Ramayan EP 68 - हनुमान का सुषेण वैद्य को लाना
Description
रामायण (1987) का अड़सठवां (68वां) एपिसोड श्री राम के असीम वियोग, एक भाई की तड़प और हनुमान जी की उस अलौकिक भक्ति व सेवा-भाव को दर्शाता है, जो असंभव को भी संभव कर देती है। मेघनाद की 'शक्ति' लगने के बाद लक्ष्मण जी युद्धभूमि में अचेत पड़े हैं। उनके शरीर से रक्त बह रहा है और उनकी सांसें धीरे-धीरे उखड़ने लगी हैं। जब हनुमान जी लक्ष्मण को उठाकर श्री राम के पास लाते हैं, तो पूरे वानर शिविर में मौत जैसा सन्नाटा और हाहाकार मच जाता है। श्री राम अपने प्राणों से प्रिय भाई लक्ष्मण का सिर अपनी गोद में रखकर फूट-फूट कर विलाप करते हैं। राम का यह विलाप इतना मार्मिक है कि वह किसी भी दर्शक की आँखों में आंसू ला देता है। राम रोते हुए कहते हैं, "हे लक्ष्मण! उठो, तुमने तो कभी मेरा दुख नहीं देखा। जब तुमने मेरे लिए अपने माता-पिता और पत्नी को त्याग दिया, तो मैं अयोध्या लौटकर माताओं और उर्मिला को क्या मुँह दिखाऊंगा? मैं सीता के बिना तो जीवित रह सकता हूँ, लेकिन तुम्हारे बिना मेरा जीवन व्यर्थ है।" राम का यह प्रलाप उस असीम भ्रातृ-प्रेम का प्रतीक है जो पूरी रामायण का मुख्य आधार है। इस भयंकर संकट की घड़ी में, लंका के भावी राजा विभीषण आगे आते हैं। विभीषण श्री राम को बताते हैं कि लंका में एक अत्यंत ज्ञानी और चमत्कारी वैद्य (Doctor) हैं, जिनका नाम 'सुषेण' है। केवल सुषेण वैद्य ही लक्ष्मण के प्राणों की रक्षा का उपाय बता सकते हैं। लेकिन समस्या यह है कि सुषेण वैद्य रावण के राजवैद्य हैं, और उन्हें लंका से राम के शिविर में लाना अत्यंत कठिन और खतरनाक कार्य है। श्री राम के परम भक्त हनुमान जी तुरंत इस कार्य का बीड़ा उठाते हैं। हनुमान जी अपने सूक्ष्म रूप में रात के अंधेरे में लंका में प्रवेश करते हैं। वे सुषेण वैद्य के घर पहुँचते हैं, लेकिन यह सोचकर कि वैद्य जी रावण के डर से शायद आने से मना कर दें, हनुमान जी एक अत्यंत अनोखा और चतुर उपाय निकालते हैं। हनुमान जी सुषेण वैद्य के पूरे घर (कुटिया) को जड़ से उखाड़ लेते हैं और सोते हुए सुषेण वैद्य को उनके घर सहित अपने हाथों पर उठाकर रातों-रात श्री राम के शिविर में ले आते हैं। जब सुषेण वैद्य की नींद खुलती है और वे खुद को राम के शिविर में पाते हैं, तो वे आश्चर्यचकित रह जाते हैं। शुरुआत में वे रावण के भय से लक्ष्मण का इलाज करने से मना करते हैं। लेकिन श्री राम की विनम्रता, उनके ईश्वरीय तेज और वैद्य धर्म की दुहाई देने पर, सुषेण वैद्य का हृदय पिघल जाता है। सुषेण वैद्य लक्ष्मण की नाड़ी की जाँच करते हैं और एक अत्यंत चिंताजनक सच्चाई बताते हैं। वे कहते हैं कि लक्ष्मण के प्राणों की रक्षा केवल हिमालय के द्रोणागिरी (Dronagiri) पर्वत पर पाई जाने वाली 'संजीवनी' और अन्य तीन विशेष जड़ी-बूटियों से ही हो सकती है। और सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे जड़ी-बूटियां कल सूर्योदय (Sunrise) से पहले आ जानी चाहिए; यदि सूर्योदय हो गया, तो लक्ष्मण के प्राण किसी भी कीमत पर नहीं बचेंगे। आधी रात बीत चुकी है और हिमालय यहाँ से हजारों मील (योजन) दूर है। इतने कम समय में इतनी दूर जाना और वापस आना किसी भी साधारण मनुष्य या देवता के बस की बात नहीं है। इस अत्यंत तनावपूर्ण और निराशाजनक क्षण में, श्री राम की सारी उम्मीदें केवल और केवल अपने संकटमोचन हनुमान जी पर टिक जाती हैं। हनुमान जी अपने प्रभु राम को वचन देते हैं कि वे सूर्योदय से पहले संजीवनी बूटी लेकर अवश्य लौटेंगे। यह एपिसोड हनुमान जी की तीव्र गति, निष्ठा और भक्ति के उस महान अध्याय की शुरुआत करता है जिसने उन्हें अमर बना दिया।
Leave a Comment
Movie Details
Language
Hindi
Category
ramayan
Duration
Episode 68 (Full Episode)
Release Year
1987
