Ramayan EP 76 - रावण की अन्त्येष्टि| विभीषण राज्याभिषेक
Description
रामायण (1987) का छिहत्तरवां (76वां) एपिसोड युद्ध की समाप्ति के बाद की शांति, शोक, प्रायश्चित और एक नए युग (रामराज्य) की शुरुआत की कहानी है। रावण के विशाल और निष्प्राण शरीर को रणभूमि में देखकर लंका के राजमहल में हाहाकार मच जाता है। महारानी मंदोदरी और अन्य रानियां विलाप करती हुई युद्धभूमि में आती हैं। मंदोदरी अपने पति के शव से लिपट कर फूट-फूट कर रोती है और विलाप करते हुए कहती है कि उसने पहले ही रावण को चेताया था कि श्री राम साक्षात नारायण हैं, लेकिन उसके अहंकार ने पूरे कुल का नाश कर दिया। विभीषण, जो अपने सगे बड़े भाई की इस दुर्दशा को देखकर अत्यंत दुखी हैं, शुरुआत में रावण का अंतिम संस्कार करने से झिझकते हैं, क्योंकि रावण ने जीवन भर केवल पाप और अधर्म किया था। लेकिन यहाँ मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम दुनिया को एक बहुत बड़ा संदेश देते हैं। राम विभीषण से कहते हैं, "मरणान्तानि वैराणि" (मृत्यु के साथ ही सारी दुश्मनी और वैर समाप्त हो जाता है)। राम कहते हैं कि रावण एक महान पंडित, शिव भक्त और शक्तिशाली राजा था, इसलिए उसका अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान और वैदिक रीति-रिवाजों के साथ होना चाहिए। विभीषण भारी मन से अपने भाई को मुखाग्नि देते हैं और लंका के इस सबसे प्रतापी राजा की देह राख में बदल जाती है। इसके पश्चात, श्री राम के आदेश पर लक्ष्मण जी लंका के राजमहल में जाते हैं और विभीषण को लंका का नया राजा घोषित कर उनका विधि-विधान से 'राज्याभिषेक' (Coronation) करते हैं। लंका की प्रजा को एक न्यायप्रिय और धर्मपरायण शासक मिल जाता है। इसी एपिसोड में माता सीता और श्री राम का बहुप्रतीक्षित पुनर्मिलन भी होता है। इसी दौरान माता सीता की 'अग्नि परीक्षा' (Agni Pariksha) का वह अत्यंत भावुक और अलौकिक दृश्य भी प्रस्तुत किया जाता है, जहाँ माता सीता अग्नि देव के साक्षात प्रमाण के साथ अपनी पवित्रता और पातिव्रत्य को तीनों लोकों के सामने सिद्ध करती हैं। यह एपिसोड बुराई के पूरी तरह से खत्म होने और पवित्रता के विजय की एक अत्यंत मार्मिक दास्तान है।
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Movie Details
Language
Hindi
Category
ramayan
Duration
Episode 76 (Full Episode)
Release Year
1987
