Ramayan EP 72 - युद्ध के लिए प्रस्थान
Description
रामानंद सागर की 'रामायण' (1987) का बहत्तरवां (72वां) एपिसोड लंका के राजमहल में पसरे एक अत्यंत गहरे और अंधकारमयी शोक, और रावण के उस खौफनाक और अंतिम युद्ध-प्रस्थान की कहानी है जो इतिहास के पन्नों में अमर होने वाला है। लंका के सबसे अजेय, मायावी और त्रिलोक-विजयी योद्धा, मेघनाद (इंद्रजीत) के वध का समाचार जब रावण के कानों में पड़ता है, तो लंकापति रावण का सारा अहंकार एक पल के लिए टूट जाता है। जो रावण कभी किसी की मृत्यु पर विचलित नहीं हुआ, वह अपने सबसे प्रिय और वीर पुत्र के कटे हुए सिर को देखकर एक साधारण पिता की तरह फूट-फूट कर रोने लगता है। राजमहल का कोना-कोना मंदोदरी और सुलोचना (मेघनाद की पत्नी) के चीत्कार से गूंज उठता है। मंदोदरी एक बार फिर रावण को समझाती है कि अभी भी समय है, सीता को लौटाकर वह अपने और लंका के बचे-खुचे अस्तित्व को बचा ले, लेकिन रावण का अहंकार उसके पुत्र-शोक पर हावी हो जाता है। पुत्र की मृत्यु से रावण के भीतर क्रोध का एक ऐसा भयंकर ज्वालामुखी फटता है जिसे अब कोई नहीं शांत कर सकता। वह सीता को मारने के लिए दौड़ता है, लेकिन उसके मंत्री सुपार्श्व उसे रोक लेते हैं और कहते हैं कि एक शूरवीर को युद्धभूमि में अपने शत्रु का वध करना चाहिए, न कि एक निहत्थी और बंदी स्त्री का। रावण अपना इरादा बदल देता है और सेनापतियों को आदेश देता है कि लंका की पूरी बची हुई सैन्य शक्ति को युद्ध के मैदान में झोंक दिया जाए। रावण को युद्ध के लिए सजाया जाता है। उसे वे अभेद्य कवच पहनाए जाते हैं जिन्हें स्वयं देवताओं ने भी कभी नहीं भेदा था। जब रावण अपने उस अत्यंत विशालकाय, जादुई और खौफनाक रथ पर सवार होकर रणभूमि की ओर निकलता है, तो उसके रथ के पहियों की गड़गड़ाहट और लाखों राक्षसों के सिंहनाद से पूरी धरती कांप उठती है। रावण का यह प्रस्थान कोई साधारण प्रस्थान नहीं है; यह बुराई के सबसे बड़े प्रतीक का अपने सर्वनाश की ओर उठाया गया अंतिम कदम है। दूसरी ओर, श्री राम और वानर सेना रावण के इस भयंकर रूप का सामना करने के लिए पूर्णतः तैयार हैं। यह एपिसोड रावण के अहंकार, उसके अंधेपन और उस प्रलयंकारी तूफान से ठीक पहले के माहौल को बहुत ही भव्यता से प्रस्तुत करता है, जिसने लंका के विनाश की अंतिम रूपरेखा तैयार कर दी है।
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Movie Details
Language
Hindi
Category
ramayan
Duration
Episode 72 (Full Episode)
Release Year
1987
