Ramayan EP 41 - राम की सुग्रीव पर नाराज़गी

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Ramayan EP 41 - राम की सुग्रीव पर नाराज़गी

9
Episode 41 (Full Episode)
1987
HDAdventureDramaFamilyFantasy

Description

रामानंद सागर कृत 'रामायण' (1987) का इकतालीसवां (41वां) एपिसोड मानवीय स्वभाव के भूलने की प्रवृत्ति (Forgetfulness), राजसी सुख-सुविधाओं के नशे और श्री राम के उस प्रलयंकारी क्रोध को दर्शाता है जो किसी भी अधर्मी को भस्म कर सकता है। वर्षा ऋतु समाप्त हो चुकी है और 'शरद ऋतु' (Autumn) का सुहावना आगमन हो गया है। आकाश बिल्कुल साफ है और नदियां शांत हो गई हैं। सीता जी की खोज के लिए यह सबसे अनुकूल समय है। परंतु प्रवर्षण पर्वत की गुफा में प्रतीक्षा करते-करते श्री राम का धैर्य अब जवाब दे रहा है। श्री राम देखते हैं कि वर्षा ऋतु बीत जाने के बाद भी सुग्रीव ने सीता की खोज के लिए कोई कदम नहीं उठाया है। असल में, सुग्रीव राजसिंहासन प्राप्त करने के बाद किष्किंधा के महलों के ऐश्वर्य, मदिरा (सुरा) और तारा तथा रूमा जैसी स्त्रियों के मोहपाश में इतने अंधे हो चुके हैं कि उन्हें अपने मित्र श्री राम को दिया गया वह पवित्र वचन पूरी तरह से भूल गया है। सुग्रीव की इस कृतघ्नता (Ungratefulness) को देखकर श्री राम, जो आमतौर पर अत्यंत शांत रहते हैं, का क्रोध एक भयंकर ज्वालामुखी की तरह भड़क उठता है। राम लक्ष्मण से कहते हैं, "सुग्रीव राज्य और स्त्री के नशे में मेरे उपकारों को भूल गया है। जिस बाण से मैंने बालि का वध किया था, वह बाण अभी भी मेरे तरकश में है। तुम जाकर उस मूर्ख वानर को चेतावनी दो कि वह बालि के मार्ग पर न चले, अन्यथा मैं आज किष्किंधा को वानरों से विहीन कर दूंगा।" अपने अग्रज के इन क्रोधित वचनों को सुनकर लक्ष्मण जी का उग्र स्वभाव और भी अधिक भयानक रूप ले लेता है। लक्ष्मण अपना धनुष-बाण उठाते हैं और प्रलयंकर रूप धारण कर किष्किंधा की ओर निकल पड़ते हैं। लक्ष्मण के क्रोधित चेहरे और उनके चलने की धमक से पूरे किष्किंधा नगर में हाहाकार मच जाता है। वानर सैनिक डर के मारे इधर-उधर भागने लगते हैं। जब लक्ष्मण महल के द्वार पर पहुंचते हैं, तो वे अपनी प्रत्यंचा की ऐसी भयंकर टंकार करते हैं कि महल की दीवारें कांप उठती हैं। सुग्रीव इस भयंकर ध्वनि को सुनकर नींद और नशे से बाहर आते हैं। जब उन्हें पता चलता है कि लक्ष्मण मृत्यु बनकर द्वार पर खड़े हैं, तो सुग्रीव के पैरों तले जमीन खिसक जाती है। सुग्रीव की रक्षा के लिए तारा अत्यंत कूटनीति और मधुर वाणी का सहारा लेती है। तारा आगे आकर लक्ष्मण के क्रोध को शांत करने का प्रयास करती है और कहती है कि राजसी सुखों में पड़कर एक प्राणी से भूल हो गई है, परंतु सुग्रीव राम के प्रति कृतघ्न नहीं हैं। अंततः सुग्रीव कांपते हुए लक्ष्मण के चरणों में गिर पड़ते हैं और अपनी इस भयंकर भूल के लिए क्षमा मांगते हैं। सुग्रीव तुरंत हनुमान जी को आदेश देते हैं कि चारों दिशाओं से करोड़ों वानर सैनिकों और सेनापतियों को तुरंत किष्किंधा बुलाया जाए। यह एपिसोड इस बात का बहुत बड़ा सबक है कि जब ईश्वर आपको कठिन समय से निकालकर सिंहासन पर बिठाए, तो कभी भी उस ईश्वर के प्रति अपने कर्तव्यों को नहीं भूलना चाहिए, अन्यथा विनाश निश्चित है। लक्ष्मण का क्रोध और सुग्रीव का पश्चाताप इस एपिसोड को अत्यंत रोमांचक और तनावपूर्ण बना देते हैं।

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Movie Details

Language

Hindi

Category

ramayan

Duration

Episode 41 (Full Episode)

Release Year

1987

Ramayan EP 41 - राम की सुग्रीव पर नाराज़गी
HD
9

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