Ramayan EP 34 - कबन्ध उद्धार | शबरी राम मिलन
Description
रामानंद सागर की 'रामायण' (1987) का चौंतीसवां (34वां) एपिसोड भक्ति-रस, मुक्ति और ईश्वर के प्रति निस्वार्थ प्रेम की उस पराकाष्ठा का वर्णन करता है, जिसे दुनिया 'शबरी प्रसंग' के नाम से जानती है। सीता हरण के भयंकर शोक में डूबे श्री राम और भाई लक्ष्मण दक्षिण दिशा की ओर घने और दुर्गम वनों में माता सीता की खोज में आगे बढ़ रहे हैं। यात्रा के दौरान उनका सामना 'कबन्ध' नामक एक अत्यंत विशालकाय, विचित्र और भयानक राक्षस से होता है। कबन्ध का न तो सिर है और न ही पैर; उसका मुख उसके पेट में है और उसकी भुजाएं कई योजन लंबी हैं। वह अपनी लंबी भुजाओं से राम और लक्ष्मण को पकड़ लेता है। दोनों भाई अपनी तलवारों से उसकी विशाल भुजाओं को काट देते हैं। मृत्यु के समीप पहुंचकर कबन्ध उनसे उनका परिचय पूछता है और जब उसे पता चलता है कि ये स्वयं श्री राम हैं, तो वह अत्यंत प्रसन्न होता है। कबन्ध असल में एक गंधर्व था जिसे एक ऋषि के श्राप के कारण यह भयंकर राक्षसी रूप मिला था। श्री राम द्वारा उसका वध होते ही वह श्राप से मुक्त हो जाता है और अपने दिव्य स्वरूप को प्राप्त करता है। स्वर्ग जाने से पहले कबन्ध श्री राम को बताता है कि सीता जी की खोज में उन्हें ऋष्यमूक पर्वत पर निवास करने वाले वानरराज सुग्रीव से मित्रता करनी चाहिए, और वहां जाने के मार्ग में उन्हें मतंग ऋषि के आश्रम में परम भक्ता 'शबरी' के दर्शन अवश्य करने चाहिए। इसके पश्चात श्री राम और लक्ष्मण पम्पा सरोवर के निकट स्थित माता शबरी के आश्रम में पहुंचते हैं। शबरी एक अत्यंत वृद्ध वनवासी और भीलनी महिला है, जिसने अपना पूरा जीवन केवल अपने गुरु (मतंग ऋषि) के इस वचन पर बिता दिया था कि एक दिन स्वयं भगवान राम उसकी कुटिया में दर्शन देने आएंगे। शबरी वर्षों से प्रतिदिन वन के रास्ते को बुहारती थी, रास्ते के कांटे चुनती थी और राम के लिए जंगल से सबसे मीठे बेर तोड़कर लाती थी। जब श्री राम साक्षात उसकी कुटिया में पधारते हैं, तो शबरी की आंखों से खुशी के आंसुओं की धारा बह निकलती है। यहाँ रामायण का वह सबसे प्रसिद्ध और भावुक दृश्य आता है, जब शबरी प्रेम में इतनी अंधी हो जाती है कि वह राम को देने से पहले हर एक बेर को खुद चखती है (झूठा करती है), ताकि यह सुनिश्चित कर सके कि कोई भी खट्टा बेर राम के मुंह में न जाए। श्री राम, जो साक्षात ब्रह्मांड के स्वामी हैं, उस बूढ़ी भीलनी के निस्वार्थ प्रेम और भक्ति को देखकर अत्यंत आनंदित होते हैं और उसके वे झूठे बेर बहुत ही प्रेम और स्वाद के साथ खाते हैं। लक्ष्मण जी, जो मर्यादा और शुद्धता को लेकर थोड़े संकोच में हैं, राम का यह रूप देखकर हैरान रह जाते हैं। श्री राम यहां शबरी को 'नवधा भक्ति' (भक्ति के नौ प्रकार) का उपदेश देते हैं और सिद्ध करते हैं कि भगवान को न तो ऊंचे कुल से मतलब है, न धन से और न ही रूप से; वे केवल और केवल सच्चे प्रेम के भूखे हैं। माता शबरी राम के दर्शन पाकर योग अग्नि में अपने प्राण त्याग देती हैं और मोक्ष को प्राप्त होती हैं। यह एपिसोड समाज में जाति-पांति के भेदभाव को मिटाकर केवल भक्ति की श्रेष्ठता का संदेश देता है।
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Movie Details
Language
Hindi
Category
ramayan
Duration
Episode 34 (Full Episode)
Release Year
1987
