Ramayan EP 37 - सुग्रीव का दुःख सुनाना
Description
रामानंद सागर की 'रामायण' (1987) का सैंतीसवां (37वां) एपिसोड श्री राम और सुग्रीव के बीच उस गहरे संवाद और विश्वास के निर्माण की कहानी है, जहाँ एक पीड़ित भक्त अपने भगवान को अपनी व्यथा सुनाता है। अग्नि को साक्षी मानकर मित्रता करने के पश्चात, श्री राम सुग्रीव से उनके इस घोर दुःख, दरिद्रता और ऋष्यमूक पर्वत पर छिपकर रहने का कारण पूछते हैं। सुग्रीव, जिनकी आँखों में आँसू और हृदय में अपार पीड़ा है, अपने और अपने बड़े भाई बालि के बीच हुई उस दुर्भाग्यपूर्ण घटना का विस्तार से वर्णन करते हैं। सुग्रीव बताते हैं कि बालि किष्किंधा का एक अत्यंत पराक्रमी और अजेय राजा है। एक बार 'मायावी' नामक एक भयंकर राक्षस ने आधी रात को किष्किंधा आकर बालि को युद्ध के लिए ललकारा। क्रोधित बालि ने उसका पीछा किया, और सुग्रीव भी अपने भाई की सहायता के लिए उनके पीछे-पीछे गए। मायावी अपनी जान बचाने के लिए एक गहरी और रहस्यमयी गुफा में घुस गया। बालि ने सुग्रीव को गुफा के द्वार पर रुकने का आदेश दिया और कहा कि वे (बालि) राक्षस का वध करके 15 दिनों में लौट आएंगे। सुग्रीव बताते हैं कि वे एक महीने तक गुफा के द्वार पर खड़े रहे। एक दिन अचानक गुफा के भीतर से एक भयंकर गर्जना हुई और गुफा के द्वार से रक्त (खून) की एक विशाल धारा बहकर बाहर आई। सुग्रीव को यह भ्रम हो गया कि किसी राक्षस ने उनके अजेय भाई बालि का वध कर दिया है और अब वह राक्षस किष्किंधा पर भी आक्रमण करेगा। राज्य की रक्षा के लिए, सुग्रीव ने एक विशाल चट्टान से गुफा का द्वार बंद कर दिया और भारी मन से किष्किंधा लौट आए। मंत्रियों ने राज्य को राजाविहीन देखकर सुग्रीव का राज्याभिषेक कर दिया। लेकिन कुछ समय बाद, बालि राक्षस का वध करके गुफा तोड़कर वापस आ गया। बालि को लगा कि सुग्रीव ने राज्य हड़पने के लिए उसे जानबूझकर गुफा में बंद कर दिया था। सुग्रीव ने अपनी बेगुनाही साबित करने की बहुत कोशिश की, लेकिन अहंकारी और क्रोधी बालि ने उनकी एक न सुनी। बालि ने सुग्रीव को बुरी तरह पीटा, उन्हें राज्य से निकाल दिया और सबसे बड़ा पाप यह किया कि उसने सुग्रीव की धर्मपत्नी 'रूमा' को बलपूर्वक अपने पास रख लिया। तब से सुग्रीव अपनी जान बचाने के लिए दर-दर भटक रहे हैं। सुग्रीव की यह व्यथा सुनकर मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम का हृदय करुणा और क्रोध दोनों से भर उठता है। राम कहते हैं कि अनुज वधू (छोटे भाई की पत्नी), पुत्री और बहन समान होती हैं; जो उन पर कुदृष्टि डालता है, उसका वध करना ही परम धर्म है। राम सुग्रीव को वचन देते हैं कि वे एक ही बाण से बालि का अंत कर देंगे। लेकिन सुग्रीव के मन में बालि की अपार शक्ति का खौफ है। सुग्रीव का संदेह दूर करने के लिए, श्री राम 'दुंदुभी' नामक राक्षस के उस विशाल कंकाल को, जिसे बालि ने मारा था, अपने पैर के एक ही अंगूठे से मीलों दूर फेंक देते हैं। इसके बाद, श्री राम अपने धनुष से एक ऐसा अचूक बाण चलाते हैं जो एक ही सीध में खड़े सात विशाल 'साल' (Sapt Sal) के पेड़ों को एक साथ छेद कर वापस राम के तरकश में आ जाता है। राम का यह अकल्पनीय पराक्रम देखकर सुग्रीव का सारा भय दूर हो जाता है और उन्हें विश्वास हो जाता है कि अब उनका दुःख समाप्त होने वाला है।
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Movie Details
Language
Hindi
Category
ramayan
Duration
Episode 37 (Full Episode)
Release Year
1987
