Ramayan EP 52 - समुद्र पर रामजी का क्रोध | समुद्र की विनती
Description
रामानंद सागर की 'रामायण' (1987) का बावनवां (52वां) एपिसोड भगवान श्री राम के उस रौद्र और प्रलयंकारी रूप को प्रस्तुत करता है, जिसे देखकर साक्षात देवता भी कांप उठते हैं। तीन दिन और तीन रातों तक बिना अन्न-जल ग्रहण किए, श्री राम समुद्र तट पर कुश के आसन पर बैठकर समुद्र देव (वरुण) से मार्ग देने की विनम्र प्रार्थना कर रहे हैं। परंतु समुद्र अपने गहरे अहंकार और अपनी विशालता के घमंड में चूर होकर श्री राम की इस विनम्रता और तपस्या का कोई उत्तर नहीं देता। उसकी लहरें उसी उग्रता के साथ तट से टकरा रही हैं। जब तीन दिन बीत जाते हैं और समुद्र टस से मस नहीं होता, तब मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम का धैर्य अंततः जवाब दे जाता है। राम लक्ष्मण से कहते हैं—"लक्ष्मण! धनुष और बाण लाओ। विनय न मानत जलधि जड़ गए तीनि दिन बीति, बोले राम सकोप तब भय बिनु होइ न प्रीति।" (यह मूर्ख समुद्र विनम्रता से नहीं मानेगा, बिना भय के कोई प्रेम या सम्मान नहीं करता)। श्री राम क्रोधित होकर अपने कोदंड धनुष पर एक अत्यंत प्रलयंकारी अग्निबाण (ब्रह्मास्त्र के समान) चढ़ाते हैं। जैसे ही वे बाण को संधान करते हैं, पूरे ब्रह्मांड में हाहाकार मच जाता है। समुद्र का जल उबलने लगता है, पाताल लोक में कंपन होने लगता है, और समुद्र के भीतर रहने वाले मगरमच्छ, मछलियां और अन्य जलचर प्राणी जलकर मरने लगते हैं। अपने अस्तित्व को खतरे में देखकर, समुद्र देव का सारा अहंकार पल भर में चूर-चूर हो जाता है। समुद्र देव एक ब्राह्मण का रूप धारण कर, हाथों में मोतियों और रत्नों का थाल लेकर त्राहि-त्राहि करते हुए जल से बाहर आते हैं और श्री राम के चरणों में गिर पड़ते हैं। समुद्र देव क्षमा मांगते हुए कहते हैं कि "हे प्रभु! मेरी प्रकृति जल की है, मैं चाहकर भी अपना जल नहीं सुखा सकता। परंतु मेरी ही लहरों के बीच आपकी सेना में मौजूद दो वानर—नल और नील—को एक वरदान (या श्राप) प्राप्त है कि वे जिस भी वस्तु को पानी में फेंकेंगे, वह डूबेगी नहीं।" समुद्र देव श्री राम को नल और नील की सहायता से समुद्र पर एक पुल (सेतु) बनाने का सुझाव देते हैं और वचन देते हैं कि वह उस पुल को अपने ऊपर धारण करेंगे। यह एपिसोड नीति, शक्ति और प्रकृति के नियमों के बीच संतुलन का एक अद्भुत उदाहरण है।
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Movie Details
Language
Hindi
Category
ramayan
Duration
Episode 52 (Full Episode)
Release Year
1987
