Ramayan EP 38 - बालि-सुग्रीव युद्ध
Description
रामायण (1987) का अड़तीसवां (38वां) एपिसोड एक अत्यंत रोमांचक, हिंसक और नीतिगत मोड़ लेकर आता है। श्री राम से बालि वध का पक्का वचन और अभयदान पाकर, सुग्रीव के भीतर एक नया उत्साह और ऊर्जा का संचार होता है। श्री राम की योजना के अनुसार, सुग्रीव किष्किंधा की गुफा के बाहर जाते हैं और अपने बड़े भाई बालि को एक भयंकर सिंहनाद के साथ मल्ल-युद्ध (कुश्ती) के लिए ललकारते हैं। बालि, जिसे अपनी ताकत पर अत्यधिक घमंड है, यह ललकार सुनकर आगबबूला हो जाता है और बाहर आकर सुग्रीव पर टूट पड़ता है। दोनों भाइयों के बीच एक भयंकर और खूनी मल्ल-युद्ध शुरू हो जाता है। घूंसे, लातें और पत्थरों के प्रहार से दोनों एक-दूसरे को लहूलुहान कर देते हैं। श्री राम एक पेड़ के पीछे छिपकर बालि पर बाण चलाने का अवसर ढूँढ रहे हैं। लेकिन यहाँ एक बहुत बड़ी समस्या उत्पन्न हो जाती है। बालि और सुग्रीव दोनों का रूप, रंग, कद और कपड़े बिल्कुल एक समान (जुड़वां जैसे) लग रहे हैं। युद्ध की इस तेज गति में श्री राम यह पहचान नहीं पाते कि असली बालि कौन है और सुग्रीव कौन है। इस डर से कि कहीं उनके बाण से उनका अपना मित्र सुग्रीव न मारा जाए, राम अपना बाण रोक लेते हैं। इधर, बालि अपनी अपार शक्ति से सुग्रीव को बुरी तरह पीटकर अधमरा कर देता है। सुग्रीव जान बचाकर वापस ऋष्यमूक पर्वत भाग आते हैं। सुग्रीव श्री राम के सामने रोते हुए शिकायत करते हैं कि "हे प्रभु! आपने मुझे मरवाने के लिए ही वहाँ भेजा था। यदि आपको बालि को नहीं मारना था, तो मुझे बता देते।" श्री राम अत्यंत प्रेम से सुग्रीव को गले लगाते हैं और बाण न चलाने का कारण स्पष्ट करते हैं। अगली सुबह, श्री राम सुग्रीव के गले में पहचान के लिए 'गजपुष्पी' नामक एक फूल की माला पहना देते हैं, ताकि युद्ध के मैदान में वे सुग्रीव को आसानी से पहचान सकें। सुग्रीव एक बार फिर नई शक्ति के साथ किष्किंधा के द्वार पर जाकर बालि को ललकारते हैं। इस बार जब बालि सुग्रीव को मारने के लिए महल से बाहर निकलने लगता है, तो उसकी बुद्धिमती पत्नी 'तारा' उसे रोकती है। तारा को आभास हो जाता है कि सुग्रीव को इतनी बुरी तरह पीटने के बाद भी यदि वह वापस आया है, तो निश्चित रूप से उसे कोई बहुत बड़ा सहारा मिल गया है। तारा बालि को बताती है कि अयोध्या के अजय राजकुमार राम और लक्ष्मण वन में आए हैं और उन्होंने सुग्रीव से मित्रता कर ली है। तारा बालि को सुग्रीव से संधि करने की सलाह देती है। परंतु बालि, जो अहंकार में अंधा हो चुका है, तारा की बात को अनसुना कर देता है। वह कहता है कि राम तो धर्म की मूरत हैं, वे कभी छिपकर वार नहीं करेंगे। बालि और सुग्रीव का दूसरा युद्ध और भी अधिक विनाशकारी होता है। सुग्रीव हारने की कगार पर हैं और उनका बल क्षीण हो रहा है। यह देखकर कि अब सुग्रीव के प्राण संकट में हैं, श्री राम पेड़ की आड़ से अपने कोदंड धनुष पर एक अत्यंत शक्तिशाली और अचूक बाण चढ़ाते हैं और बालि की छाती पर संधान कर देते हैं। बाण लगते ही वज्र के समान शक्तिशाली बालि एक भयंकर चीख के साथ खून से लथपथ होकर जमीन पर गिर पड़ता है। यह एपिसोड धर्म, युद्ध-नीति और अहंकार के विनाश का एक अत्यंत ही उत्कृष्ट दृश्य प्रस्तुत करता है।
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Movie Details
Language
Hindi
Category
ramayan
Duration
Episode 38 (Full Episode)
Release Year
1987
