
Ramayan EP 8 - श्री राम द्वारा धनुषभंग | जयमाला पहनाना
Description
Ramayan (1987) का आठवां एपिसोड पूरे महाकाव्य के सबसे लोकप्रिय, प्रतिष्ठित और हृदयस्पर्शी प्रसंगों में से एक है—'धनुषभंग, जयमाला और लक्ष्मण-परशुराम संवाद'। यह एपिसोड श्री राम के अलौकिक पराक्रम, विनम्रता और भगवान परशुराम के क्रोध के अद्भुत मिश्रण को प्रस्तुत करता है। महर्षि विश्वामित्र की आज्ञा पाकर जब श्री राम मंच की ओर बढ़ते हैं, तो उनकी चाल एक मस्त हाथी के समान सौम्य और आत्मविश्वास से भरी होती है। पूरी सभा और स्वर्ग के देवता टकटकी लगाए उन्हें देख रहे होते हैं। माता सीता, जो मन ही मन श्री राम को अपना पति मान चुकी हैं, माता भवानी से प्रार्थना कर रही हैं कि यह धनुष राम के लिए हल्का हो जाए। श्री राम मंच पर पहुंचकर अत्यंत आदर के साथ गुरुओं को प्रणाम करते हैं और शिव धनुष की परिक्रमा करते हैं。 बिना किसी अहंकार या प्रयास के, श्री राम खेल-खेल में उस भारी-भरकम धनुष को एक हाथ से उठा लेते हैं। जैसे ही वे उस पर प्रत्यंचा चढ़ाने के लिए धनुष को झुकाते हैं, वह पुराना शिव धनुष एक भयंकर और कानफोड़ू गर्जना के साथ बीच से टूट कर दो टुकड़ों में बंट जाता है। इस ध्वनि से पूरी पृथ्वी कांप उठती है और अहंकारी राजाओं के चेहरे पीले पड़ जाते हैं। देवताओं द्वारा आकाश से फूलों की वर्षा की जाती है और पूरे जनकपुर में जयकारे गूंज उठते हैं। इसके बाद वह अत्यंत मनमोहक दृश्य आता है जब माता सीता, अपनी सखियों के साथ हाथों में विजयमाला (जयमाला) लिए श्री राम की ओर बढ़ती हैं और संकोच व प्रेम के साथ श्री राम के गले में जयमाला डाल देती हैं。 लेकिन इस उल्लास के बीच अचानक एक बहुत बड़ा विघ्न उत्पन्न होता है। शिव धनुष के टूटने की भयंकर ध्वनि सुनकर, भगवान शिव के परम भक्त और अत्यंत क्रोधी स्वभाव वाले भगवान परशुराम अत्यंत वेग से स्वयंवर सभा में प्रकट होते हैं। परशुराम जी क्रोध में गरजते हुए पूछते हैं कि उनके गुरु शिव का यह धनुष किसने तोड़ा है? जिसने भी यह दुस्साहस किया है, वह उनका सबसे बड़ा शत्रु है। यहीं से महाकाव्य का सबसे प्रसिद्ध 'लक्ष्मण-परशुराम संवाद' शुरू होता है। लक्ष्मण, जो स्वभाव से उग्र हैं, परशुराम जी के क्रोध का व्यंग्यात्मक उत्तर देते हैं। दोनों के बीच के संवाद अत्यंत तीखे और ओजस्वी हैं, जहां लक्ष्मण निडर होकर परशुराम जी के फरसे का मज़ाक उड़ाते हैं, जिससे परशुराम का क्रोध सातवें आसमान पर पहुंच जाता है। जब बात युद्ध तक पहुंचने वाली होती है, तब श्री राम आगे आते हैं। श्री राम अत्यंत मधुर, शीतल और विनम्र वचनों से परशुराम जी को शांत करते हैं और कहते हैं कि "नाथ संभु धनु भंजनिहारा, होइहि केउ एक दास तुम्हारा" (धनुष तोड़ने वाला आपका ही कोई दास होगा)। अंततः परशुराम जी को श्री राम के वास्तविक स्वरूप (भगवान विष्णु के अवतार) का ज्ञान हो जाता है और वे राम को अपना वैष्णव धनुष सौंपकर तपस्या के लिए महेंद्र पर्वत पर लौट जाते हैं। यह एपिसोड धर्म, विनम्रता और क्रोध पर विजय का परम संदेश देता है।
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Movie Details
Language
Hindi
Category
ramayan
Duration
Episode 8 (Full Episode)
Release Year
1987











