Ramayan EP 73 - रावण का हनुमान और लक्ष्मण से युद्ध
Description
रामायण (1987) का तिहत्तरवां (73वां) एपिसोड युद्धभूमि में लंकापति दशानन रावण के उस प्रलयंकारी तांडव और श्री राम के वीर सेवकों (हनुमान और लक्ष्मण) के अदम्य साहस और पराक्रम का अत्यंत रोमांचक चित्रण है। जब रावण अपने विशाल रथ पर सवार होकर रणभूमि में प्रवेश करता है, तो उसके क्रोध और उसके बाणों की गति के सामने वानर सेना तिनके की तरह उड़ने लगती है। सुग्रीव, अंगद, नल और नील जैसे महान योद्धा भी रावण के सामने टिक नहीं पाते। रावण के इस भयंकर संहार को रोकने के लिए सबसे पहले पवनपुत्र हनुमान जी आगे आते हैं। रावण और हनुमान जी के बीच एक अत्यंत ही अद्भुत और आक्रामक द्वंद्व होता है। हनुमान जी एक ही छलांग में रावण के रथ पर पहुँच जाते हैं और रावण की छाती पर एक जोरदार घूंसा (मुष्टि-प्रहार) मारते हैं। इस प्रहार से त्रिलोक-विजयी रावण भी चकरा जाता है और रथ में गिर पड़ता है। होश में आने पर रावण हनुमान जी के बल की प्रशंसा करता है, लेकिन हनुमान जी उसे धिक्कारते हैं और कहते हैं कि धिक्कार है उनके बल को जो अब तक रावण जीवित है। हनुमान जी के बाद, रावण का सामना शेषनाग के अवतार वीर लक्ष्मण से होता है। लक्ष्मण और रावण के बीच तीरों की भयंकर वर्षा होती है। लक्ष्मण रावण के कई दिव्यास्त्रों को बीच में ही काट देते हैं और उसके सारथी तथा घोड़ों को घायल कर देते हैं। जब रावण देखता है कि वह लक्ष्मण को सामान्य अस्त्रों से नहीं हरा सकता, तो वह क्रोध में आकर मय दानव द्वारा दी गई एक अत्यंत शक्तिशाली और प्राणघातक 'शक्ति' (ब्रह्मशक्ति) लक्ष्मण की छाती पर छोड़ देता है। यह अमोघ शक्ति इतनी भयंकर है कि यह लक्ष्मण के सीने को चीर देती है और वे मूर्छित होकर जमीन पर गिर पड़ते हैं। रावण लक्ष्मण के शरीर को उठाकर अपने साथ ले जाने का प्रयास करता है, लेकिन वह अपने पूरे बल के बावजूद शेषनाग के अवतार लक्ष्मण को एक इंच भी नहीं हिला पाता। अंततः हनुमान जी आते हैं और लक्ष्मण को उठाकर श्री राम के पास ले जाते हैं। यह एपिसोड बुराई की ताकत और अच्छाई के संघर्ष का बहुत ही सजीव और तनावपूर्ण दृश्य पेश करता है, और अंततः राम को स्वयं युद्धभूमि में उतरने के लिए विवश कर देता है।
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Movie Details
Language
Hindi
Category
ramayan
Duration
Episode 73 (Full Episode)
Release Year
1987
