Ramayan EP 60 - रावण का युद्ध प्रस्थान
Description
रामायण का साठवां (60वां) एपिसोड अहंकार, घमंड और परम पराक्रम के उस प्रलयंकारी टकराव को प्रस्तुत करता है, जहाँ लंकापति दशानन रावण, अपने कई प्रमुख सेनापतियों के मारे जाने के बाद, स्वयं युद्धभूमि में उतरने का निर्णय लेता है। युद्ध के शुरुआती दिनों में रावण ने अपने कई शूरवीरों को खो दिया है। लंका की सेना वानरों के अप्रत्याशित और भयंकर हमलों से पीछे हटने को मजबूर हो रही है। इस अपमान और नुकसान को देखकर रावण का क्रोध ज्वालामुखी की तरह भड़क उठता है। वह यह तय करता है कि अब वह स्वयं राम, लक्ष्मण और वानर सेना का खात्मा करेगा। रावण को युद्ध के लिए तैयार किया जाता है। उसे उसके अभेद्य दिव्य कवच पहनाए जाते हैं और वह अपने उस विशाल, जादुई और खौफनाक रथ पर सवार होता है, जिसे देखकर देवताओं के भी पसीने छूट जाते हैं। रावण का रथ हथियारों से भरा हुआ है और उसके दस सिरों और बीस भुजाओं का प्रताप पूरे ब्रह्मांड को डराने वाला है। जैसे ही रावण अपने रथ पर सवार होकर युद्धभूमि में प्रवेश करता है, उसके रथ के पहियों की गड़गड़ाहट और उसकी भयंकर गर्जना से पूरी लंका कांप उठती है। रावण के शंखनाद को सुनकर वानर सेना में एक पल के लिए खौफ और हाहाकार मच जाता है, क्योंकि उन्होंने रावण जैसा विशाल और मायावी योद्धा पहले कभी नहीं देखा था。 रावण युद्धभूमि में आते ही वानर सेना पर कहर बनकर टूट पड़ता है। वह अपने दिव्य और मायावी बाणों की ऐसी बारिश करता है कि हजारों वानर एक साथ हवा में उड़ जाते हैं और युद्धभूमि में खून की नदियां बहने लगती हैं। रावण को रोकने के लिए सुग्रीव, अंगद और हनुमान जैसे महान योद्धा आगे आते हैं। हनुमान जी का रावण के साथ एक अत्यंत रोमांचक और भयंकर आमना-सामना होता है। हनुमान जी रावण की छाती पर एक जोरदार प्रहार करते हैं, जिससे रावण कुछ पल के लिए चकरा जाता है। रावण भी हनुमान जी के बल की प्रशंसा करता है, लेकिन फिर वह अपने मायावी अस्त्रों से हनुमान जी और सुग्रीव को पीछे हटने पर मजबूर कर देता है。 अंततः रावण का सामना लक्ष्मण जी से होता है। लक्ष्मण और रावण के बीच एक अत्यंत तीव्र और आक्रामक युद्ध (तीरों की वर्षा) होता है। लक्ष्मण जी रावण के कई बाणों को बीच में ही काट देते हैं और उसके सारथी तथा रथ को नुकसान पहुंचाते हैं। लेकिन रावण, जो असीम शक्तियों का स्वामी है, लक्ष्मण पर एक अत्यंत शक्तिशाली और घातक 'शक्ति' (ब्रह्मशक्ति) का प्रहार करता है। इस शक्ति के लगने से लक्ष्मण जी गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं और मूर्छित होकर गिर पड़ते हैं। रावण लक्ष्मण के शरीर को उठाने का प्रयास करता है, लेकिन वह शेषनाग के अवतार लक्ष्मण को एक इंच भी नहीं हिला पाता। अंत में, श्री राम स्वयं रावण के सामने आते हैं। राम के बाणों की गति और प्रताप के सामने रावण टिक नहीं पाता। श्री राम रावण का मुकुट और धनुष काट देते हैं और उसे निहत्था कर देते हैं। एक सच्चे और मर्यादित योद्धा की तरह श्री राम निहत्थे रावण पर वार नहीं करते और उसे "जाओ, आज तुम थक गए हो, कल आना" कहकर जीवनदान दे देते हैं। रावण अपना यह भयंकर अपमान सहकर भारी मन से लंका लौट जाता है। यह एपिसोड राम की मर्यादा और रावण के अहंकार के टूटने का एक बहुत ही शानदार अध्याय है。
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Movie Details
Language
Hindi
Category
ramayan
Duration
Episode 60 (Full Episode)
Release Year
1987
