Ramayan EP 44 - रावण का सीताजी को भयभीत करना
Description
रामायण का चवालीसवां (44वां) एपिसोड लंका की भव्य लेकिन खौफनाक दुनिया और माता सीता के असीम पातिव्रत्य धर्म तथा उनके कठोर तप का एक अत्यंत भावुक चित्रण है। विशाल समुद्र को पार करने के बाद हनुमान जी त्रिकूट पर्वत पर स्थित रावण की सोने की लंका (Lanka) के द्वार पर पहुँचते हैं। लंका की भव्यता, ऊंचे-ऊंचे महल, और सोने-रत्नों से जड़ी दीवारें देखकर हनुमान जी एक पल के लिए आश्चर्यचकित रह जाते हैं। चूंकि लंका में राक्षसों का कड़ा पहरा है, इसलिए हनुमान जी दिन में प्रवेश करना उचित नहीं समझते। वे एक मच्छर के समान अत्यंत 'सूक्ष्म रूप' (Tiny Form) धारण करते हैं और रात के अंधेरे में लंका में प्रवेश करने का प्रयास करते हैं। मुख्य द्वार पर उनकी भेंट 'लंकिनी' नामक एक भयानक राक्षसी से होती है, जो लंका की रक्षक है। लंकिनी हनुमान जी को रोकती है और उन्हें खाने की धमकी देती है। हनुमान जी अपने एक ही घूंसे (मुक्के) के प्रहार से लंकिनी को खून की उल्टी कराकर जमीन पर गिरा देते हैं। लंकिनी को ब्रह्मा जी का वरदान याद आ जाता है कि जब कोई वानर उसे अपने प्रहार से हरा देगा, तब लंका का विनाश निश्चित समझना। लंकिनी हाथ जोड़कर हनुमान जी को लंका में प्रवेश की अनुमति दे देती है। रात के समय हनुमान जी महल दर महल माता सीता को खोजते हैं। वे रावण के शयनकक्ष (Bedroom) तक जाते हैं, मंदोदरी को देखते हैं, लेकिन सीता माता कहीं नहीं मिलतीं। निराश होकर वे सोचने लगते हैं कि कहीं रावण ने सीता को मार तो नहीं दिया। तभी उन्हें लंका के बीचों-बीच एक ऐसा महल दिखाई देता है जिसके आंगन में 'तुलसी' का पौधा लगा है और दीवारों पर भगवान के आयुध बने हुए हैं। अंदर से "राम-राम" जपने की आवाज आती है। हनुमान जी आश्चर्य में पड़ जाते हैं कि इस राक्षसों के नगर में ऐसा सज्जन पुरुष कौन है? यह विभीषण (रावण का छोटा भाई) का घर है। हनुमान जी ब्राह्मण का रूप धरकर विभीषण से मिलते हैं। विभीषण, जो श्री राम के भक्त हैं, हनुमान जी को बताते हैं कि रावण ने माता सीता को 'अशोक वाटिका' नामक एक अत्यंत सुरक्षित उपवन में कैद कर रखा है। विभीषण से दिशा प्राप्त कर हनुमान जी अशोक वाटिका में पहुँचते हैं और एक घने पेड़ के पत्तों में छिप जाते हैं। नीचे का दृश्य देखकर हनुमान जी का हृदय रो पड़ता है। सोने के महलों में रहने वाली माता सीता जमीन पर बैठी हैं, उनके बाल उलझे हुए हैं, चेहरे पर गहरी उदासी है और वे निरंतर "राम-राम" जप रही हैं। उनके चारों ओर डरावनी और भयानक शक्ल वाली राक्षसियां (त्रिजटा, चेरी आदि) हाथों में हथियार लिए पहरा दे रही हैं। तभी अचानक डरावने ढोल-नगाड़ों के साथ लंकापति रावण अपनी रानियों के साथ अशोक वाटिका में प्रवेश करता है। रावण अपने पूरे अहंकार और राजसी ऐश्वर्य के साथ माता सीता के पास आता है और उन्हें डराने, धमकाने और लुभाने का हर संभव प्रयास करता है। वह कहता है कि श्री राम एक साधारण वनवासी हैं जो कभी लंका नहीं पहुंच सकते, इसलिए सीता को उसकी (रावण की) पटरानी बन जाना चाहिए। माता सीता, जो पातिव्रत्य की साक्षात मूर्ति हैं, रावण की ओर सीधे देखती भी नहीं हैं। वे एक 'तिनका' (घास का टुकड़ा) उठाकर अपने और रावण के बीच रख देती हैं, जो यह दर्शाता है कि रावण की हैसियत उनके सामने एक तिनके से अधिक नहीं है। सीता रावण को चेतावनी देती हैं कि वह श्री राम के क्रोध से नहीं बच पाएगा। सीता के इन कठोर और अपमानजनक वचनों को सुनकर रावण का क्रोध भड़क उठता है। वह अपनी तलवार निकाल लेता है, लेकिन मंदोदरी उसे रोक लेती है। जाते-जाते रावण सीता को एक महीने (1 Month) का अंतिम समय (Ultimatum) देता है और राक्षसियों को आदेश देता है कि वे सीता को इतना डराएं कि वह हार मान लें। यह एपिसोड नारी के सम्मान, उसके अटूट संकल्प और बुराई के अहंकार का एक बहुत ही शानदार टकराव प्रस्तुत करता है।
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Movie Details
Language
Hindi
Category
ramayan
Duration
Episode 44 (Full Episode)
Release Year
1987
