और वहाँ के लोगों की सादगी देखकर दोनों भाई अत्यंत प्रसन्न होते हैं। जब राजा जनक को पता चलता है कि महर्षि विश्वामित्र पधारे हैं, तो वे स्वयं उनका स्वागत करने आते हैं。 राजा जनक की दृष्टि जब पहली बार राम और लक्ष्मण पर पड़ती है, तो वे उन दोनों की अलौकिक सुंदरता, तेज और सादगी देखकर मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। जो राजा जनक बड़े-बड़े ज्ञानियों और दार्शनिकों के बीच भी विचलित नहीं होते थे, वे श्री राम के मुखमंडल को देखकर अपने देह का भान भूल जाते हैं। वे महर्षि से पूछते हैं कि ये देवकुमार कौन हैं, जिन्होंने मेरे वैराग्य को भी प्रेम में बदल दिया है? महर्षि उन्हें बताते हैं कि ये अयोध्या नरेश दशरथ के पुत्र राम और लक्ष्मण हैं। इस एपिसोड में मिथिला की संस्कृति, राजा जनक का राम के प्रति वात्सल्य और स्वयंवर से ठीक पहले के शांत लेकिन उत्साहपूर्ण वातावरण का अत्यंत सुंदर चित्रण किया गया है। यह एपिसोड दर्शकों को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गहराई का अनुभव कराता है और आगे आने वाले धनुषभंग और सीता स्वयंवर के महा-प्रसंग की नींव रखता है。
Leave a Comment
Movie Details
Language
Hindi
Category
ramayan
Duration
Episode 6 (Full Episode)
Release Year
1987











