Ramayan EP 42 - तपस्विनी के दर्शन

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Ramayan EP 42 - तपस्विनी के दर्शन

9
Episode 42 (Full Episode)
1987
HDAdventureDramaFamilyFantasy

Description

रामानंद सागर की 'रामायण' (1987) का बयालीसवां (42वां) एपिसोड माता सीता की खोज में निकली वानर सेना के अदम्य साहस, उनके कठोर संघर्ष और एक अत्यंत रहस्यमयी यात्रा का अद्भुत चित्रण प्रस्तुत करता है। सुग्रीव की आज्ञा पाकर वानर सेना की विभिन्न टुकड़ियां चारों दिशाओं में निकल चुकी हैं। दक्षिण दिशा की ओर जाने वाली टुकड़ी का नेतृत्व युवराज अंगद कर रहे हैं, जिसमें परम बलशाली हनुमान, जाम्बवंत, नल और नील जैसे श्रेष्ठ योद्धा शामिल हैं। सुग्रीव ने सभी को केवल एक महीने (30 दिन) का समय दिया है, और चेतावनी दी है कि यदि वे एक महीने के भीतर सीता का पता लगाए बिना लौटे, तो उन्हें मृत्युदंड दिया जाएगा। वानर सेना दक्षिण दिशा के घने जंगलों, खतरनाक पर्वतों और निर्जन इलाकों में माता सीता की खोज में दिन-रात एक कर देती है, परंतु उन्हें कोई सफलता नहीं मिलती। भोजन और पानी की कमी के कारण सभी वानर अत्यंत थक चुके हैं और प्यास से तड़प रहे हैं। इस भयंकर रेगिस्तानी और पथरीले इलाके में उन्हें कहीं भी जल का कोई स्रोत नहीं दिखाई देता। तभी हनुमान जी देखते हैं कि एक विशाल और अत्यंत अंधेरी गुफा (ऋक्षबिल) के भीतर से कुछ पक्षी अपने पंख गीले करके बाहर आ रहे हैं। इससे हनुमान जी को यह आभास होता है कि इस गुफा के भीतर अवश्य ही पानी का कोई बड़ा स्रोत होगा। प्यास से व्याकुल अंगद और पूरी वानर सेना हनुमान जी के साथ उस भयानक और अंधकारमयी गुफा के भीतर प्रवेश करती है। गुफा के अंदर का रास्ता इतना घुप्प अंधेरा है कि वानरों को एक-दूसरे का हाथ पकड़कर चलना पड़ता है। मीलों तक चलने के बाद, अचानक वह गुफा एक अत्यंत प्रकाशमयी, जादुई और सुंदर उपवन में बदल जाती है। वहां फलों से लदे पेड़, मीठे जल के सरोवर और स्वर्ग जैसी सुंदरता है। यह एक मायावी दुनिया है जिसका निर्माण मय दानव ने किया था। उस उपवन में उनकी भेंट एक अत्यंत तेजस्विनी और दिव्य 'तपस्विनी' से होती है, जिनका नाम 'स्वयंप्रभा' है। स्वयंप्रभा वर्षों से इस मायावी गुफा की रक्षा कर रही हैं और तपस्या में लीन हैं। जब वानर उन्हें अपना परिचय देते हैं और श्री राम के कार्य (सीता की खोज) के बारे में बताते हैं, तो स्वयंप्रभा अत्यंत प्रसन्न होती हैं। वे सभी भूखे-प्यासे वानरों को आदरपूर्वक स्वादिष्ट फल और शीतल जल ग्रहण करने को कहती हैं। जब वानर अपनी प्यास बुझा लेते हैं, तो जाम्बवंत स्वयंप्रभा को बताते हैं कि उनका एक महीने का समय लगभग समाप्त हो चुका है और यदि वे जल्दी इस गुफा से बाहर नहीं निकले, तो वे श्री राम का कार्य पूरा नहीं कर पाएंगे और उन्हें मृत्युदंड मिलेगा। चूँकि वह गुफा एक मायाजाल थी जहाँ से बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं था, स्वयंप्रभा अपनी अलौकिक और योग शक्तियों का प्रयोग करती हैं। वे सभी वानरों को अपनी आँखें बंद करने का निर्देश देती हैं। जब वानर अपनी आँखें खोलते हैं, तो वे पाते हैं कि वे गुफा से बाहर आ चुके हैं और सीधे विशाल दक्षिण समुद्र के तट पर खड़े हैं। यह एपिसोड ईश्वरीय सहायता और इस विश्वास का प्रतीक है कि जो व्यक्ति सत्य और धर्म के कार्य में निकलता है, ईश्वर स्वयं किसी न किसी रूप में उसकी सहायता अवश्य करते हैं।

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Movie Details

Language

Hindi

Category

ramayan

Duration

Episode 42 (Full Episode)

Release Year

1987

Ramayan EP 42 - तपस्विनी के दर्शन
HD
9

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