Ramayan EP 66 - गरुड़ का पराक्रम
Description
रामानंद सागर की 'रामायण' (1987) का छियासठवां (66वां) एपिसोड निराशा के घने अंधकार के बीच ईश्वरीय चमत्कार, भक्ति की शक्ति और 'पक्षिराज गरुड़' के असीम पराक्रम की एक अत्यंत भव्य और रोमांचक कहानी है। पिछले एपिसोड में हमने देखा था कि लंका के सबसे खूंखार और मायावी योद्धा मेघनाद (इंद्रजीत) ने छल से 'नागपाश' अस्त्र का प्रयोग कर श्री राम और लक्ष्मण को मूर्छित कर दिया था। दोनों भाई रणभूमि में जहरीले सांपों के पाश में बंधे हुए बेसुध पड़े हैं। श्री राम और लक्ष्मण को इस मृतप्राय अवस्था में देखकर पूरी वानर सेना गहरे शोक और अवसाद में डूब गई है। सुग्रीव, अंगद और हनुमान फूट-फूट कर रो रहे हैं। विभीषण भी अत्यंत व्याकुल हैं। इधर लंका के राजमहल में, रावण और मेघनाद जश्न मना रहे हैं। रावण माता सीता को त्रिजटा के साथ पुष्पक विमान में बैठाकर रणभूमि के ऊपर से ले जाता है, ताकि सीता राम और लक्ष्मण के निष्प्राण शरीरों को देखकर अपनी आखिरी उम्मीद भी छोड़ दे। राम को उस अवस्था में देखकर माता सीता का विलाप दर्शकों की रूह कंपा देता है, लेकिन त्रिजटा उन्हें सांत्वना देती है कि राम के चेहरे का तेज बता रहा है कि वे अभी जीवित हैं。 रणभूमि में जब हर कोई हताश हो चुका है, तब अचानक आकाश में एक भयंकर तूफान उठता है। तेज आंधी चलने लगती है, समुद्र की लहरें उफनने लगती हैं और बादलों के बीच से एक अत्यंत तेजवान और दिव्य प्रकाश प्रकट होता है। यह प्रकाश कोई और नहीं, बल्कि भगवान विष्णु के वाहन और सर्पों के सबसे बड़े शत्रु—'पक्षिराज गरुड़' हैं। (गरुड़ को देवर्षि नारद या पवन देव की प्रेरणा से राम की सहायता के लिए भेजा जाता है)। गरुड़ की विशालता और उनके डैनों (पंखों) की फड़फड़ाहट से उत्पन्न हुई आंधी से लंका के राक्षस कांप उठते हैं। गरुड़ के आते ही नागपाश के वे सभी खूंखार और जहरीले सांप, जो राम और लक्ष्मण से लिपटे हुए थे, भय के मारे कांपने लगते हैं और उन्हें छोड़कर तुरंत वहां से भाग खड़े होते हैं। गरुड़ अपने दिव्य पंखों से राम और लक्ष्मण के शरीरों को स्पर्श करते हैं, जिससे उनके घाव पल भर में भर जाते हैं, जहर का प्रभाव खत्म हो जाता है और दोनों भाई पूरी ऊर्जा के साथ उठ खड़े होते हैं। श्री राम उठकर गरुड़ को धन्यवाद देते हैं और उनसे उनका परिचय पूछते हैं। गरुड़ जी अत्यंत भावुक होकर भगवान राम की स्तुति करते हैं और कहते हैं कि "हे प्रभु! आप तो स्वयं अखिल ब्रह्मांड के स्वामी हैं, यह नागपाश तो आपकी ही रची हुई एक लीला थी। मैं तो केवल अपना कर्तव्य निभाने आया हूँ।" गरुड़ श्री राम और लक्ष्मण को यह चेतावनी भी देते हैं कि राक्षसों का युद्ध छल और माया से भरा होता है, इसलिए भविष्य में वे मेघनाद की मायावी शक्तियों से सतर्क रहें। श्री राम और लक्ष्मण को जीवित और पूर्णतः स्वस्थ देखकर वानर सेना खुशी से पागल हो जाती है और "जय श्री राम" के गगनभेदी जयकारे लगाने लगती है। यह भयंकर शंखनाद जब लंका के राजमहल में रावण के कानों तक पहुँचता है, तो उसके जश्न का माहौल तुरंत मातम और खौफ में बदल जाता है। यह एपिसोड आशा, ईश्वरीय कृपा और इस अमर सत्य का प्रतीक है कि जहाँ धर्म है, वहाँ साक्षात ईश्वर किसी न किसी रूप में रक्षा करने अवश्य आते हैं。
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Movie Details
Language
Hindi
Category
ramayan
Duration
Episode 66 (Full Episode)
Release Year
1987
