Ramayan EP 21 - भरत का अयोध्या लौटना और भरत मिलाप | HQ Widescreen | English Subtitles
Ramayan EP 21 - भरत का अयोध्या लौटना और भरत मिलाप | HQ Widescreen | English Subtitles
Description
Ramayan (1987) का इक्कीसवां एपिसोड भ्रातृ-प्रेम (भाई के प्रति प्रेम), त्याग और वैराग्य का वह अद्वितीय उदाहरण है, जिसकी मिसाल दुनिया के किसी भी साहित्य में नहीं मिलती। यह एपिसोड 'भरत मिलाप' के नाम से विख्यात है। गुरु वशिष्ठ के दूतों का संदेश पाकर भरत और शत्रुघ्न तुरंत कैकेय देश से अयोध्या लौट आते हैं। अयोध्या की गलियों में प्रवेश करते ही उन्हें एक अजीब सी उदासी और अपशकुन का आभास होता है। नगरवासियों के चेहरे पर शोक है और कोई भी उनसे बात नहीं कर रहा। जब भरत महल पहुँचकर अपनी माता कैकेयी से मिलते हैं, तो वह बड़े गर्व से उन्हें बताती है कि उसने अपने वचनों के बल पर भरत के लिए अयोध्या का निष्कंटक राज्य मांग लिया है और राम को 14 वर्ष के लिए वनवास भेज दिया है; और पुत्र-शोक में राजा दशरथ का स्वर्गवास हो गया है। यह सुनकर भरत के पैरों तले जमीन खिसक जाती है। जिस सिंहासन के लिए दुनिया खून बहाती है, भरत उस सिंहासन और अपनी माता को धिक्कारते हैं। वे क्रोध और ग्लानि से भरकर कैकेयी से कहते हैं—"तूने इस पवित्र रघुकुल में जन्म लेकर कुलनाशिनी का काम किया है। तू मेरी माता कहलाने योग्य नहीं है।" शत्रुघ्न भी मंथरा को उसके किए की कड़ी सजा देते हैं। भरत रोते हुए माता कौशल्या के पास जाते हैं और अपनी बेगुनाही का प्रमाण देते हैं। दशरथ का अंतिम संस्कार करने के बाद, भरत यह घोषणा करते हैं कि अयोध्या का सिंहासन केवल श्री राम का है और वे उन्हें वन से वापस लेकर आएंगे। पूरी प्रजा, माताएं और गुरु वशिष्ठ के साथ भरत चित्रकूट की ओर प्रस्थान करते हैं। चित्रकूट के वन में जब भरत और श्री राम का मिलन होता है, तो वह दृश्य इतना मार्मिक होता है कि देवता भी आंसू बहाने लगते हैं। भरत दौड़कर श्री राम के चरणों में गिर पड़ते हैं और राम उन्हें उठाकर अपने सीने से लगा लेते हैं। भरत श्री राम से अयोध्या लौटकर राजपाट संभालने की मिन्नतें करते हैं, लेकिन श्री राम 'प्राण जाए पर वचन न जाए' के सिद्धांत पर अडिग रहते हुए लौटने से इंकार कर देते हैं। अंततः, भरत श्री राम की 'खड़ाऊं' (लकड़ी की चरण-पादुकाएं) अपने सिर पर रखकर अयोध्या लाते हैं और उन्हें सिंहासन पर रखकर स्वयं नंदीग्राम में एक तपस्वी की भांति जीवन व्यतीत करते हुए राम के प्रतिनिधि के रूप में राजकाज संभालते हैं। यह 'भरत मिलाप' भाईचारे और निस्वार्थ प्रेम का अमर प्रतीक है।
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Movie Details
Language
Hindi
Category
ramayan
Duration
Episode 21 (Full Episode)
Release Year
1987
