Ramayan EP 70 - मेघनाद यज्ञ विध्वंस
Description
रामायण (1987) का सत्तरवां (70वां) एपिसोड अंधकार, मायावी शक्तियों और धर्म-अधर्म के एक बहुत ही भयंकर टकराव की कहानी प्रस्तुत करता है। हनुमान जी द्वारा लाए गए संजीवनी पर्वत और सुषेण वैद्य के इलाज से लक्ष्मण जी न केवल मृत्यु के मुँह से वापस लौट आए हैं, बल्कि उनके भीतर एक नया और प्रलयंकारी तेज भी उत्पन्न हो गया है। जब लंकापति रावण और मेघनाद को यह समाचार मिलता है कि लक्ष्मण जीवित हो गए हैं और वानर सेना में एक बार फिर से जोश भर गया है, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक जाती है। मेघनाद (इंद्रजीत), जो अब तक खुद को अजेय मानता था, पहली बार अपने भीतर डर और असुरक्षा महसूस करता है。 मेघनाद समझ जाता है कि श्री राम और लक्ष्मण साधारण इंसान नहीं हैं और उन्हें केवल युद्ध के मैदान में हराना अब असंभव है। इसलिए, वह एक अत्यंत खौफनाक और अघोरी योजना बनाता है। मेघनाद अपनी कुलदेवी 'निकुम्भिला भवानी' का एक अत्यंत गुप्त, मायावी और तामसिक यज्ञ शुरू करता है। यह कोई साधारण यज्ञ नहीं है; इस यज्ञ में काले जादू (Black Magic), रक्त और बलि का प्रयोग किया जा रहा है। यदि यह यज्ञ सफलतापूर्वक पूर्ण हो गया, तो निकुम्भिला देवी प्रसन्न होकर मेघनाद को एक ऐसा अजेय रथ और कुछ ऐसे दिव्यास्त्र प्रदान करेंगी, जिनके सामने स्वयं त्रिमूर्ति (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) भी टिक नहीं पाएंगे, और तब मेघनाद को मारना पूरी तरह से असंभव हो जाएगा। इधर, श्री राम के शिविर में विभीषण को अपने गुप्तचरों के माध्यम से मेघनाद के इस तांत्रिक यज्ञ की सूचना मिल जाती है। विभीषण श्री राम को आगाह करते हैं कि यदि मेघनाद का यह यज्ञ पूरा हो गया, तो वह अजेय हो जाएगा और हमारी पूरी सेना का विनाश कर देगा। विभीषण यह भी बताते हैं कि इस यज्ञ की एक शर्त यह है कि इसे पूर्ण मौन और एकाग्रता के साथ करना होता है; यदि कोई इस यज्ञ को बीच में भंग कर दे, तो मेघनाद का सर्वनाश निश्चित है। विभीषण राम से कहते हैं कि मेघनाद का वध केवल वही इंसान कर सकता है जिसने 14 वर्षों तक नींद, भोजन और स्त्री सुख का त्याग किया हो, और वह व्यक्ति केवल और केवल लक्ष्मण हैं। श्री राम की आज्ञा पाकर, लक्ष्मण जी अंगद, हनुमान, जाम्बवंत और पूरी वानर सेना के साथ निकुम्भिला देवी के उस गुप्त गुफा (या मंदिर) की ओर प्रस्थान करते हैं जहाँ मेघनाद यज्ञ कर रहा है। जब वानर सेना वहाँ पहुँचती है, तो वे देखते हैं कि मेघनाद आंखें बंद किए हुए घोर तांत्रिक ध्यान में लीन है और उसके चारों ओर राक्षसों का भारी पहरा है। वानर सेना तुरंत राक्षसों पर हमला कर देती है और एक भयंकर हाथापाई शुरू हो जाती है। अंगद और हनुमान जी यज्ञ की सामग्रियों को तहस-नहस करना शुरू कर देते हैं। वे यज्ञ कुंड की अग्नि को बुझा देते हैं, मूर्तियों को तोड़ देते हैं और यज्ञ के पात्रों को नष्ट कर देते हैं। वानर जानबूझकर मेघनाद को उकसाने के लिए उसके चारों ओर शोर मचाते हैं और उसका उपहास करते हैं। काफी देर तक मेघनाद अपने ध्यान को केंद्रित रखने की कोशिश करता है, लेकिन जब वानरों का उपद्रव बर्दाश्त से बाहर हो जाता है और वे उस पर शारीरिक प्रहार करने लगते हैं, तो मेघनाद का क्रोध ज्वालामुखि की तरह भड़क उठता है। वह अपना ध्यान तोड़ देता है और हाथ में हथियार लेकर वानरों पर टूट पड़ता है। यज्ञ के बीच में ही भंग हो जाने के कारण, मेघनाद को निकुम्भिला देवी से वह अजेय रथ और अस्त्र प्राप्त नहीं हो पाते। उसकी सारी मेहनत और मायावी योजनाएं मिट्टी में मिल जाती हैं। यह एपिसोड बुराई के खिलाफ रणनीति, गुप्तचर व्यवस्था के महत्व और इस सत्य का परिचायक है कि अधर्म के कार्य में ईश्वर कभी भी सफलता नहीं देते। अब मेघनाद और लक्ष्मण के बीच अंतिम महासंग्राम की भूमिका पूरी तरह से तैयार हो चुकी है।
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Movie Details
Language
Hindi
Category
ramayan
Duration
Episode 70 (Full Episode)
Release Year
1987
