Ramayan EP 64 - अतिकाय की परमगति
Description
रामानंद सागर कृत 'रामायण' (1987) का चौंसठवां (64वां) एपिसोड लंका के राजमहल में पसरे शोक, प्रतिशोध की ज्वाला और एक अत्यंत शक्तिशाली राक्षस राजकुमार 'अतिकाय' के रणभूमि में पराक्रम और उसकी परमगति को दर्शाता है। कुम्भकर्ण जैसे अजेय योद्धा की मृत्यु के बाद लंकापति रावण गहरे शोक और अवसाद में डूब गया है। रावण के विलाप और हताशा को देखकर उसके पुत्र, जो स्वयं भी अत्यंत पराक्रमी और मायावी हैं, अपने पिता के सम्मान और लंका की रक्षा के लिए युद्धभूमि में जाने का संकल्प लेते हैं。 रावण के पुत्रों में 'अतिकाय' (जो रावण और उसकी दूसरी पत्नी धान्यामालिनी का पुत्र है) अपनी विशाल काया, असीम बल और भगवान ब्रह्मा से प्राप्त दिव्य अस्त्र-शस्त्रों के लिए जाना जाता है। अतिकाय के पास ब्रह्मा जी द्वारा दिया गया एक ऐसा अभेद्य 'ब्रह्मकवच' (Armor) है, जिसे किसी भी साधारण अस्त्र या शस्त्र से भेदा नहीं जा सकता। अपने चाचा कुम्भकर्ण की मृत्यु का बदला लेने के लिए, अतिकाय अपने भाइयों के साथ एक विशाल और खूंखार राक्षस सेना लेकर रणभूमि में उतरता है। अतिकाय युद्धभूमि में आते ही वानर सेना पर कहर बनकर टूट पड़ता है। उसका रथ और उसके अस्त्र इतने भयानक हैं कि बड़े-बड़े वानर योद्धा उसके सामने टिक नहीं पाते। वह अपने तीखे बाणों से वानरों को गाजर-मूली की तरह काटने लगता है। यह देखकर वानर सेना में हाहाकार मच जाता है। विभीषण श्री राम और लक्ष्मण को अतिकाय के पराक्रम और उसके अभेद्य कवच के बारे में बताते हैं। अतिकाय के इस भयंकर आतंक को रोकने के लिए शेषनाग के अवतार वीर लक्ष्मण स्वयं युद्धभूमि में उतरते हैं। लक्ष्मण और अतिकाय के बीच एक अत्यंत भयंकर, तीव्र और रोमांचक द्वंद्व युद्ध शुरू होता है। दोनों योद्धा एक-दूसरे पर दिव्यास्त्रों की वर्षा预 کرتے हैं। लक्ष्मण अपने कई अचूक बाण अतिकाय के शरीर पर मारते हैं, लेकिन ब्रह्मा के उस अभेद्य कवच के कारण अतिकाय को एक खरोंच तक नहीं आती। अतिकाय हंसते हुए लक्ष्मण का उपहास करता है। जब लक्ष्मण के सभी अस्त्र विफल होने लगते हैं, तब विभीषण (या वायु देव) लक्ष्मण को गुप्त रूप से यह रहस्य बताते हैं कि अतिकाय के इस ब्रह्मकवच को केवल और केवल 'ब्रह्मास्त्र' के प्रयोग से ही भेदा जा सकता है। यह जानकर लक्ष्मण जी तुरंत अपने धनुष पर अत्यंत प्रलयंकारी 'ब्रह्मास्त्र' का संधान करते हैं और पूरे ब्रह्मांड की ऊर्जा को उस बाण में केंद्रित कर अतिकाय की ओर छोड़ देते हैं। ब्रह्मास्त्र एक प्रचंड अग्नि के रूप में अतिकाय की ओर बढ़ता है। अतिकाय इस बाण को रोकने का बहुत प्रयास करता है, लेकिन ब्रह्मास्त्र उसके अभेद्य कवच को चीरता हुआ उसके सिर को धड़ से अलग कर देता है। अतिकाय एक भयंकर गर्जना के साथ जमीन पर गिर पड़ता है और वीरगति को प्राप्त होता है। अतिकाय की मृत्यु से वानर सेना में भारी उत्साह और लंका की सेना में खौफ छा जाता है। रावण के दरबार में जब उसके वीर पुत्र की मृत्यु का समाचार पहुँचता है, तो रावण का अहंकार एक बार फिर गहरी चोट खाता है। यह एपिसोड लक्ष्मण जी के अपार शौर्य और युद्ध में नीति व ज्ञान के महत्व का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
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Movie Details
Language
Hindi
Category
ramayan
Duration
Episode 64 (Full Episode)
Release Year
1987
