Ramayan EP 59 - युद्ध में कई वीर योद्धा शहीद हुए
Description
रामायण (1987) का उनसठवां (59वां) एपिसोड उस महाविनाशकारी और ऐतिहासिक 'राम-रावण युद्ध' के शंखनाद का गवाह बनता है, जिसकी प्रतीक्षा पूरी सृष्टि कर रही थी। शांति के सभी प्रयास विफल हो चुके हैं। श्री राम के आदेश पर, वानर सेना के सेनापतियों (नील, नल, अंगद, जाम्बवंत और हनुमान) के नेतृत्व में करोड़ों वानर और भालू "जय श्री राम" और "हर हर महादेव" के गगनभेदी जयकारे लगाते हुए लंका के चारों मुख्य द्वारों पर भयंकर आक्रमण कर देते हैं। दूसरी ओर से लंका के अजेय और खूंखार राक्षस योद्धा अपने मायावी अस्त्र-शस्त्रों और भारी तोपखानों के साथ वानरों का सामना करने के लिए किले से बाहर निकल पड़ते हैं। युद्ध का पहला दिन अत्यंत भयानक और रक्तपात से भरा होता है। लंका की धरती पर एक ऐसा महासंग्राम शुरू होता है जिसमें इंसानियत, दया और क्षमा की कोई जगह नहीं है। वानर सेना के पास कोई अत्याधुनिक हथियार नहीं हैं; वे पेड़ों, विशाल चट्टानों, पहाड़ों और अपने नाखूनों व दांतों का प्रयोग करके राक्षसों से लड़ रहे हैं। वहीं, राक्षस रथों, हाथियों और मायावी तलवारों व भालों से सुसज्जित हैं। लेकिन वानरों की भक्ति और उनका जोश राक्षसों के हथियारों पर भारी पड़ रहा है। हनुमान जी और अंगद युद्धभूमि में एक प्रलय की तरह घूम रहे हैं और दर्जनों राक्षसों को हवा में उछाल-उछाल कर मार रहे हैं。 इस युद्ध में लंका के कई बड़े और प्रसिद्ध सेनापति श्री राम की सेना का सामना करने आते हैं। रावण के कुछ सबसे विश्वासपात्र और खूंखार योद्धा (जैसे प्रहस्त, अकम्पन और महोदर) अपना पराक्रम दिखाने के लिए आगे आते हैं। उनका सामना वानर सेना के श्रेष्ठ योद्धाओं—विशेषकर हनुमान, अंगद और लक्ष्मण—से होता है। युद्धभूमि में भयंकर द्वंद्व युद्ध (One-on-One Combat) देखने को मिलते हैं। अंगद अपने असीम बाहुबल से राक्षसों के रथों को चूर-चूर कर देते हैं और लक्ष्मण जी के अचूक बाण लंका के महारथियों के सीने छलनी कर देते हैं। इस पहले चरण के युद्ध में रावण की सेना को बहुत भारी नुकसान उठाना पड़ता है। लंका के कई प्रमुख और अभिमानी योद्धा वीरगति को प्राप्त होते हैं। वानर सेना की ओर से भी कई बहादुर सैनिकों का बलिदान होता है, लेकिन श्री राम के आशीर्वाद से वानरों का मनोबल जरा भी नहीं टूटता। जब रावण के दरबार में एक के बाद एक उसके प्रमुख सेनापतियों के मारे जाने का समाचार पहुँचता है, तो लंका में शोक और चिंता की लहर दौड़ जाती है। रावण को पहली बार यह आभास होता है कि उसने जिस वानर सेना को तुच्छ और कमजोर समझा था, वह असल में लंका के विनाश का साक्षात रूप है। यह एपिसोड महायुद्ध की विभीषिका, योद्धाओं के शौर्य और सत्य की विजय की ओर बढ़ते पहले कदम का एक अत्यंत ही रोमांचक और एक्शन से भरपूर चित्रण है, जो दर्शकों को स्क्रीन से बांधे रखता है。
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Movie Details
Language
Hindi
Category
ramayan
Duration
Episode 59 (Full Episode)
Release Year
1987
