Mahabharat EP 9 - पांडव पहुँचे द्रौपदी के स्वयंवर में | महाभारत एक धर्म युद्ध

Mahabharat EP 9 - पांडव पहुँचे द्रौपदी के स्वयंवर में | महाभारत एक धर्म युद्ध

0:00 / 0:00

Mahabharat EP 9 - पांडव पहुँचे द्रौपदी के स्वयंवर में | महाभारत एक धर्म युद्ध

9.5
Episode 9
1988
HDMythologyDramaHistory

Description

महाभारत का नौवां (9वां) एपिसोड एक नई दिशा, नई उम्मीद और एक अत्यंत भव्य आयोजन—'द्रौपदी स्वयंवर'—की शुरुआत करता है। बकासुर का वध करने और एकचक्र नगरी को उसके आतंक से मुक्त करने के बाद, पांडव आगे की यात्रा पर निकलते हैं। मार्ग में उनकी भेंट अपने पितामह, भगवान वेदव्यास जी से होती है। महर्षि व्यास पांडवों को उनके उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद देते हैं और उन्हें 'पांचाल' (काम्पिल्य नगरी) जाने की सलाह देते हैं। वे बताते हैं कि पांचाल नरेश महाराज द्रुपद ने अपनी अग्नि से उत्पन्न हुई अयोनिजा पुत्री—'द्रौपदी' (पांचाली)—के विवाह के लिए एक अत्यंत कठिन और ऐतिहासिक स्वयंवर का आयोजन किया है। व्यास जी यह भविष्यवाणी भी करते हैं कि द्रौपदी का जन्म ही पांडवों के जीवन से जुड़ने के लिए हुआ है。 महर्षि व्यास की आज्ञा मानकर, पांचों पांडव और माता कुंती अभी भी निर्धन ब्राह्मणों के भेष में पांचाल नगरी पहुँचते हैं। वे नगर के एक कुम्हार के घर में साधारण तरीके से अपना डेरा डालते हैं ताकि किसी को उनकी असली पहचान (क्षत्रियों/राजकुमारों) का पता न चले। अगले दिन, पांचों भाई एक साथ उस विशाल रंगभूमि (स्वयंवर सभा) में प्रवेश करते हैं और वहां बैठे हज़ारों ब्राह्मणों की भीड़ में जाकर चुपचाप बैठ जाते हैं। स्वयंवर का वह मंच और वह सभा इतनी भव्य है कि उसे देखकर देवताओं का दरबार भी फीका लगे। भारतवर्ष के कोने-कोने से बड़े-बड़े चक्रवर्ती सम्राट, शूरवीर और राजकुमार वहां पधारे हैं। सभा में दुर्योधन, दुशासन, कर्ण, शल्य और जरासंध जैसे दिग्गज योद्धा अपने अहंकार और ताकत के साथ अपने-अपने आसनों पर विराजमान हैं। मंच के बीचों-बीच एक अत्यंत भारी और दिव्य शिव धनुष रखा है। ऊपर आसमान में एक बहुत बड़ा चक्र घूम रहा है, जिसके बीच में एक लकड़ी की मछली लटकी हुई है, और नीचे एक खौलते हुए तेल का कड़ाह रखा है। सभा में मुख्य अतिथि के रूप में द्वारिकाधीश भगवान श्री कृष्ण और उनके बड़े भाई बलराम भी पधारे हैं। भगवान श्री कृष्ण की दिव्य दृष्टि पूरी सभा को स्कैन करती है। जब उनकी नजर ब्राह्मणों की भीड़ में बैठे पांचों पांडवों (विशेषकर अर्जुन और युधिष्ठिर) पर पड़ती है, तो श्री कृष्ण के चेहरे पर एक रहस्यमयी और मधुर मुस्कान आ जाती है। वे तुरंत पहचान जाते हैं कि उनके बुआ के बेटे (पांडव) न केवल जीवित हैं, बल्कि वे इसी स्वयंवर में मौजूद हैं। यह एपिसोड एक जबरदस्त सस्पेंस और उत्साह पैदा करता है। दर्शकों के मन में यह सवाल उठने लगता है कि क्या कोई क्षत्रिय इस असंभव लक्ष्य को भेद पाएगा, या ब्राह्मण के भेष में बैठा अर्जुन आज इतिहास रचेगा? राजसी ठाठ-बाट, कूटनीतिक हलचल और श्री कृष्ण की मुस्कान इस एपिसोड को एक परफेक्ट बिल्ड-अप (Build-up) बनाते हैं।

Leave a Comment

Movie Details

Language

Hindi

Category

mahabharat

Duration

Episode 9

Release Year

1988

Mahabharat EP 9 - पांडव पहुँचे द्रौपदी के स्वयंवर में | महाभारत एक धर्म युद्ध
HD
9.5

Share This Movie

You May Also Like

Mahabharat EP 1 - युधिष्ठिर को युवराज घोषित करना | महाभारत एक धर्म युद्ध

Mythology • Drama

Mahabharat EP 2 - लाक्षागृह के निर्माण की साज़िश | महाभारत एक धर्म युद्ध

Mythology • Drama

Mahabharat EP 3 - पांडव अपनी माता कुंती के साथ पहुँचे वारणाव्रत | महाभारत एक धर्म युद्ध

Mythology • Drama

Mahabharat EP 4 - लाक्षागृह से पांडवों को निकलने की योजना | महाभारत एक धर्म युद्ध

Mythology • Drama

Mahabharat EP 5 - लाक्षागृह जलकर हुआ राख | महाभारत एक धर्म युद्ध

Mythology • Drama

Mahabharat EP 6 - पांडवों के लाक्षागृह में मरने की फैली खबर | महाभारत एक धर्म युद्ध

Mythology • Drama

Mahabharat EP 7 - विदुर ने भीष्म को बताया पाण्डवों के जीवित होने का रहस्य | महाभारत एक धर्म युद्ध

Mythology • Drama

Mahabharat EP 8 - कुंती ने क्यों बनाया भीम को राक्षस का भोजन | महाभारत एक धर्म युद्ध

Mythology • Drama

Mahabharat EP 10 - द्रौपदी ने किया कर्ण को पति के रूप में अस्वीकार | महाभारत एक धर्म युद्ध

Mythology • Drama

Mahabharat EP 11 - अर्जुन ने भेदी मछली की आँख | महाभारत एक धर्म युद्ध

Mythology • Drama

Mahabharat EP 12 - पांडवों के जीवित होने के समाचार मिला धृतराष्ट्र को | महाभारत एक धर्म युद्ध

Mythology • Drama

Mahabharat EP 13 - श्री कृष्ण ने धृतराष्ट्र से माँगा पांडवों का अधिकार | महाभारत एक धर्म युद्ध

Mythology • Drama