Ramayan EP 78 - श्री राम का अपने परिवार से भेंट
Description
रामानंद सागर की 'रामायण' (1987) का अठहत्तरवां (78वां) और इस मुख्य कथा का अंतिम एपिसोड, भारतीय टेलीविजन और सांस्कृतिक इतिहास का सबसे सुखद, भव्य और आंसुओं से भिगो देने वाला अध्याय है—'भरत मिलाप और श्री राम राज्याभिषेक'। पुष्पक विमान जब अयोध्या की सीमा में उतरता है, तो पूरी अयोध्या नगरी अपने प्रभु के स्वागत के लिए पलकें बिछाए खड़ी होती है। आसमान से फूलों की बारिश हो रही है, शंख और नगाड़े बज रहे हैं, और हर तरफ केवल "सियावर रामचंद्र की जय" की गूंज है। जब श्री राम विमान से उतरते हैं, तो सबसे पहले उनका सामना नंदीग्राम में तपस्वी वेश में खड़े भरत से होता है। 14 वर्षों के वियोग के बाद दोनों भाइयों का यह मिलन ('भरत मिलाप') इतना मार्मिक और शक्तिशाली है कि इसे देखकर देवता भी स्वर्ग से फूल बरसाते हैं और हर दर्शक की आंखें आंसुओं से नम हो जाती हैं। राम भरत को उठाकर अपने हृदय से लगा लेते हैं। इसके बाद श्री राम माताओं—कौशल्या, सुमित्रा और विशेष रूप से माता कैकेयी—से मिलते हैं। राम माता कैकेयी को उसी सम्मान के साथ गले लगाते हैं, जिससे यह सिद्ध होता है कि उनके हृदय में किसी के लिए कोई मैल नहीं है। चारों भाई अपने राजसी वस्त्र धारण करते हैं और माता सीता के साथ एक भव्य रथ पर सवार होकर अयोध्या में प्रवेश करते हैं। पूरी अयोध्या को दुल्हन की तरह सजाया गया है, और इसी दिन को 'दीपावली' (Diwali) के रूप में मनाया जाता है। गुरु वशिष्ठ के शुभ मुहूर्त में राजमहल के भव्य दरबार में श्री राम का 'राज्याभिषेक' (Coronation) संपन्न होता है। गुरु वशिष्ठ राम को राजमुकुट पहनाते हैं और माता सीता उनके साथ सिंहासन पर विराजमान होती हैं। शिव, ब्रह्मा और अन्य देवता आकाश से उनकी स्तुति करते हैं। इसी के साथ 'रामराज्य' (Ram Rajya) की स्थापना होती है—एक ऐसा राज्य जहाँ कोई दुःख नहीं, कोई रोग नहीं, कोई भेदभाव नहीं, और हर तरफ केवल प्रेम, न्याय और सत्य का शासन है। यह एपिसोड रामायण का एक आदर्श और अत्यंत संतोषजनक समापन है, जो मानवता को सदियों तक धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता रहेगा।
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Movie Details
Language
Hindi
Category
ramayan
Duration
Episode 78 (Full Episode)
Release Year
1987
