Ramayan EP 35 - रामजी हनुमानजी मिलन
Description
रामायण (1987) का पैंतीसवां (35वां) एपिसोड भारतीय महाकाव्य के सबसे महान और ऐतिहासिक मिलन—'श्री राम और हनुमान जी के मिलन' को समर्पित है। यह ऐसा प्रसंग है जहाँ एक परम भक्त अंततः अपने इष्टदेव को पा लेता है, और भगवान को अपना सबसे शक्तिशाली और समर्पित सेवक मिल जाता है। शबरी के आश्रम से विदा लेकर और उनके द्वारा बताए गए मार्ग का अनुसरण करते हुए, श्री राम और लक्ष्मण ऋष्यमूक पर्वत के निकट पम्पा सरोवर के सुरम्य क्षेत्र में पहुंचते हैं。 इस ऋष्यमूक पर्वत पर वानरराज सुग्रीव अपने कुछ विश्वस्त मंत्रियों, जिनमें हनुमान जी, जाम्बवंत और अंगद प्रमुख हैं, के साथ छिपकर निवास कर रहे हैं। सुग्रीव को उनके बड़े भाई बालि ने अत्यंत क्रूरतापूर्वक राज्य से निकाल दिया था और उनकी पत्नी को छीन लिया था। बालि को एक श्राप के कारण ऋष्यमूक पर्वत पर आने की मनाही थी, इसलिए सुग्रीव केवल वहीं सुरक्षित थे। जब सुग्रीव दूर से राम और लक्ष्मण को धनुष-बाण लिए पर्वत की ओर आते देखते हैं, तो वे अत्यंत भयभीत हो जाते हैं। उन्हें संदेह होता है कि कहीं ये दोनों वीर योद्धा बालि द्वारा भेजे गए गुप्तचर या हत्यारे तो नहीं हैं, जो उन्हें मारने आए हैं। सुग्रीव की घबराहट दूर करने के लिए, उनके सबसे चतुर और बलवान मंत्री, संकटमोचन हनुमान जी स्वयं यह पता लगाने का निर्णय लेते हैं कि ये दोनों वनवासी तपस्वी कौन हैं。 हनुमान जी अपने वानर रूप को छिपाकर एक अत्यंत विद्वान ब्राह्मण (विप्र/साधु) का वेश धारण करते हैं और श्री राम व लक्ष्मण के मार्ग में प्रकट होते हैं। हनुमान जी अत्यंत मधुर, संस्कारी और वेदों की भाषा में उनका परिचय पूछते हैं—"आप लोग कौन हैं? आपके शरीर की कांति देवताओं जैसी है, लेकिन आपने वनवासियों के वस्त्र क्यों धारण किए हैं? क्या आप साक्षात ब्रह्मा, विष्णु या महेश हैं?" श्री राम, हनुमान जी की इस विनीत और संस्कारवान वाणी से अत्यंत प्रभावित होते हैं और उन्हें अपना तथा लक्ष्मण का परिचय देते हुए माता सीता के हरण की पूरी दुखद कथा सुनाते हैं。 जैसे ही हनुमान जी के कानों में 'श्री राम' का नाम पड़ता है, उनके ज्ञान के चक्षु खुल जाते हैं। उन्हें अपनी उस पुरानी याद का आभास होता है कि वे तो शिव के अवतार हैं जो केवल राम की सेवा के लिए ही पृथ्वी पर आए हैं। ब्राह्मण का वेश त्यागकर, हनुमान जी तुरंत अपने विशाल और तेजस्वी वानर रूप में आ जाते हैं और फूट-फूट कर रोते हुए श्री राम के चरणों में गिर पड़ते हैं। "हे प्रभु! मैं आपका अज्ञानी दास आपको पहचान न सका, लेकिन आप तो अंतर्यामी हैं, आपने मुझे कैसे नहीं पहचाना?" श्री राम अपने परम भक्त हनुमान को उठाते हैं और अत्यंत प्रेम से उन्हें अपने सीने से लगा लेते हैं। राम और हनुमान का यह आलिंगन (गले लगना) इतना शक्तिशाली और भावुक है कि इसके बाद रामायण की पूरी दिशा ही बदल जाती है। इसके पश्चात, हनुमान जी श्री राम और लक्ष्मण को अपने विशाल कंधों पर बिठाते हैं और एक ही छलांग में ऋष्यमूक पर्वत की चोटी पर सुग्रीव के पास ले जाते हैं। यह एपिसोड भक्ति, समर्पण और ईश्वर-भक्त के बीच के उस अटूट रिश्ते की शुरुआत है, जो सदियों तक दुनिया के लिए एक आदर्श बन गया।
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Movie Details
Language
Hindi
Category
ramayan
Duration
Episode 35 (Full Episode)
Release Year
1987
