
Ramayan EP 9 - दशरथजी के पास जनकजी का दूत भेजना
Description
Ramayan (1987) का नौवां एपिसोड दो महान और पवित्र राज्यों—अयोध्या और मिथिला—के बीच पारिवारिक संबंधों की शुरुआत, हर्षोल्लास और एक भव्य उत्सव की तैयारियों का अत्यंत सुंदर व भावनात्मक चित्रण प्रस्तुत करता है। श्री राम द्वारा शिव धनुष को सफलतापूर्वक भंग करने और परशुराम जी के प्रस्थान के पश्चात, जनकपुर के महल और पूरे नगर में अपार खुशी और उत्सव का वातावरण छा जाता है। राजा जनक का हृदय इस बात से अत्यंत प्रफुल्लित है कि उनकी प्रिय पुत्री सीता को श्री राम जैसा सर्वगुण संपन्न, मर्यादा पुरुषोत्तम और वीर वर (पति) प्राप्त हुआ है। भारतीय वैदिक परंपरा और मर्यादाओं का पालन करते हुए, राजा जनक महर्षि विश्वामित्र और शतानंद जी से विचार-विमर्श करते हैं और उनसे अनुमति मांगते हैं कि अब अयोध्या के महाराजा दशरथ को इस शुभ समाचार की सूचना दी जानी चाहिए और उन्हें विवाह के लिए आमंत्रित किया जाना चाहिए। गुरु की आज्ञा पाकर, राजा जनक अपने सबसे योग्य और तेज दूतों (मंत्रियों) को राजा दशरथ के नाम एक अत्यंत प्रेमपूर्ण और सम्मानजनक पत्र (लग्न पत्रिका) देकर अयोध्या की ओर रवाना करते हैं। दूत तीव्र गति वाले रथों और अश्वों पर सवार होकर मिथिला से अयोध्या की लंबी यात्रा करते हैं। यह दृश्य प्राचीन भारत की कूटनीतिक और पारिवारिक संचार व्यवस्था को बहुत ही सुंदर ढंग से दर्शाता है। जब जनकपुर के दूत अयोध्या पहुंचते हैं, तो राजा दशरथ के राजदरबार में वह पत्र प्रस्तुत करते हैं। महर्षि वशिष्ठ उस शुभ पत्र को पढ़कर सुनाते हैं। यह समाचार सुनते ही कि राम ने शिव धनुष तोड़ दिया है और सीता के साथ उनका विवाह तय हो गया है, राजा दशरथ की आँखों से खुशी के आंसू छलक पड़ते हैं। पूरी अयोध्या नगरी में यह खबर आग की तरह फैल जाती है कि उनके प्रिय राम का विवाह तय हो गया है। माता कौशल्या, कैकेयी और सुमित्रा को जब यह समाचार मिलता है, तो राजमहल में बधाइयां गाई जाने लगती हैं और दान-पुण्य का दौर शुरू हो जाता है। इसके पश्चात राजा दशरथ, महर्षि वशिष्ठ और अन्य मंत्रियों की सलाह से तुरंत बारात (विवाह के लिए प्रस्थान) की घोषणा कर देते हैं। इस एपिसोड का अंतिम भाग अयोध्या में होने वाली भव्य तैयारियों को समर्पित है। हाथी, घोड़ों, रथों और चतुरंगिणी सेना को सजाया जाता है। सभी दरबारी, मुनिगण और अयोध्यावासी अपने प्रिय राजकुमारों की बारात में शामिल होने के लिए अत्यंत उत्साहित हैं। बारात का यह प्रस्थान इतना भव्य और विशाल है कि ऐसा प्रतीत होता है मानो पूरी अयोध्या नगरी ही जनकपुर की ओर चल पड़ी हो। यह एपिसोड भारतीय शादियों की पवित्रता, दो परिवारों के मिलन और समाज में व्याप्त असीम प्रेम व उत्साह को जीवंत कर देता है।
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Movie Details
Language
Hindi
Category
ramayan
Duration
Episode 9 (Full Episode)
Release Year
1987











