Ramayan EP 67 - लक्ष्मण मेघनाद युद्ध
Description
रामानंद सागर की 'रामायण' (1987) का सड़सठवां (67वां) एपिसोड नागपाश से मुक्त होने के बाद की घटनाओं और लक्ष्मण तथा लंका के सबसे खूंखार और मायावी योद्धा मेघनाद (इंद्रजीत) के बीच हुए एक और भयंकर महासंग्राम को बहुत ही ओजस्वी ढंग से प्रस्तुत करता है। पक्षिराज गरुड़ की कृपा से श्री राम और लक्ष्मण जब नागपाश के उस खौफनाक और जानलेवा बंधन से पूरी तरह मुक्त हो जाते हैं, तो पूरी वानर सेना में एक अभूतपूर्व उत्साह और जोश की लहर दौड़ जाती है। वानर "जय श्री राम" और "हर हर महादेव" के गगनभेदी जयकारे लगाने लगते हैं। यह शंखनाद इतना भयंकर होता है कि लंका के राजमहल में रावण और मेघनाद, जो अपनी जीत का जश्न मना रहे थे, सन्न रह जाते हैं। मेघनाद को अपनी आँखों और कानों पर विश्वास नहीं होता कि नागपाश जैसे अजेय अस्त्र से कोई इंसान कैसे बच सकता है। अपनी हार और अपमान से बौखलाया मेघनाद एक बार फिर युद्धभूमि में उतरता है। इस बार वह अपने क्रोध के चरम पर है। रणभूमि में उसका सामना एक बार फिर शेषनाग के अवतार वीर लक्ष्मण से होता है। लक्ष्मण और मेघनाद के बीच का यह युद्ध रामायण के सबसे हिंसक, आक्रामक और रोमांचक युद्धों में से एक है। दोनों ही योद्धा अपने-अपने दिव्यास्त्रों और शक्तियों का भरपूर उपयोग करते हैं। लक्ष्मण अपने तीखे और अचूक बाणों से मेघनाद के रथ और उसके घोड़ों को निशाना बनाते हैं। मेघनाद जानता है कि लक्ष्मण कोई साधारण योद्धा नहीं हैं और आमने-सामने के युद्ध (Direct Combat) में वह लक्ष्मण को नहीं हरा सकता। इसलिए वह एक बार फिर अपनी कायरतापूर्ण और मायावी शक्तियों का सहारा लेता है। वह बादलों के पीछे छिप जाता है और अदृश्य होकर लक्ष्मण और वानर सेना पर बाणों की बौछार करने लगता है। वह आकाश से अग्नि, पत्थर और जहरीले अस्त्र बरसाता है। लक्ष्मण अपनी दिव्य दृष्टि और धनुर्विद्या के कौशल से उसके कई मायावी अस्त्रों को बीच में ही काट देते हैं। युद्ध के चरम पर, मेघनाद जब देखता है कि लक्ष्मण उसके हर प्रहार को विफल कर रहे हैं, तो वह क्रोध में अपना सबसे घातक और अमोघ अस्त्र—'ब्रह्मशक्ति' (या 'वीरघातिनी शक्ति') निकालता है। यह शक्ति ब्रह्मा जी द्वारा दी गई एक ऐसी अचूक और प्रलयंकारी शक्ति है जिसका कोई काट नहीं है और जो अपने लक्ष्य को भेद कर ही वापस आती है। मेघनाद छिपकर यह अमोघ शक्ति लक्ष्मण की छाती पर छोड़ देता है। शक्ति सीधे लक्ष्मण के सीने में जाकर लगती है। लक्ष्मण एक भयंकर चीख के साथ खून से लथपथ होकर जमीन पर गिर पड़ते हैं और गहरी मूर्छा (कोमा) में चले जाते हैं। मेघनाद लक्ष्मण के निष्प्राण शरीर को अपने साथ लंका ले जाने का प्रयास करता है ताकि वह रावण को अपना शिकार दिखा सके, लेकिन वह अपने पूरे बल के बावजूद शेषनाग के अवतार लक्ष्मण के शरीर को जमीन से एक इंच भी नहीं हिला पाता। इसके बाद हनुमान जी आते हैं और मेघनाद को युद्ध में खदेड़कर लक्ष्मण को अपने हाथों में उठाकर श्री राम के पास ले जाते हैं। जब श्री राम अपने प्रिय भाई लक्ष्मण को खून से लथपथ और मूर्छित देखते हैं, तो उनका हृदय विदीर्ण हो जाता है। मर्यादा पुरुषोत्तम राम एक साधारण इंसान की तरह फूट-फूट कर रोने लगते हैं। यह एपिसोड एक भाई के गहरे वियोग, असीम पराक्रम और युद्ध की मायावी विभीषिका का एक बहुत ही भावुक और रुला देने वाला चित्रण है。
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Movie Details
Language
Hindi
Category
ramayan
Duration
Episode 67 (Full Episode)
Release Year
1987
