Ramayan EP 48 - श्रीराम वानरों की सेना के साथ समुद्र पहुँचना
Description
रामायण का अड़तालीसवां (48वां) एपिसोड महायुद्ध की तैयारियों, वानर सेना के अदम्य उत्साह और श्री राम के उस प्रलयंकारी संकल्प को प्रस्तुत करता है, जो लंका के विनाश का कारण बनने वाला है। हनुमान जी द्वारा माता सीता का समाचार और लंका की भौगोलिक स्थिति, रावण की सेना और वहां के रक्षकों की पूरी जानकारी प्राप्त करने के बाद, श्री राम और सुग्रीव लंका पर आक्रमण करने का अंतिम निर्णय लेते हैं। श्री राम जानते हैं कि माता सीता ने केवल एक महीने का समय दिया है, इसलिए अब एक पल का भी विलंब उचित नहीं है। सुग्रीव अपनी विशाल वानर और भालू सेना को युद्ध के लिए तैयार होने का आदेश देते हैं। नील, नल, अंगद, जाम्बवंत और हनुमान जैसे महान सेनापतियों के नेतृत्व में करोड़ों वानरों की एक अजेय सेना दक्षिण दिशा की ओर प्रस्थान करती है। वानर सेना का उत्साह देखने लायक है; वे "जय श्री राम" और "हर हर महादेव" के गगनभेदी जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ते हैं। सेना के चलने से ऐसा प्रतीत होता है मानो पूरी पृथ्वी कांप रही हो और आसमान धूल से ढक गया हो। यह यात्रा एक अत्यंत रोमांचक और ऊर्जा से भरी हुई है। कई दिनों की कठिन यात्रा के बाद, श्री राम और वानर सेना विशाल दक्षिण समुद्र के तट पर पहुँचती है। समुद्र का असीम और अथाह विस्तार देखकर सभी आश्चर्यचकित रह जाते हैं। लहरों का भयंकर शोर और समुद्र की गहराई यह स्पष्ट कर देती है कि इसे पार करना किसी साधारण सेना के बस की बात नहीं है। श्री राम समुद्र के किनारे अपना शिविर (Camp) स्थापित करते हैं। इधर लंका में, रावण के गुप्तचर (Spies) उसे सूचना देते हैं कि श्री राम ने करोड़ों वानरों की सेना के साथ समुद्र के इस पार डेरा डाल दिया है। रावण, जो अपने अहंकार में अंधा है, इस खबर को सुनकर ज़ोर-ज़ोर से हंसता है। उसका मानना है कि इंसान और वानर चाहे कितने भी शक्तिशाली क्यों न हों, वे इस अथाह समुद्र को कभी पार नहीं कर पाएंगे, और यदि वे किसी तरह लंका आ भी गए, तो राक्षसों का भोजन बन जाएंगे। यह एपिसोड एक ओर श्री राम की शांत और गंभीर रणनीति को दिखाता है, तो दूसरी ओर रावण के उस खोखले अहंकार को, जो जल्द ही उसके पूरे कुल को भस्म करने वाला है।
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Movie Details
Language
Hindi
Category
ramayan
Duration
Episode 48 (Full Episode)
Release Year
1987
