Ramayan EP 45 - अशोक वाटिका विध्वंस
Description
रामायण (1987) का पैंतालीसवां (45वां) एपिसोड एक भक्त और भगवान (माता सीता) के उस अत्यंत भावुक मिलन की दास्तान है, जो निराशा के घने अंधकार में आशा की एक बहुत बड़ी किरण लेकर आता है। रावण के जाने के बाद, अशोक वाटिका की भयंकर राक्षसियां माता सीता को डराने-धमकाने और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने लगती हैं। वे सीता से कहती हैं कि वह रावण को स्वीकार कर ले, अन्यथा वे उसे मार कर खा जाएंगी। इन धमकियों से सीता माता अत्यंत व्याकुल हो उठती हैं। वे सोचती हैं कि एक महीने का समय तो बहुत दूर है, अब उनके लिए एक-एक पल काटना भारी हो रहा है। सीता जी त्रिजटा (एक भली राक्षसी) से अग्नि मांगती हैं ताकि वे अपने प्राण त्याग सकें, लेकिन त्रिजटा उन्हें ढांढस बंधाकर चली जाती है। सीता माता जब वियोग में अपने प्राण त्यागने का निश्चय कर रही होती हैं, तभी पेड़ पर छिपे हनुमान जी एक बहुत ही चतुर और भावुक कदम उठाते हैं। वे ऊपर से श्री राम की 'स्वर्ण मुद्रिका' (अंगूठी), जिस पर 'राम' नाम अंकित है, सीता माता के सामने नीचे गिरा देते हैं। उस अंगूठी को देखकर माता सीता के हर्ष का कोई ठिकाना नहीं रहता। वे उसे अपने सीने और आंखों से लगा लेती हैं। लेकिन उनके मन में एक संदेह भी उठता है कि श्री राम की अंगूठी यहां कैसे आ सकती है? कहीं यह रावण की कोई नई माया तो नहीं? सीता जी के संदेह को दूर करने के लिए हनुमान जी पेड़ के पत्तों के बीच से श्री राम के जन्म से लेकर वनवास तक की पूरी कथा मधुर स्वर में गाने लगते हैं। रामकथा सुनकर माता सीता को अपार शांति मिलती है। तब हनुमान जी एक अत्यंत छोटे (सूक्ष्म) वानर का रूप धारण कर पेड़ से नीचे उतरते हैं और सीता माता के चरणों में लेट जाते हैं। वे अपना परिचय श्री राम के दूत के रूप में देते हैं। जब सीता माता को यह विश्वास हो जाता है कि हनुमान सचमुच राम के दूत हैं, तो वे फूट-फूट कर रोने लगती हैं और राम व लक्ष्मण की कुशल-क्षेम पूछती हैं। हनुमान जी माता सीता को आश्वासन देते हैं कि श्री राम अपनी पूरी वानर सेना के साथ बहुत जल्द लंका पर आक्रमण करेंगे और रावण का सर्वनाश कर उन्हें यहां से ससम्मान ले जाएंगे। सीता माता को एक छोटे से वानर को देखकर संदेह होता है कि इतने विशाल राक्षसों से वानर सेना कैसे लड़ेगी? तब हनुमान जी अपना अत्यंत विशाल और प्रलयंकारी रूप दिखाते हैं, जिसे देखकर माता सीता को पूर्ण विश्वास हो जाता है। विदाई से पूर्व, सीता माता निशानी के रूप में अपनी 'चूड़ामणि' (बालों का आभूषण) हनुमान जी को देती हैं ताकि श्री राम को विश्वास हो जाए कि वे सीता से मिल चुके हैं। माता सीता से आज्ञा पाकर हनुमान जी जाने लगते हैं, लेकिन उन्हें जोरों की भूख लग आती है। वे सीता जी से अशोक वाटिका के फल खाने की अनुमति मांगते हैं। फल खाते-खाते हनुमान जी जानबूझकर रावण को श्री राम की शक्ति का अहसास कराने और राक्षसों को उकसाने के लिए पूरी अशोक वाटिका को उजाड़ना शुरू कर देते हैं। वे बड़े-बड़े पेड़ों को जड़ से उखाड़ फेंकते हैं और वाटिका की सुंदरता को मटियामेट कर देते हैं। जब वाटिका के रक्षक राक्षसों को इस बात का पता चलता है, तो वे हनुमान जी पर हमला कर देते हैं, लेकिन हनुमान जी उन्हें गाजर-मूली की तरह मार गिराते हैं। यह खबर सुनकर रावण अपने अत्यंत बलशाली पुत्र 'अक्षय कुमार' को एक विशाल सेना के साथ भेजता है। हनुमान जी और अक्षय कुमार के बीच भयंकर युद्ध होता है। हनुमान जी अक्षय कुमार के रथ को तोड़ देते हैं और अंततः अक्षय कुमार को हवा में उछालकर जमीन पर पटक कर उसका वध कर देते हैं। यह एपिसोड हनुमान जी की भक्ति के साथ-साथ उनके अत्यंत रौद्र और पराक्रमी रूप को दर्शाता है, जिसने पहली बार लंका के अहंकार को हिलाकर रख दिया।
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Movie Details
Language
Hindi
Category
ramayan
Duration
Episode 45 (Full Episode)
Release Year
1987
