
Ramayan EP 7 - सीता स्वयंवर | राजाओं से धनुष न उठना
Description
Ramayan (1987) का सातवां एपिसोड अत्यंत भव्य, नाटकीय और भावनाओं से ओत-प्रोत है, जिसमें बहुप्रतीक्षित 'सीता स्वयंवर' (धनुष यज्ञ) के आयोजन को विस्तार से दर्शाया गया है। यह एपिसोड न केवल शक्ति और पराक्रम का मंच है, बल्कि यह अहंकार के पतन और सच्ची विनम्रता के विजय की कहानी भी है। कथा की शुरुआत मिथिला (जनकपुर) के उस विशाल और अलौकिक रंगभूमि (स्वयंवर सभा) से होती है, जिसे देवताओं के महल जैसा सजाया गया है। देश-देशांतर से महान राजा, चक्रवर्ती सम्राट और बलवान राजकुमार इस स्वयंवर में भाग लेने आए हैं। सभा के मध्य में एक विशाल और भारी-भरकम मंच पर भगवान शिव का वह दिव्य और अत्यंत भारी धनुष (पिनाक) रखा हुआ है। राजा जनक भरे दरबार में अपनी कठोर प्रतिज्ञा की घोषणा करते हैं—"जो भी शूरवीर इस शिव धनुष को उठाकर इस पर प्रत्यंचा (डोरी) चढ़ाएगा, उसी के साथ मेरी पुत्री सीता का विवाह होगा।" एक-एक करके अहंकार से चूर राजा और राजकुमार मंच पर आते हैं। वे अपनी पूरी ताकत लगाते हैं, लेकिन धनुष को उठाना तो दूर, वे उसे तिल भर भी हिला नहीं पाते। बड़े-बड़े महारथी और अभिमानी योद्धा पसीने से लथपथ होकर हार मान लेते हैं। कई राजा मिलकर भी उस धनुष को उठाने का प्रयास करते हैं, लेकिन वह धनुष एक पर्वत की तरह अचल रहता है। सभी राजाओं को विफल होता देख राजा जनक गहरे दुख और हताशा में डूब जाते हैं। वे भरे दरबार में एक अत्यंत भावुक और तीखी बात कह देते हैं—"वीर विहीन मही मैं जानी" (मुझे ऐसा प्रतीत होता है कि अब यह पृथ्वी वीरों से खाली हो चुकी है)। जनक के इन निराशाजनक और अपमानजनक शब्दों को सुनकर श्री राम तो शांत रहते हैं, लेकिन लक्ष्मण जी का खून खौल उठता है। लक्ष्मण क्रोध में खड़े होकर गरजते हैं कि जिस सभा में रघुकुल का कोई भी वंशज (राम) बैठा हो, वहां ऐसी बात कहना उनके वंश का अपमान है। लक्ष्मण कहते हैं कि यदि बड़े भाई की आज्ञा हो तो वे इस ब्रह्मांड को एक गेंद की तरह उठा सकते हैं, यह पुराना धनुष तो क्या चीज है। तब श्री राम अपनी शांत और सौम्य मुस्कान से लक्ष्मण के क्रोध को शांत करते हैं और उन्हें वापस बैठाते हैं। इसके बाद महर्षि विश्वामित्र को यह आभास हो जाता है कि अब सही समय आ गया है। वे श्री राम को आदेश देते हैं—"उठहु राम भंजहु भवचापा" (हे राम, उठो और इस शिव धनुष को तोड़कर राजा जनक के संताप को दूर करो)। गुरु की आज्ञा शिरोधार्य कर, श्री राम अपनी जगह से उठते हैं। यह एपिसोड इसी अद्भुत सस्पेंस और उत्साह पर समाप्त होता है कि अब आगे क्या होगा, जो दर्शकों के हृदयों में भक्ति और रोमांच का संचार कर देता है।
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Movie Details
Language
Hindi
Category
ramayan
Duration
Episode 7 (Full Episode)
Release Year
1987











