Ramayan EP 77 - श्री राम की अयोध्या वापसी
Description
रामायण (1987) का सतहत्तरवां (77वां) एपिसोड वियोग के अंत और उस बहुप्रतीक्षित घर वापसी (Homecoming) का अत्यंत आनंदमय और भावुक प्रसंग है, जिसकी प्रतीक्षा पूरी अयोध्या 14 वर्षों से कर रही थी। लंका में विभीषण का राज्याभिषेक संपन्न हो चुका है और माता सीता अपनी पवित्रता सिद्ध कर श्री राम के वामांग में विराजमान हो चुकी हैं। अब वनवास के 14 वर्ष पूरे होने में केवल एक दिन शेष है। श्री राम को याद आता है कि उनके अनुज भरत ने प्रतिज्ञा की थी कि यदि 14 वर्ष पूर्ण होने के अगले ही दिन राम अयोध्या नहीं पहुंचे, तो वे जलती हुई चिता में प्रवेश कर अपने प्राण त्याग देंगे। समय की कमी को देखते हुए, लंकापति विभीषण श्री राम की सेवा में रावण का 'पुष्पक विमान' (Pushpak Viman) प्रस्तुत करते हैं, जो मन की गति से उड़ सकता है। श्री राम, माता सीता, लक्ष्मण, हनुमान, सुग्रीव, जाम्बवंत, विभीषण और पूरी वानर सेना के कुछ प्रमुख वीर इस दिव्य विमान में सवार होकर अयोध्या की ओर प्रस्थान करते हैं। आकाश मार्ग से लौटते हुए श्री राम माता सीता को वे सभी स्थान दिखाते हैं जहाँ से वे वनवास के दौरान गुजरे थे—रणभूमि, रामसेतु, किष्किंधा, पम्पा सरोवर, और महर्षि भारद्वाज का आश्रम। यह दृश्य उन सभी कठिनाइयों और संघर्षों का एक सुंदर पुनरावलोकन (Recap) है जो उन्होंने सहे थे। इधर अयोध्या के पास नंदीग्राम में, 14 वर्ष पूरे होने की अंतिम रात भरत के लिए किसी युग के समान बीत रही है। भरत ने चिता सजा ली है और प्राण त्यागने की तैयारी कर रहे हैं। श्री राम को इस बात का आभास हो जाता है, इसलिए वे हनुमान जी को मानव रूप में पहले ही नंदीग्राम भेज देते हैं। जैसे ही भरत चिता में प्रवेश करने वाले होते हैं, हनुमान जी आकर उन्हें राम के आने का शुभ समाचार देते हैं। यह समाचार सुनकर भरत की आंखों से अविरल अश्रुधारा बहने लगती है और नंदीग्राम से लेकर अयोध्या तक खुशियों का महासागर उमड़ पड़ता है। यह एपिसोड प्रेम, प्रतीक्षा और वचन पालन की सबसे उत्कृष्ट गाथा है।
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Movie Details
Language
Hindi
Category
ramayan
Duration
Episode 77 (Full Episode)
Release Year
1987
