Ramayan EP 63 - रावण का कुम्भकर्ण वियोग
Description
रामायण (1987) का तिरसठवां (63वां) एपिसोड महाकाव्य के सबसे भयंकर, विनाशकारी और भावुक युद्ध प्रसंगों में से एक है। यह एपिसोड विशालकाय कुम्भकर्ण के रणभूमि में मचाए गए कोहराम, उसके सर्वोच्च पराक्रम और अंततः श्री राम के हाथों उसके उद्धार (मोक्ष) की कहानी प्रस्तुत करता है। अपने बड़े भाई रावण के प्रति अपने कर्त्तव्य का पालन करते हुए, कुम्भकर्ण जब युद्धभूमि में उतरता है, तो उसका रूप साक्षात काल (मृत्यु) के समान प्रतीत होता है। उसके पैरों तले सैकड़ों वानर कुचले जा रहे हैं, और वह अपनी विशाल भुजाओं से वानरों को पकड़-पकड़ कर गाजर-मूली की तरह चबाने लगता है。 कुम्भकर्ण का आतंक इतना बढ़ जाता है कि सुग्रीव, हनुमान, अंगद और नल-नील जैसे महान वानर योद्धा भी उसे रोकने में असमर्थ साबित होते हैं। कुम्भकर्ण एक ही प्रहार में वानर सेना के बड़े-बड़े शूरवीरों को घायल कर देता है। यहाँ तक कि वह वानरराज सुग्रीव को भी बेहोश कर अपनी कांख में दबाकर लंका की ओर ले जाने लगता है, लेकिन रास्ते में सुग्रीव को होश आ जाता है और वे कुम्भकर्ण की नाक और कान काटकर वापस राम के पास भाग आते हैं। खून से लथपथ और क्रोध से पागल कुम्भकर्ण अब और भी अधिक भयानक हो जाता है。 जब वानर सेना का पूर्ण विनाश होने लगता है, तब मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम स्वयं युद्धभूमि में उतरते हैं। श्री राम और कुम्भकर्ण के बीच एक अत्यंत रोमांचक और प्रलयंकारी युद्ध शुरू होता है। कुम्भकर्ण पहाड़ और विशाल पेड़ उखाड़कर श्री राम की ओर फेंकता है, लेकिन राम अपने अचूक बाणों से उन्हें हवा में ही नष्ट कर देते हैं। जब कुम्भकर्ण नहीं रुकता, तो श्री राम एक अत्यंत शक्तिशाली और वायव्यास्त्र का प्रयोग कर कुम्भकर्ण की दाईं भुजा काट देते हैं। कटी हुई भुजा कई वानरों को कुचलती हुई जमीन पर गिरती है। इसके बाद राम उसकी बाईं भुजा और फिर उसके पैरों को भी अपने बाणों से काट देते हैं。 अंततः, श्री राम 'इंद्रास्त्र' (या ब्रह्मास्त्र) का संधान करते हैं और एक ही बाण से कुम्भकर्ण के विशाल सिर को धड़ से अलग कर देते हैं। उसका सिर लंका के दरवाजे पर जाकर गिरता है और उसका विशाल धड़ समुद्र में समा जाता है। मृत्यु के समय कुम्भकर्ण श्री राम के दिव्य स्वरूप के दर्शन करता है और उसकी आत्मा राम के शरीर में विलीन हो जाती है (उसे परम मोक्ष की प्राप्ति होती है)। इधर लंका के राजमहल में, जब रावण को अपने सबसे शक्तिशाली और प्रिय भाई कुम्भकर्ण की मृत्यु का समाचार मिलता है, तो वह शोक और पीड़ा से चीत्कार कर उठता है। जो रावण अपने अहंकार में कभी नहीं रोया, वह आज अपने भाई के कटकर गिरे हुए सिर को देखकर फूट-फूट कर विलाप करता है। रावण को पहली बार अपनी हार और लंका के विनाश का साक्षात रूप दिखाई देता है। वह विलाप करते हुए कहता है कि कुम्भकर्ण के बिना उसका दाहिना हाथ कट गया है। यह एपिसोड एक ओर श्री राम के असीम पराक्रम और दूसरी ओर रावण के पारिवारिक शोक और उसके अहंकार के टूटने का अत्यंत मार्मिक चित्रण है।
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Movie Details
Language
Hindi
Category
ramayan
Duration
Episode 63 (Full Episode)
Release Year
1987
