Ramayan EP 18 - केवट का प्रेम और श्री राम का गंगा पार जाना | HQ Widescreen | English Subtitles
Ramayan EP 18 - केवट का प्रेम और श्री राम का गंगा पार जाना | HQ Widescreen | English Subtitles
Description
Ramayan (1987) का अठारहवां एपिसोड सम्पूर्ण रामायण के सबसे पवित्र, मनमोहक और भक्ति-रस से भरे 'केवट प्रसंग' के लिए जाना जाता है। श्रृंगवेरपुर में रात बिताने के बाद, श्री राम, सीता और लक्ष्मण को अब गंगा नदी पार करके आगे की वन यात्रा पर जाना है। श्री राम नदी तट पर खड़े एक सामान्य मल्लाह 'केवट' से अपनी नाव में बैठाकर उस पार छोड़ने का आग्रह करते हैं। यहीं से केवट और भगवान राम के बीच वह अद्भुत और मासूम संवाद शुरू होता है। केवट, जो श्री राम की महिमा और उनके चरणों की शक्ति जानता है, अत्यंत चतुराई और प्रेम से शर्त रख देता है। वह कहता है कि उसने सुना है कि राम के चरणों की धूल में कोई ऐसा जादू है जो पत्थर को भी सुंदर स्त्री (अहिल्या) बना देता है। उसकी नाव तो लकड़ी की है, यदि वह भी स्त्री बन गई तो उसकी रोजी-रोटी छिन जाएगी और उसका परिवार भूखा मरेगा। इसलिए, जब तक वह राम के चरण नहीं धो लेगा, तब तक उन्हें अपनी नाव पर पैर नहीं रखने देगा। श्री राम केवट के इस निश्छल प्रेम और भक्ति को देखकर मुस्कुरा देते हैं और उसे चरण धोने की अनुमति दे देते हैं। केवट अत्यंत श्रद्धा भाव से गंगाजल से श्री राम के चरण धोता है और उस चरणामृत को अपने परिवार के साथ ग्रहण करता है। इसके बाद वह उन्हें गंगा पार कराता है। जब माता सीता उतराई (किराया) के रूप में अपनी अंगूठी देना चाहती हैं, तो केवट हाथ जोड़कर मना कर देता है और कहता है, "हे प्रभु! हम दोनों एक ही पेशे के हैं। मैं लोगों को इस पार से उस पार (नदी पार) करता हूँ, और आप लोगों को भवसागर (संसार) से पार करते हैं। आज मैंने आपको पार किया है, जब मैं आपके घाट आऊं तो आप मुझे पार कर देना।" यह दृश्य और संवाद भक्ति की पराकाष्ठा है। भगवान अपने भक्त के प्रेम के सामने कैसे झुक जाते हैं, यह एपिसोड इसका सबसे सुंदर प्रमाण है। अंत में मंत्री सुमंत को रोते हुए वापस अयोध्या भेजा जाता है, जो इस एपिसोड को अत्यंत भावुक बना देता है।
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Movie Details
Language
Hindi
Category
ramayan
Duration
Episode 18 (Full Episode)
Release Year
1987
