Ramayan EP 40 - सुग्रीव का राज्याभिषेक

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Ramayan EP 40 - सुग्रीव का राज्याभिषेक

9
Episode 40 (Full Episode)
1987
HDAdventureDramaFamilyFantasy

Description

रामायण (1987) का चालीसवां (40वां) एपिसोड विजय, वचन-पूर्ति, राजधर्म और वनवास की मर्यादाओं के निर्वहन की एक अत्यंत सुंदर और कूटनीतिक कहानी प्रस्तुत करता है। बालि के अंतिम संस्कार और सभी शोक-कर्मों के पूर्ण होने के बाद, किष्किंधा का राजसिंहासन एक बार फिर सूना है। श्री राम, जो अपने मित्रों के प्रति सदा वफादार रहते हैं, अपने दिए गए वचन के अनुसार सुग्रीव को किष्किंधा का राजा घोषित करते हैं। हनुमान जी, जाम्बवंत और अन्य वरिष्ठ वानर मंत्री श्री राम से प्रार्थना करते हैं कि वे स्वयं किष्किंधा नगर में प्रवेश करें और अपने हाथों से सुग्रीव का राज्याभिषेक संपन्न करें। परंतु मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम अत्यंत शालीनता से इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर देते हैं। राम समझाते हैं कि उन्होंने अपने पिता राजा दशरथ को 14 वर्ष तक केवल वन में रहने और किसी भी नगर या गाँव की सीमा में प्रवेश न करने का कठोर वचन दिया है। यदि वे किष्किंधा में प्रवेश करेंगे, तो यह उनके पिता के वचन और वनवास की मर्यादा का खुला उल्लंघन होगा। इसलिए, श्री राम लक्ष्मण को आदेश देते हैं कि वे उनके प्रतिनिधि के रूप में किष्किंधा जाएं और सुग्रीव का वैदिक विधि-विधान से राज्याभिषेक करें। किष्किंधा के भव्य राजमहल में सुग्रीव का पूरे सम्मान और हर्षोल्लास के साथ राज्याभिषेक (Coronation) किया जाता है। सुग्रीव को वानरराज का ताज पहनाया जाता है और बालि के पराक्रमी पुत्र अंगद को युवराज (Crown Prince) घोषित किया जाता है। सुग्रीव अपनी खोई हुई पत्नी रूमा और राज्य का खोया हुआ वैभव पुनः प्राप्त कर अत्यंत भावविभोर हो जाते हैं। वे श्री राम के इस असीम उपकार के लिए उनके प्रति जीवन भर ऋणी रहने की प्रतिज्ञा करते हैं। सुग्रीव श्री राम को वचन देते हैं कि जैसे ही वर्षा ऋतु (मानसून) समाप्त होगी, वे अपनी विशाल वानर सेना के साथ सीता माता की खोज में लग जाएंगे। इधर वन में, वर्षा ऋतु का आगमन हो चुका है। आकाश काले-घने बादलों से घिर गया है और भयंकर बारिश शुरू हो जाती है। वर्षा काल (चातुर्मास) में यात्रा करना और सीता जी की खोज करना भौगोलिक रूप से असंभव है। इसलिए, श्री राम और लक्ष्मण किष्किंधा के पास ही स्थित 'प्रवर्षण पर्वत' (माल्यवान गिरी) की एक अत्यंत सुंदर और सुरक्षित गुफा में अपना निवास बना लेते हैं। इस एपिसोड का दूसरा भाग वर्षा ऋतु के प्राकृतिक सौंदर्य और श्री राम के गहरे वियोग (सीता की याद) पर केंद्रित है। जब राम बादलों की गर्जना सुनते हैं और मोरों व पपीहों की पुकार सुनते हैं, तो उनका हृदय सीता माता की याद में व्याकुल हो उठता है। राम लक्ष्मण से कहते हैं कि "इन बादलों की गर्जना सुनकर मेरा हृदय कांप रहा है, न जाने मेरी सीता किस हाल में होगी।" लक्ष्मण अपने बड़े भाई को धैर्य बंधाते हैं और समय की प्रतीक्षा करने की सलाह देते हैं। यह एपिसोड एक ओर राज्याभिषेक की खुशी और दूसरी ओर एक विरही पति की पीड़ा का एक बहुत ही सुंदर और संतुलित कंट्रास्ट (Contrast) प्रस्तुत करता है।

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Movie Details

Language

Hindi

Category

ramayan

Duration

Episode 40 (Full Episode)

Release Year

1987

Ramayan EP 40 - सुग्रीव का राज्याभिषेक
HD
9

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