Ramayan EP 65 - मेघनाद का युद्ध
Description
रामायण (1987) का पैंसठवां (65वां) एपिसोड महाकाव्य के सबसे डार्क, तनावपूर्ण और रोंगटे खड़े कर देने वाले प्रसंगों में से एक है। कुम्भकर्ण और अतिकाय सहित अपने कई शूरवीर पुत्रों और भाइयों को खोने के बाद, लंकापति रावण का हृदय शोक और प्रतिशोध की ज्वाला में जल रहा है। रावण की इस हताशा को देखकर उसका सबसे ज्येष्ठ, सबसे शक्तिशाली और त्रिलोक-विजयी पुत्र 'मेघनाद' (जिसे इंद्र को हराने के कारण 'इंद्रजीत' भी कहा जाता है) आगे आता है। मेघनाद अपने पिता को सांत्वना देता है और कसम खाता है कि आज वह वनवासियों (राम और लक्ष्मण) का वध करके ही लौटेगा। मेघनाद कोई साधारण योद्धा नहीं है; उसने घोर तपस्या करके भगवान ब्रह्मा, शिव और असुर गुरु शुक्राचार्य से ऐसे मायावी और दिव्यास्त्र प्राप्त किए हैं, जिनका कोई तोड़ नहीं है। वह बादलों (मेघ) के पीछे छिपकर युद्ध करने में माहिर है। जब मेघनाद अपने मायावी रथ पर सवार होकर युद्धभूमि में पहुँचता है, तो उसकी भयंकर गर्जना से ही वानर सेना में खौफ छा जाता है। रणभूमि में प्रवेश करते ही मेघनाद अपनी मायावी शक्तियों का प्रदर्शन शुरू कर देता है। वह कभी अदृश्य हो जाता है, तो कभी आकाश से आग और पत्थरों की वर्षा करने लगता है। वानर सेना यह समझ ही नहीं पाती कि वार कहाँ से हो रहे हैं। मेघनाद के तीखे और मायावी बाणों से सुग्रीव, हनुमान, अंगद और जाम्बवंत जैसे महान योद्धा भी बुरी तरह घायल हो जाते हैं। वानर सेना की इस दुर्दशा को देखकर श्री राम और लक्ष्मण स्वयं मेघनाद का सामना करने के लिए आगे आते हैं। राम-लक्ष्मण और मेघनाद के बीच एक अत्यंत रोमांचक और महाविनाशकारी युद्ध होता है। मेघनाद आकाश में बादलों के पीछे छिपकर दोनों भाइयों पर बाणों की बौछार कर रहा है। वह अपनी माया का भरपूर उपयोग करता है, जिससे राम और लक्ष्मण के लिए उसे निशाना बनाना कठिन हो जाता है। युद्ध के चरम पर, जब मेघनाद देखता है कि श्री राम और लक्ष्मण उसके साधारण अस्त्रों से पराजित नहीं हो रहे हैं, तो वह छल का सहारा लेता है। वह आकाश से एक अत्यंत भयानक और मायावी 'नागपाश' (साँपों का फंदा) अस्त्र श्री राम और लक्ष्मण पर छोड़ देता है। नागपाश एक ऐसा दिव्यास्त्र है जिससे बचना असंभव है। आकाश से अनगिनत जहरीले और खूंखार साँप बरसते हैं और राम व लक्ष्मण के शरीरों को पूरी तरह से जकड़ लेते हैं। नागों के इस भयंकर फंदे और उनके प्राणघातक जहर के प्रभाव से दोनों भाई अचेत (मूर्छित) होकर रणभूमि में गिर पड़ते हैं। यह दृश्य अत्यंत हृदयविदारक है। पूरे ब्रह्मांड के स्वामी श्री राम और लक्ष्मण को इस दयनीय अवस्था में नागपाश में बंधा देखकर वानर सेना में हाहाकार और गहरा शोक छा जाता है। सुग्रीव और हनुमान फूट-फूट कर रोने लगते हैं। वहीं दूसरी ओर, मेघनाद अपनी इस 'जीत' पर अट्टहास करता हुआ लंका लौट जाता है और रावण को यह खुशखबरी देता है कि उसने राम-लक्ष्मण का अंत कर दिया है। यह एपिसोड बुराई के चरम उत्कर्ष और नायकों के सबसे बड़े संकट का ऐसा सजीव चित्रण है जो दर्शकों की सांसें रोक देता है。
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Movie Details
Language
Hindi
Category
ramayan
Duration
Episode 65 (Full Episode)
Release Year
1987
