Ramayan EP 36 - श्री राम-सुग्रीव की मित्रता

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Ramayan EP 36 - श्री राम-सुग्रीव की मित्रता

9
Episode 36 (Full Episode)
1987
HDAdventureDramaFamilyFantasy

Description

रामायण (1987) का छत्तीसवां (36वां) एपिसोड एक कूटनीतिक, भावनात्मक और दो दुखियारे हृदयों के बीच एक अटूट मैत्री (मित्रता) का अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय है। हनुमान जी द्वारा श्री राम और लक्ष्मण को अपने कंधों पर बिठाकर ऋष्यमूक पर्वत पर लाए जाने के बाद, वे सुग्रीव से उनका परिचय कराते हैं। हनुमान जी सुग्रीव को बताते हैं कि ये अयोध्या नरेश दशरथ के वीर पुत्र राम और लक्ष्मण हैं, और इस समय ये भी पत्नी के वियोग और दुःख में हैं। समान दुःख हमेशा दो लोगों को करीब लाता है, और यही राम और सुग्रीव के साथ भी होता है。 हनुमान जी की पहल पर, श्री राम और सुग्रीव के बीच एक पवित्र मित्रता की नींव रखी जाती है। हनुमान जी लकड़ियों को रगड़कर अग्नि प्रज्वलित करते हैं, और उस पवित्र अग्नि को साक्षी मानकर श्री राम और सुग्रीव एक-दूसरे के हाथ में हाथ देकर जीवन भर एक-दूसरे का साथ निभाने की कसम खाते हैं। यह दृश्य 'अग्नि साक्षी मैत्री' के रूप में प्रसिद्ध है। सुग्रीव प्रतिज्ञा करते हैं कि वे अपनी पूरी वानर सेना को माता सीता की खोज में चारों दिशाओं में भेजेंगे और उन्हें वापस लाएंगे। बदले में, श्री राम सुग्रीव को वचन देते हैं कि वे उसके क्रूर और अभिमानी भाई बालि का वध करेंगे और सुग्रीव को उसका राज्य तथा उसकी छीनी हुई पत्नी तारा (या रूमा) ससम्मान वापस दिलाएंगे。 इस बातचीत के दौरान, सुग्रीव को याद आता है कि कुछ समय पहले उन्होंने आकाश मार्ग से एक विलाप करती हुई स्त्री को किसी विशाल राक्षस (रावण) द्वारा दक्षिण दिशा की ओर ले जाते हुए देखा था। सुग्रीव बताते हैं कि उस स्त्री ने "राम-राम" पुकारते हुए अपने कुछ आभूषण एक वस्त्र में बांधकर ऋष्यमूक पर्वत पर नीचे गिरा दिए थे। सुग्रीव तुरंत उन आभूषणों की पोटली मंगाते हैं और श्री राम के समक्ष प्रस्तुत करते हैं。 जैसे ही श्री राम उस पोटली को खोलते हैं और माता सीता के कंगन और पायलों को देखते हैं, उनका हृदय एक बार फिर वियोग की अग्नि में जल उठता है। वे उन आभूषणों को अपने सीने से लगा लेते हैं और फूट-फूट कर विलाप करने लगते हैं। राम की आंखों में आंसू देखकर लक्ष्मण भी रो पड़ते हैं। लक्ष्मण का संवाद यहाँ बहुत मार्मिक है, जब राम उनसे पूछते हैं कि क्या वे इन आभूषणों को पहचानते हैं? तो लक्ष्मण हाथ जोड़कर कहते हैं, "हे प्रभु! मैंने कभी माता सीता के चरणों से ऊपर दृष्टि नहीं उठाई, इसलिए मैं केवल उनकी पायलों को पहचानता हूँ, उनके गले या हाथों के आभूषणों को नहीं।" यह लक्ष्मण की उस असीम मर्यादा और शुद्ध चरित्र का प्रमाण है जो पूरे विश्व के लिए एक मिसाल है。 इस एपिसोड में श्री राम अपने परम मित्र सुग्रीव को धैर्य बंधाते हैं और बालि के वध की रूपरेखा तैयार की जाती है। सुग्रीव बालि की अपार शक्ति और दुंदुभी नामक राक्षस के कंकाल को दिखाकर राम की शक्ति का परीक्षण भी करते हैं, जिसे राम अपने पैर के एक ही अंगूठे से मीलों दूर फेंक कर अपनी अजेय शक्ति का प्रमाण देते हैं। यह एपिसोड गठबंधन, भाईचारे और लक्ष्य प्राप्ति के लिए सहयोग के महत्व को गहराई से दर्शाता है।

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Movie Details

Language

Hindi

Category

ramayan

Duration

Episode 36 (Full Episode)

Release Year

1987

Ramayan EP 36 - श्री राम-सुग्रीव की मित्रता
HD
9

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