Ramayan EP 74 - इंद्र का श्री राम के लिए रथ भेजना
Description
रामायण (1987) का चौहत्तरवां (74वां) एपिसोड उस महासंग्राम के सबसे बड़े और भव्य मोड़ को प्रस्तुत करता है, जब साक्षात ईश्वर और सबसे बड़े राक्षस के बीच आमना-सामना होता है। रावण द्वारा लक्ष्मण पर शक्ति का प्रयोग किए जाने के बाद श्री राम का धैर्य और उनकी सौम्यता एक प्रलयंकारी क्रोध में बदल जाती है। वे रावण का अंत करने के लिए स्वयं युद्धभूमि में उतरते हैं। लेकिन यहाँ एक बहुत बड़ा असंतुलन (Imbalance) दिखाई देता है—रावण एक अत्यंत विशाल, जादुई और सुरक्षित रथ पर सवार है, जबकि त्रिलोकीनाथ श्री राम नंगे पैर जमीन पर खड़े होकर युद्ध कर रहे हैं। देवलोक से इस युद्ध को देख रहे देवता और विशेषकर देवराज इंद्र इस अनुचित युद्ध को देखकर अत्यंत चिंतित हो उठते हैं। अपने आराध्य की सहायता और धर्म की रक्षा के लिए, देवराज इंद्र तुरंत अपना सबसे दिव्य, अजेय और स्वर्ण जड़ित रथ श्री राम के लिए रणभूमि में भेजते हैं। इस रथ के साथ इंद्र के सबसे कुशल सारथी 'मातलि', इंद्र का अभेद्य कवच, और अत्यंत शक्तिशाली दिव्यास्त्र भी आते हैं। मातलि श्री राम के पास रथ लेकर पहुँचते हैं और हाथ जोड़कर उनसे इस देव-रथ पर सवार होने की प्रार्थना करते हैं। श्री राम अत्यंत विनम्रता और सम्मान के साथ उस कवच को धारण करते हैं और रथ पर आरूढ़ होते हैं। रथ पर सवार होते ही श्री राम का तेज करोड़ों सूर्यों के समान चमकने लगता है। अब शुरू होता है राम और रावण के बीच वह ऐतिहासिक महायुद्ध, जिसकी गूंज से तीनों लोक कांप उठते हैं। दोनों के रथ एक-दूसरे के सामने होते हैं और दोनों महाबली योद्धा एक-दूसरे पर आग्नेयास्त्र, वरुणास्त्र, गंधर्वास्त्र और ब्रह्मास्त्र जैसे विनाशकारी अस्त्रों का प्रयोग करते हैं। जब रावण अग्नि बाण छोड़ता है, तो राम जल बाण से उसे बुझा देते हैं; जब रावण अंधकार फैलाता है, तो राम सूर्य बाण से प्रकाश कर देते हैं। रावण अपनी माया से कई भ्रम पैदा करता है, लेकिन राम के प्रताप के आगे कोई भी माया टिक नहीं पाती। यह युद्ध केवल दो शरीर का नहीं, बल्कि सत्य और असत्य, प्रकाश और अंधकार का परम युद्ध है। इस एपिसोड का हर एक दृश्य विजुअली और भावनात्मक रूप से रोंगटे खड़े कर देने वाला है।
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Movie Details
Language
Hindi
Category
ramayan
Duration
Episode 74 (Full Episode)
Release Year
1987
