Ramayan EP 54 - राम के बाण से रावण के मुकुट-छत्रादि गिरना
Description
रामायण (1987) का चौवनवां (54वां) एपिसोड लंका में श्री राम के आगमन और रावण के दरबार में उनके द्वारा भेजे गए एक ऐसे अचूक और प्रलयंकारी संदेश का चित्रण है, जिसने रावण के अहंकार की चूलें हिला दीं। रामसेतु पार करने के पश्चात, श्री राम, लक्ष्मण, सुग्रीव, विभीषण और पूरी वानर सेना लंका के पास स्थित 'सुबेल पर्वत' पर अपना शिविर (Camp) स्थापित करती है। इस ऊंचे पर्वत से रावण की भव्य और सोने से जड़ी लंका नगरी स्पष्ट दिखाई देती है। एक दिन सुबह, श्री राम, लक्ष्मण और सुग्रीव पर्वत के शिखर पर खड़े होकर लंका का निरीक्षण कर रहे होते हैं। तभी श्री राम की दृष्टि दूर स्थित रावण के राजमहल की छत पर पड़ती है। रावण अपने दरबारियों के साथ छत पर बैठा है; उसके ऊपर एक अत्यंत विशाल और शानदार 'छत्र' (रॉयल अम्ब्रेला) तना हुआ है और उसके दस सिरों पर रत्नजड़ित मुकुट चमक रहे हैं। रावण का यह वैभव और अहंकार श्री राम को भीतर तक खटकता है। श्री राम रावण को बिना कोई जनहानि पहुंचाए, उसकी शक्ति का एक छोटा सा नमूना (Trailer) दिखाने का निश्चय करते हैं। श्री राम अपने कोदंड धनुष पर एक अत्यंत चमत्कारी और अमोघ बाण संधान करते हैं और बिना कुछ कहे उसे रावण की दिशा में छोड़ देते हैं। वह बाण एक बिजली की गति से आकाश को चीरता हुआ मीलों दूर रावण के महल की छत तक पहुंचता है। किसी के कुछ भी समझने से पहले, वह बाण रावण के सिर के ऊपर तने हुए उस विशाल राजछत्र को काट गिराता है और उसके दस सिरों पर सजे हुए सभी मुकुटों को एक झटके में जमीन पर गिरा देता है। इसके साथ ही मंदोदरी के कान के कुंडल भी गिर जाते हैं। बाण अपना काम करके वापस श्री राम के तरकश में लौट आता है। रावण की पूरी सभा में सन्नाटा और खौफ छा जाता है। जो रावण अपने आप को अजेय मानता था, उसके मुकुट का इस तरह गिरना एक बहुत बड़ा अपशकुन और अपमान माना जाता है। रावण घबरा जाता है कि जो तीर इतनी दूर से उसके मुकुट को काट सकता है, वह उसके सिर को क्यों नहीं काट सकता? मंदोदरी रावण को समझाती है कि यह श्री राम की चेतावनी है और वे कोई साधारण मनुष्य नहीं हैं। यह एपिसोड श्री राम के अकल्पनीय धनुर्विद्या कौशल और रावण के मन में पैदा हुए पहले वास्तविक डर को दर्शाता है।
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Movie Details
Language
Hindi
Category
ramayan
Duration
Episode 54 (Full Episode)
Release Year
1987
