
Ramayan EP 53 - नल-नील द्वारा पुल बाँधना
Description
रामायण (1987) का तिरपनवां (53वां) एपिसोड संपूर्ण हिंदू संस्कृति और इतिहास के सबसे महान निर्माण—'रामसेतु' (Ram Setu) के अद्भुत और चमत्कारिक प्रसंग को दर्शाता है। समुद्र देव से मार्ग और पुल बनाने की युक्ति प्राप्त करने के बाद, श्री राम की पूरी वानर और भालू सेना में एक नई ऊर्जा और उत्साह का संचार हो जाता है। सुग्रीव की आज्ञा से सेना के प्रमुख शिल्पी और इंजीनियर, नल और नील, इस विशाल और असंभव से लगने वाले निर्माण कार्य का नेतृत्व संभालते हैं। करोड़ों वानर, जिनमें हनुमान जी, अंगद और जाम्बवंत भी शामिल हैं, बड़े-बड़े पहाड़ों, चट्टानों और विशाल पेड़ों को उखाड़ कर समुद्र तट पर लाते हैं। नल और नील हर एक पत्थर पर सिंदूर से 'श्री राम' (Shree Ram) का पवित्र नाम लिखते हैं और उसे समुद्र के अथाह जल में छोड़ देते हैं। राम नाम की महिमा और समुद्र देव के वचन के कारण, वे भारी-भरकम पत्थर डूबने के बजाय पानी की सतह पर तैरने लगते हैं। पत्थरों को एक-दूसरे से जोड़कर एक अत्यंत मजबूत और विशाल पुल का निर्माण बड़ी तेजी से होने लगता है। वानर खुशी से "जय श्री राम" के जयकारे लगाते हुए दिन-रात बिना थके काम करते हैं। इसी निर्माण कार्य के दौरान एक अत्यंत भावुक और प्रसिद्ध 'गिलहरी प्रसंग' (Squirrel Story) भी आता है। एक छोटी सी गिलहरी भी राम काज में अपना योगदान देने के लिए रेत में लोटती है और फिर पुल के पत्थरों के बीच जाकर रेत झाड़ देती है। जब कुछ वानर उसका मजाक उड़ाते हैं, तो श्री राम उस गिलहरी को अपने हाथों में उठाते हैं और अत्यंत प्रेम से उसकी पीठ पर अपनी तीन उंगलियां फेरते हैं (जिससे गिलहरी की पीठ पर धारियां बन जाती हैं)। राम कहते हैं कि सेवा का आकार नहीं, बल्कि उसके पीछे का भाव देखा जाता है। अंततः, कुछ ही दिनों के अथक परिश्रम से 100 योजन लंबा रामसेतु बनकर तैयार हो जाता है। श्री राम रामेश्वरम में भगवान शिव (रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग) की स्थापना कर उनकी पूजा करते हैं, और फिर पूरी सेना के साथ पुल पार कर लंका की धरती (सुबेल पर्वत) पर अपना पहला कदम रखते हैं। यह एपिसोड भक्ति, संगठन और राम नाम की असीम शक्ति का प्रतीक है।
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Movie Details
Language
Hindi
Category
ramayan
Duration
Episode 53 (Full Episode)
Release Year
1987