Mahabharat EP 1 - युधिष्ठिर को युवराज घोषित करना | महाभारत एक धर्म युद्ध

Mahabharat EP 1 - युधिष्ठिर को युवराज घोषित करना | महाभारत एक धर्म युद्ध

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Mahabharat EP 1 - युधिष्ठिर को युवराज घोषित करना | महाभारत एक धर्म युद्ध

9.5
Episode 1
1988
HDMythologyDramaHistory

Description

बी. आर. चोपड़ा कृत 'महाभारत' (1988) का यह एपिसोड हस्तिनापुर के सिंहासन के उत्तराधिकार और उसके कारण उत्पन्न हुए ईर्ष्या, धर्म-संकट और राजनीति के गहरे बीजों को अत्यंत प्रभावपूर्ण ढंग से दर्शाता है। पाण्डु के निधन के पश्चात उनके ज्येष्ठ पुत्र युधिष्ठिर स्वाभाविक और धर्मसम्मत रूप से हस्तिनापुर के राजसिंहासन के असली उत्तराधिकारी हैं। युधिष्ठिर न केवल ज्येष्ठ हैं, बल्कि वे धर्म, ज्ञान, सत्य और प्रजा-प्रेम की साक्षात मूर्ति हैं। हस्तिनापुर की प्रजा उन्हें अपने भावी सम्राट के रूप में पूजती है। कुलगुरु कृपाचार्य, महात्मा विदुर और पितामह भीष्म जैसे कुरुवंश के सबसे वरिष्ठ और ज्ञानी सदस्य भी यह भली-भांति जानते हैं कि युधिष्ठिर ही इस विशाल साम्राज्य को धर्म के मार्ग पर ले जा सकते हैं। इस एपिसोड में हस्तिनापुर के राजदरबार में एक अत्यंत महत्वपूर्ण सभा का आयोजन होता है, जिसमें महाराज धृतराष्ट्र, अपने मन की ईर्ष्या और पुत्र-मोह को दबाते हुए, भारी मन से युधिष्ठिर को हस्तिनापुर का 'युवराज' (Crown Prince) घोषित करते हैं। लेकिन यह घोषणा दुर्योधन के हृदय में एक भयंकर ज्वालामुखी को जन्म दे देती है। दुर्योधन, जो बचपन से ही यह मानता आया है कि हस्तिनापुर का सिंहासन केवल उसका जन्मसिद्ध अधिकार है (क्योंकि वह महाराज धृतराष्ट्र का ज्येष्ठ पुत्र है), इस निर्णय से तिलमिला उठता है। उसे ऐसा प्रतीत होता है मानो उसके हाथों से उसका पूरा भविष्य छीन लिया गया हो। वह अत्यंत हताश और क्रोधित होकर अपने मामा शकुनि के पास जाता है। शकुनि, जो गांधार का राजा है और जिसके जीवन का एकमात्र उद्देश्य कुरुवंश का सर्वनाश करना है, दुर्योधन के इस घाव पर नमक छिड़कने का काम करता है। शकुनि दुर्योधन के कानों में यह जहर घोलता है कि यदि आज युधिष्ठिर राजा बन गया, तो कल उसके पुत्र राजा बनेंगे, और कौरवों को जीवन भर पांडवों का दास बनकर रहना पड़ेगा। इस एपिसोड में धृतराष्ट्र का 'पुत्र-मोह' भी बहुत गहराई से उभर कर सामने आता है। धृतराष्ट्र शारीरिक रूप से ही नहीं, बल्कि अपने पुत्र के प्रेम में मानसिक रूप से भी अंधे हो चुके हैं। वे जानते हैं कि दुर्योधन अधर्म के मार्ग पर है, लेकिन वे अपनी विवशता के कारण उसे रोक नहीं पाते। यह एपिसोड उस महान राजनीतिक और पारिवारिक संघर्ष की नींव रखता है जो अंततः कुरुक्षेत्र के विनाशकारी युद्ध में परिवर्तित होने वाला है। युधिष्ठिर का राज्याभिषेक कौरवों की ईर्ष्या की आग में घी का काम करता है।

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Movie Details

Language

Hindi

Category

mahabharat

Duration

Episode 1

Release Year

1988

Mahabharat EP 1 - युधिष्ठिर को युवराज घोषित करना | महाभारत एक धर्म युद्ध
HD
9.5

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