Ramayan EP 39 - बाली का अंतिम संस्कार

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Ramayan EP 39 - बाली का अंतिम संस्कार

9
Episode 39 (Full Episode)
1987
HDAdventureDramaFamilyFantasy

Description

रामानंद सागर की 'रामायण' (1987) का उनतालीसवां (39वां) एपिसोड महाकाव्य के सबसे गहन, दार्शनिक और भावुक प्रसंगों में से एक है। श्री राम के बाण से आहत होकर वानरराज बालि रणभूमि में धूल और खून से लथपथ पड़ा है। जब श्री राम और लक्ष्मण उसके पास आते हैं, तो बालि का अहंकार और क्रोध अभी भी जीवित है। बालि श्री राम को धिक्कारते हुए उन पर तीखे सवाल दागता है। वह पूछता है—"हे राम! आप तो धर्म की ध्वजा फहराने वाले राजा दशरथ के पुत्र हैं। आपका यह कौन सा धर्म है कि आपने एक कायर की भांति पेड़ के पीछे छिपकर मुझ पर वार किया? मेरी आपसे कोई दुश्मनी नहीं थी। यदि आपको सीता की खोज ही करनी थी, तो आप मुझसे कहते; मैं पल भर में रावण को आपके चरणों में लाकर डाल देता।" श्री राम अत्यंत शांत, धीर और गंभीर स्वर में बालि को धर्म का वास्तविक मर्म समझाते हैं। राम कहते हैं—"हे बालि! अनुज वधू (छोटे भाई की पत्नी), बहन और पुत्री, ये तीनों समान होती हैं। जो भी व्यक्ति इन पर कुदृष्टि डालता है, उसका वध करना ही सबसे बड़ा धर्म है। तुमने अपने छोटे भाई सुग्रीव की पत्नी रूमा का बलपूर्वक अपहरण किया और सुग्रीव को राज्य से निकाल दिया। तुमने धर्म की सारी मर्यादाएं तोड़ दीं। जहाँ तक छिपकर वार करने का प्रश्न है, तो तुम एक वानर (पशु) योनि में हो, और एक शिकारी जब शिकार करता है, तो वह छिपकर ही वार करता है। तुमने अपने अहंकार में सत्य और न्याय की आवाज को अनसुना कर दिया था।" श्री राम के इन तार्किक और धर्मसम्मत वचनों को सुनकर बालि के ज्ञान चक्षु खुल जाते हैं। उसका सारा अहंकार टूट जाता है और उसे अपने भयंकर पापों का अहसास होता है। बालि हाथ जोड़कर श्री राम से क्षमा मांगता है। वह श्री राम को साक्षात ईश्वर का अवतार मान लेता है। मृत्यु से पूर्व, बालि अपने पुत्र अंगद को श्री राम के चरणों में सौंप देता है और सुग्रीव को किष्किंधा का राज्य तथा तारा का सम्मान करने का आदेश देता है। श्री राम के दर्शन करते हुए बालि अपने प्राण त्याग देता है और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। बालि की मृत्यु का समाचार सुनकर उसकी पत्नी तारा और अन्य वानर स्त्रियां रणभूमि में दौड़ती हुई आती हैं। तारा का विलाप इतना हृदयविदारक है कि पत्थर भी पिघल जाएं। तारा बालि के निष्प्राण शरीर से लिपट कर फूट-फूट कर रोती है। सुग्रीव को भी अपने बड़े भाई की इस दुर्दशा को देखकर अत्यंत आत्मग्लानि होती है और वे भी फूट-फूट कर रोने लगते हैं। तब श्री राम तारा को ज्ञान और वैराग्य का अत्यंत सुंदर उपदेश देते हैं। राम कहते हैं—"हे तारा! यह शरीर क्षिति (पृथ्वी), जल, पावक (अग्नि), गगन (आकाश) और समीर (वायु) से बना है। यह नश्वर है, परंतु आत्मा अजर-अमर है। तुम किसके लिए शोक कर रही हो?" इस ज्ञान से तारा का शोक कुछ शांत होता है। इसके पश्चात, पूरे राजकीय सम्मान और वैदिक रीति-रिवाजों के साथ बालि का अंतिम संस्कार किया जाता है। यह एपिसोड पाप के अंत, पश्चाताप और आत्मा की अमरता का एक अद्वितीय और मार्मिक चित्रण है।

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Movie Details

Language

Hindi

Category

ramayan

Duration

Episode 39 (Full Episode)

Release Year

1987

Ramayan EP 39 - बाली का अंतिम संस्कार
HD
9

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