
Mahabharat EP 8 - कुंती ने क्यों बनाया भीम को राक्षस का भोजन | महाभारत एक धर्म युद्ध
Mahabharat EP 8 - कुंती ने क्यों बनाया भीम को राक्षस का भोजन | महाभारत एक धर्म युद्ध
Description
महाभारत का आठवां (8वां) एपिसोड माता कुंती के महान चरित्र, उनके निस्वार्थ धर्म और महाबली भीम के असीम पराक्रम की एक बहुत ही प्रेरणादायक और एक्शन से भरपूर कहानी है। हिडिम्ब वन को पार करने के पश्चात, ब्राह्मणों का भेष धारण किए हुए पांचों पांडव और माता कुंती 'एकचक्र नगरी' नामक एक छोटे से और शांत नगर में पहुंचते हैं। वहां वे एक बहुत ही दयालु और नेक ब्राह्मण परिवार के घर में आश्रय लेते हैं। पांडव दिन में भिक्षा मांगते हैं और रात में ब्राह्मणों की तरह जीवन व्यतीत करते हैं। एक दिन, जब पांडव घर पर नहीं होते, कुंती सुनती हैं कि जिस ब्राह्मण परिवार ने उन्हें आश्रय दिया है, वह परिवार फूट-फूट कर रो रहा है। कुंती उनके दुःख का कारण पूछती हैं। ब्राह्मण रोते हुए बताता है कि इस नगर के पास 'बकासुर' नाम का एक अत्यंत क्रूर, विशालकाय और नरभक्षी राक्षस रहता है। बकासुर ने नगरवासियों के साथ एक समझौता किया है कि वे हर हफ्ते एक बैलगाड़ी भरकर ढेर सारा भोजन और एक इंसान उसे भेजेंगे; यदि वे ऐसा नहीं करेंगे तो वह पूरे नगर को तबाह कर देगा। आज इस ब्राह्मण परिवार की बारी है कि उनके घर से किसी एक सदस्य को बकासुर का भोजन बनने के लिए जाना होगा। परिवार के सदस्य इस बात पर लड़ रहे हैं कि कौन अपनी जान कुर्बान करेगा। माता कुंती, जो एक क्षत्राणी हैं और जिनके भीतर धर्म कूट-कूट कर भरा है, यह सब सुनकर अत्यंत विचलित हो जाती हैं। वे सोचती हैं कि जिस परिवार ने उनके बुरे वक्त में उन्हें छत दी, उसके प्राणों की रक्षा करना उनका परम धर्म है। कुंती ब्राह्मण से कहती हैं कि आज आपके घर से कोई नहीं, बल्कि मेरा बेटा 'भीम' बकासुर का भोजन लेकर जाएगा। जब युधिष्ठिर को यह बात पता चलती है, तो वे कुंती से पूछते हैं कि उन्होंने अपने ही बेटे को मौत के मुंह में क्यों धकेल दिया? कुंती बड़े गर्व से उत्तर देती हैं, "मुझे अपने भीम के बाहुबल पर पूर्ण विश्वास है; बकासुर उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता। और एक क्षत्रिय का पहला धर्म शरणागत की रक्षा करना है।" भीम बड़े चाव से वह बैलगाड़ी भरकर भोजन लेते हैं और जंगल की ओर निकल पड़ते हैं। जंगल में पहुंचकर, भीम बकासुर को बुलाने के बजाय खुद ही मजे से वह सारा स्वादिष्ट भोजन खाने लगते हैं। जब बकासुर यह देखता है कि कोई साधारण मनुष्य उसका भोजन खा रहा है, तो वह क्रोध से पागल हो उठता है। वह बड़े-बड़े पेड़ उखाड़कर भीम पर हमला करता है। इसके बाद भीम और बकासुर के बीच एक अत्यंत भयंकर, हास्यपूर्ण और हिंसक मल्ल-युद्ध (कुश्ती) शुरू होता है। भीम बकासुर को खिलौने की तरह हवा में उछालते हैं, उसे बुरी तरह पीटते हैं और अंततः उसकी रीढ़ की हड्डी तोड़कर उसका वध कर देते हैं। भीम बकासुर के विशाल शव को नगर के द्वार पर फेंक देते हैं, जिससे पूरी एकचक्र नगरी हमेशा के लिए राक्षस के आतंक से मुक्त हो जाती है। यह एपिसोड भीम की ताकत और कुंती के न्यायप्रिय चरित्र का एक अद्भुत चित्रण है।
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Movie Details
Language
Hindi
Category
mahabharat
Duration
Episode 8
Release Year
1988











