Ramayan EP 75 - रावण वध | सर्वत्र जयध्वनि
Description
रामायण (1987) का पचहत्तरवां (75वां) एपिसोड पूरे रामायण महाकाव्य का चरमोत्कर्ष (Climax) और सबसे बहुप्रतीक्षित प्रसंग है—'रावण वध'। श्री राम और रावण के बीच यह महायुद्ध कई दिनों और कई रातों तक लगातार चलता रहता है। राम अपने अचूक बाणों से रावण के सिरों को और उसकी भुजाओं को बार-बार काट देते हैं, लेकिन ब्रह्मा जी के वरदान के कारण, जैसे ही रावण का सिर कटकर जमीन पर गिरता है, उसकी जगह तुरंत एक नया सिर उग आता है। यह चमत्कार देखकर देवता, वानर सेना और स्वयं श्री राम भी कुछ क्षण के लिए आश्चर्य में पड़ जाते हैं कि आखिर इस पापी का अंत कैसे होगा? जब युद्ध का कोई निर्णय निकलता नहीं दिखता, तब रावण का छोटा भाई विभीषण, जो रावण के हर रहस्य को जानता है, श्री राम के पास आता है। विभीषण भारी मन से श्री राम को वह सबसे बड़ा राज बताता है कि रावण की मृत्यु उसके सिर या भुजाओं के कटने से नहीं होगी, क्योंकि रावण की नाभि (Navel) में अमृत का कुंड स्थापित है। जब तक वह अमृत नहीं सूखेगा, रावण अमर रहेगा। विभीषण का यह रहस्योद्घाटन सुनते ही श्री राम अपने कोदंड धनुष पर एक अत्यंत प्रलयंकारी 'ब्रह्मास्त्र' का संधान करते हैं। वे सूर्य देव और भगवान ब्रह्मा का स्मरण करते हुए उस अमोघ बाण को रावण की नाभि पर लक्ष्य करके छोड़ देते हैं। वह अग्निबाण बिजली की गति से जाकर रावण की नाभि में लगता है और वहां मौजूद सारा अमृत सोख लेता है। इसके तुरंत बाद श्री राम के अन्य बाण रावण के सिरों और उसकी छाती को छलनी कर देते हैं। अपने प्राणों का अंत करीब देखकर रावण एक भयंकर और कानफोड़ू चीख मारता है और अपने विशाल रथ से जमीन पर गिर पड़ता है। उसका मुकुट धूल में मिल जाता है और उसकी जीवन लीला समाप्त हो जाती है। रावण के गिरते ही आकाश से देवता पुष्प वर्षा करने लगते हैं, गंधर्व मंगल गान गाते हैं और पूरी वानर सेना "सियावर रामचंद्र की जय" के नारों से धरती और आकाश को गुंजा देती है। प्रकृति शांत हो जाती है और त्रिलोक को रावण के आतंक से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाती है। यह एपिसोड अहंकार के सबसे बड़े प्रतीक के पतन और धर्म की अंतिम विजय का सबसे भव्य और संतोषजनक चित्रण है।
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Movie Details
Language
Hindi
Category
ramayan
Duration
Episode 75 (Full Episode)
Release Year
1987
