Ramayan EP 50 - विभीषण रामजी की शरण के लिए प्रस्थान
Description
रामायण का पचासवां (50वां) एपिसोड भारतीय संस्कृति के सबसे महान आदर्श—'शरणागति धर्म' (आश्रय मांगने वाले की रक्षा)—का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक उदाहरण प्रस्तुत करता है। रावण द्वारा भरी सभा में लात मारकर अपमानित किए जाने के बाद, विभीषण का लंका से मोहभंग हो जाता है। वे समझ जाते हैं कि जहां धर्म, नीति और सत्य का कोई सम्मान नहीं, उस राज्य का पतन निश्चित है। विभीषण अपनी माता कैकसी और पत्नी सरमा से विदा लेते हैं और अपने चार विश्वस्त मंत्रियों के साथ आकाश मार्ग से समुद्र पार करके श्री राम के शिविर (कैंप) की ओर प्रस्थान करते हैं। जब विभीषण समुद्र के उस पार वानर सेना के शिविर के ऊपर पहुँचते हैं, तो वानरों में खलबली मच जाती है। सुग्रीव और अन्य वानर सेनापतियों को लगता है कि यह रावण का कोई मायावी राक्षस या गुप्तचर (Spy) है, जो शिविर पर हमला करने या भेद लेने आया है। वानर उन्हें घेर लेते हैं। विभीषण हाथ जोड़कर सुग्रीव से कहते हैं कि वे रावण के भाई विभीषण हैं और श्री राम की शरण में आए हैं। सुग्रीव तुरंत श्री राम के पास जाकर यह सूचना देते हैं। सुग्रीव और अन्य मंत्री (जाम्बवंत आदि) श्री राम को कूटनीतिक सलाह देते हैं कि शत्रु का भाई कभी मित्र नहीं हो सकता, इसलिए विभीषण को तुरंत बंदी बना लेना चाहिए या मार देना चाहिए। लेकिन हनुमान जी विभीषण के पक्ष में बोलते हैं और बताते हैं कि जब वे लंका गए थे, तो विभीषण ही एकमात्र ऐसे व्यक्ति थे जो राम नाम का जाप करते थे और धर्म के मार्ग पर थे। इस पर श्री राम एक ऐसा ऐतिहासिक और अलौकिक प्रवचन देते हैं, जो उन्हें ईश्वर के पद पर स्थापित करता है। श्री राम कहते हैं—"शरणागत की रक्षा करना मेरा परम धर्म है। यदि कोई इंसान अपने कोटि-कोटि (करोड़ों) जन्मों के पाप लेकर भी मेरी शरण में आ जाए, तो मैं उसे पल भर में निष्पाप कर देता हूँ। विभीषण तो क्या, यदि स्वयं रावण भी भयभीत होकर मेरी शरण में आ जाए, तो मैं उसे भी अपना लूंगा।" श्री राम की इस असीम करुणा को सुनकर सुग्रीव और अन्य वानर नतमस्तक हो जाते हैं। विभीषण को ससम्मान श्री राम के समक्ष लाया जाता है। श्री राम के अलौकिक मुखमंडल को देखकर विभीषण उनके चरणों में गिर पड़ते हैं। श्री राम उन्हें उठाकर अपने हृदय से लगा लेते हैं। यह दृश्य 'भक्त और भगवान' के मिलन का एक अत्यंत भावुक क्षण है। श्री राम विभीषण को लंका का भावी राजा घोषित करते हैं और समुद्र के जल से उसी समय उनका 'राजतिलक' कर देते हैं। यह एपिसोड सत्य की जीत और शरणागत की रक्षा के उसूलों को बहुत ही गहराई से स्थापित करता है।
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Movie Details
Language
Hindi
Category
ramayan
Duration
Episode 50 (Full Episode)
Release Year
1987
